शाबास कलेक्टर….आपने तो संवार दी 14 गरीब बच्चों की जिंदगी

प्रवेश गोयल-  सक्सेज स्टोरी

सूरजपुर- कहा जाता है कि बच्चे माट्टी के धरोंधे होते है और कुम्हार उसे आकार देकर बहुमूल्य बना देता है। यहां कुम्हार की भूमिका निभाई जिले के दूरदर्षी कलेक्टर केसी देवसेनापति ने। उन्होंने जिले के 14 ऐसे बच्चों का चयन प्लास्टिक इंजिनियर के प्रषिक्षण के लिए जो गरीब व बेरोजगार थे एक सिल्पकार की तरह उनकी प्रतिभा को पहचान कर कलेक्टर केसी देवसेनापति की पहल पर प्रषिक्षण प्राप्त कर उन 14 बच्चों में न केवल उस कार्य में दक्षता हासिल की बल्कि उसे आजीविका का स्रोत भी बनाया। इन बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही 15 हजार रूपये मासिक आमदनी होने लगी।
गौरतलब है कि जिले के कलेक्टर कसी देवसेनापति ने खनिज न्यास निधि से अक्षय सोनी, करिश्मा बखला समेत रोहित कुमार, भुवनेश्वर, श्रीराम, सुशील कुमार, इन्द्र प्रताप सिंह, विकास कुमार सिंह, कान्ता कुमार, सुदेश कुमार, हेमन्त कुमार आयाम, जयमंगल सिंह, नन्दनी गुप्ता एवं सावित्री पैंकरा को रोजगार मुहैया कराने के उद्देष्य से प्लास्टिक इंजिनियर हेतु 2017 में 12 महीने के कोर्स व 6 महीने के प्रषिक्षण हेतु रायपुर भेजा गया था, जहां उन्होंने प्रषिक्षण प्राप्त कर रोजगार हासिल कर लिया। इनमें से अक्षय सोनी और करिष्मा बखला को महाराष्ट्र के पुणे में 15000 मासिक की नौकरी मिल गई है। वहीं शेष युवक युवतियों को एक बेहतर प्लेटफार्म आजीविका की दृष्टि से मिल गया है।
सफल छात्रों ने कहा शाबास कलेक्टर
कलेक्टर की पहल पर रोजगार हासिल करने के बाद सूरजपुर पहुंचे अक्षय, करिष्मा एवं इन सभी बच्चों ने शुक्रवार को सूरजपुर पहुंचकर सिल्पकार की भूमिका निभाने वाले कलेक्टर केसी देवसेनापति से मुलाकात की और भविष्य संवारने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। रोजगार पाकर प्रषन्नचित युवाओं को देख कलेक्टर भी भाउक हो गये। लगन और ईमानदारी से काम करने की नसीहत दी।
इस दौरान रोजगार प्राप्त कर चुके अक्षय सोनी ने बताया कि परिवार में माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे उसने स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसने बताया कि वह हमेशा से नौकरी कर अपने परिवार की मदद करना चाहता था, जो आज पूरा हुआ है। करिश्मा बखला ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से पली-बढ़ी शासकीय महाविद्यालय में बीएससी उत्तीर्ण करने के बाद प्लास्टिक इंजिनियरिंग में प्रशिक्षण पश्चात् रोजगार प्राप्त होने पर मेरी पदस्थापना पुणे में हुई है, पन्द्रह हजार रूपये प्रतिमाह प्राप्त होता है। इससे मेरे माता-पिता अत्यधिक खुश हैं। मेरे रहने, आने-जाने एवं भोजन की व्यवस्था कंपनी की ओर से निःशुल्क है। जिससे मैं हर महिने पैसे की बचत कर लेती हॅू और मैं चाहती हॅू कि ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षित बेरोजगार छात्र-छात्राओं को इसकी जानकारी प्राप्त कर लाभांवित हो।