आज भी बैलों की जगह हल में जोती जाती हैं बेटियां

प्रवेश गोयल

रायपुर- यह तस्वीर नहीं, बल्कि बस्तर का वह चेहरा है, जहां आज भी ऐसे बहुत से गरीब किसान हैं, जिनके पास खेतों की जोताई के लिए ना बैल हैं, ना ही जरूरी संसाधन। ऐसे में कोंडागांव जिला मुख्यालय से उमरकोट मार्ग पर 30 किमी दूर स्थित मालगांव के बुजुर्ग आदिवासी किसान की बेटियां बैलों की जगह खुद जुतकर महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश कर रही हैं। यही वजह है कि बस्तर के आदिवासी परिवारों की अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाली नारी के विवाह के दौरान वर पक्ष धनराशि देता है, जिसे मानवशास्त्री वधुमूल्य कहते हैं।