जिले में जननी सुरक्षा योजना फेल..एक सप्ताह में पांच नवजातो ने तोडा दम

राजेश सोनी
सूरजपुर-जिले में मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए सरकार द्वारा योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया जा रहा है, फिर भी सूरजपुर के दुरस्थ्य क्षेत्र बिहारपुर चांदनी मे शिशु मृत्यु दर में भी कमी नहीं आ पा रही है।यहाँ बताना यह जरुरी होगा कि जिले के वनाचल क्षेत्रो में से एक  बिहारपुर चांदनी क्षेत्र मे बीते एक सप्ताह मे तीन शिशुओ की मौत का आकड़ा पांच पहुच गया है!
 सूरजपुर जिले के ओडगी विकासखण्ड अंतर्गत बिहारपुर चांदनी क्षेत्र मे एक सप्ताह के अंदर तीन शिशुओ  सहित पांच बच्चो की  मौत ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है, इस वनांचल क्षेत्र मे नवजात बच्चो की  मौत का आकडा निकाला जाये तो परिणाम काफी चौकाने वाला होगा, यहा गर्भवती महिलाओ का पंजीयन तो किया जाता है पर उनकी सुरक्षा पर आधारित स्वास्थ्य सुविधाओ का मिलना दुर्लभ रहता है! स्वास्थ्य विभाग में तैनात ज्यादातर अधिकारी ऐसे है जिन्हें ग्रामीण क्षेत्र में  क्या हो रहा है इसकी जानकारी लेने में कोई दिलचस्पी नही है।
आपको बता दे कि स्वास्थ्य सुविधा को तरसता बिहारपुर चांदनी क्षेत्र के कछवाही गांव के लक्षन पनिका की पत्नी शांती ने एकसाथ जुडवा बच्चे को  18 जुलाई को जन्म दिया लेकिन स्थानीय स्तर पर  संस्थागत प्रसव की सुविधा विभाग के जमीनी अमले द्वारा शुलभ ना कराये जाने से एक शिशु ने तो जन्म के साथ ही दम तोड़ दिया वही दुसरे शिशु की प्रसव के लगभग 8 घंटे के बाद मौत हो गई! इतना ही नहीं प्रसव के बाद शिशुवती माँ शांती की तबियत भी  बिगडने लगी तो उसे मध्यप्रदेश के बैढन ले जाया गया पर उसे वहा से रिफर कर उत्तरप्रदेश के शक्तिनगर के अस्पताल मे ले जाकर ईलाज करवाया गया! ठीक इसी दिन उसी गांव से लगा ग्राम मोहली की रहने वाली सतवती पति रामलक्ष्मण को  प्रसव पीडा होने पर उसे 102 वाहन की सुविधा नही मिलने पर निजी वाहन कर उसे बिहारपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती किया गया,जहा पर उसने एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया, जच्चा बच्चा स्वस्थ्य रहने पर उसकी छुटटी करने के बाद उसकी तबीयत बिगडने पर उसे बिहारपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दुबारा लाया गया लेकिन रविवार को बंद होने का हवाला देकर उसे जिला अस्पताल सहित अन्य जगह जाने की सलाह दिये जाने पर निजी वाहन से मध्यप्रदेश के बैढन ले जाते समय बीच रास्ते मे नवजात की मौत हो गई!
यह वही बिहारपुर चांदनी का क्षेत्र है जहा पिछले वर्ष मानसुन मे मलेरिया बुखार से 27 बच्चे समेत करीब तीन दर्जन से ज्यादा ग्रामीण मौत के गाल मे समां चुके है ,हालाकि जिला प्रशासन ने गांव मे कैम्प लगाकर मौत के बढते  आकडो को  रोकने की पुरजोर कोशिश की थी, पर स्वास्थ्य विभाग पहले की गलती का सबब ना लेते हुये इस क्षेत्र मे स्वास्थ्य सुविधाओ का विस्तार करना भुल ही गया! और उस दौरान  जिले के चिकित्साधिकारी ने बिहारपुर चांदनी क्षेत्र मे 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधा देने के जो  दावे किये थे वे सभी दावे हवा-हवाई ही साबित हुए सच्चाई यह है कि आज भी   बिहारपुर चांदनी क्षेत्र  के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओ के लिये तरस रहे है!
मध्यप्रदेश जाकर कराते है ईलाज
बिहारपुर चांदनी क्षेत्र मे रहने वाले ग्रामीण ज्यादा तबीयत खराब होने पर मध्यप्रदेश के बैढन जाकर ईलाज कराते है तो वही आर्थिक रुप से कमजोर लोग उचित स्वास्थ्य के अभाव मे दम तोड देते है!
गर्भ में कई बच्चों की हुई मौत 
प्रसव के कई मामलो में नवजातों की मौत गर्भ में हो जाती  है। ऐसे कई मामले आए दिन सामने आते रहते है। नवजातो की गर्भ में मौत हो जाना गर्भवती महिलाओं में खून की कमी और कुपोषण कमजोरी को ही डॉक्टरों के द्वारा माना जा रहा है। तो वही गर्भवती महिला का कुपोषण या कमजोर होेने का सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चें पर ही पडता है। जबकि एलएचएम द्वारा चलाये  जा रहे जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को मातृ शिशु सुरक्षा हेतु  निःशुल्क रक्त और अन्य सुविधा देना है!