ये डॉक्टर नही दरिंदे है-एएन पाण्डेय…जच्चा बच्चा की मौत मामला…महिला डॉक्टर सहित 3 पर अपराध दर्ज…अन्य को बचाने की कवायद जारी…

सूरजपुर.  रश्मि नर्सिंग होम में हुई जच्चा बच्चा की मौत के मामले में पुलिस ने जिला चिकित्सालय में पदस्थ महिला डॉक्टर व दो स्टाफ नर्स पर धारा  304 A,34 के तहत अपराध दर्ज किया है. कहते है कि पाप का घड़ा भरने के बाद छलकने लगता है.. यही कहावत महिला डॉक्टर पर फिट बैठता है. हाल में रश्मि नर्सिंग होंम में हुई जच्चा बच्चा की मौत के बाद डॉक्टर मैडम का पुराना पाप भी सामने आने लगा है. लोग सोशल मीडिया में शेयर भी कर रहे है. फिलहाल जच्चा बच्चा की नर्सिंग होम में मौत के मामले में काफी जद्दोजहद के बाद कोतवाली पुलिस ने महिला डॉक्टर रश्मि कुमार,स्टाफ नर्स अंजली तिर्की सहित मौसमी तिर्की पर अपराध दर्ज किया किया है FIR में उल्लेख है कि जिला चिकित्सालय की जांच टीम की जांच रिपोर्ट में इन तीनो ने इलाज में घोर लापरवाही की थी. पुलिस ने इसे आधार बनाकर डॉक्टर और स्टाफ नर्स पर अपराध कायम किया..?  पर सवाल यह है कि पुलिस अपनी जांच में किसे और क्यों बचा रही है पुलिस की जांच विवेचना क्या महज दिखावा है..? जच्चा बच्चा के मौत के मामले में नर्सिंग होम डॉक्टर दम्पति की भागीदारी.. ब्लड की आपूर्ति..नर्सिंग होम के स्टाफ…सहित अस्पताल के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका को नजर अंदाज किया जा रहा है. जिस तरह जिला अस्पताल सहित रश्मि नर्सिंग होम में कारित घटना आम लोगो की नजर में दूध की तरह साफ है लेकिन जांच करने वाले अधिकारी दिन को रात..रात को दिन बनाने साबित करने में जुटे हुए है. इसे अधिकारियों का निकम्मेपन समझा जा सकता है. पूरे प्रकरण में कई हास्यप्रद बयान दिए गए, डॉक्टर मैडम का कहना है कि वे नर्सिंग होम में काम करती है जबकि पूरा नर्सिंग होम उन्ही की सम्पति है घर भी है डॉक्टर पति के साथ दो-दो जगह काम कर रही है. जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया था रश्मि नर्सिंग होम का टेम्परेरी लायसेंस है, कुछ चर्चा सामने आई कि रतन लाल गुप्ता के लाइसेंस पर संचालित है. तमाम तरह की ऊलजलूल दावों के विपरीत अब तक साफ नही हो पा रहा कि नर्सिंग होम का संचालन वैध है या अवैध…? न तो स्वास्थ अधिकारी बता पा रहे न ही पुलिस अमल इस रहस्य से पर्दा उठा पा रही..? जबकि जच्चा बच्चा कांड के आरोपियों को बचाने में पूरी कायनात लगी हुई है पर्दे के पीछे इस कृत्य में एक रैकेट सक्रिय था और इस तरह कार्य को अंजाम देता रहा. 

नवजातों का कब्रगाह… 

जच्चा बच्चा कांड के बाद कई ऐसे लोग भी सामने आ रहे है जिन्होंने ने अपने जिगर का टुकड़ा खोया है कई माता पिता अपनी पुत्री को खोया. इस घटना के बाद लोगो मे आक्रोश व्याप्त है कई जानकारों ने बताया जिस नर्सिंग होम में जच्चा बच्चा की मौत हुई है वहाँ न जाने कितने नवजातों ने दम तोड़ा है. बच्चों का कब्र बन चुके होंम के आसपास कई नवजात मिट्टी में दफन है.

लापरवाही की अनदेखी करना

अपने अस्पताल के डॉक्टरों के लापरवाही को नजर अंदाज करना स्वास्थ अधिकारी हो भारी पड़ गया. जच्चा बच्चा कांड को लेकर लेट लतीफ के साथ अपने स्टाफ को बचाने के मामले में साहब खुद सवालों के घेरे में आ गए है. कई तरह के लांछन लग रहे जो मालूम तो सभी को है पर पर्दानशीं थी. अब इस कांड के बाद पर्दा पूरी तरह साफ नजर आने लगा है. एक कलमकार ने तो नर्सिंग होम में हुए जच्चा बच्चा कांड की कलई खुल के रख दी है तो वही साहब की राजनीति पहुँच उनकी योग्यता की वाट लगाकर इज्ज़त तार तार कर दी है. जिसकी नगर सहित प्रदेश में जमकर चर्चा है. पद और पहुँच..?

डाक्टर नही दरिंदे है…

अधिवक्ता व समाजिक कार्यकर्ता कार्यकर्ता एएन पाण्डेय ने बताया कि सरगुजा संभाग में शासकीय और गैरशासकीय डाक्टर दोनो मिलकर मौत का व्यापार चला रहे है छ०ग० शासन ने राजपत्र में जारी नर्सिंग होम,क्लीनिक स्थापना के लिये जो मानक अधिनियम 2010-2013 में है उसका पालन नही कर रहे है अवैध मौत का धंधा खोलकर बैठ गये है.शासकीय चिकित्सक तो और बड़े मौत के व्यापारी बन गये है, ये जान लेने वाले शौतान है. नर्सिंग होम में जच्चा बच्चा की मौत हुई है जिस तरीके से अस्पताल जाया गया और दोनो की मौत हुई पुलिस FIR में कई खामिया है मात्र 304 A, 34 लगाये गये है जबकि स्पष्ट है कि योजना बद्ध साजिस करके धन कमाने के लिये मरीज को गये, 120 बी, 415,419, 420, 467, 478,471 लगने थे. नवजात को दफन करवाना, जबकि पीएम होना चाहिये, खुन मंगवाए गए और एमबुलेस को लौटा रहे है ऐसे दरीदे डाक्टर है इनको पैसा कमाना है मरीजो को 5 लाख रुपये का चेक समझते है नगद भी ले रहे है सरकार इतनी सुविधाये दे रखी है. मात्र कागजी पुर्ति की गई है इस मामले को न्यायलय में ले जाया जायेगा-एएन पाण्डेय, अधिवक्ता व समाजिक कार्यकर्ता