पुलिस टीम ने पकड़ा नशीली दवाओं का जखिरा, लेकिन जप्ती के 20 घण्टे बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई, पुलिस के कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

राजेश सोनी
सूरजपुर- नशीली दवाईयों के विरूद्ध पुलिस द्वारा चलाये गये अभियान के तहत जिले के क्राईम ब्रांच टीम के द्वारा देर रात की गई छापामार की गई कार्रवाई और मीडिया को कार्रवाई से अवगत कराने में की जा रही हिला हवाली से कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। पुलिस टीम ने मुखबीर भेजकर महावीरपुर संजयनगर के दो नशे के कारोबारी के यहां से नशीली दवाईयां मंगाई और रात 12 बजे के बाद दोनों घर में छापामार कर बड़ी मात्रा में नशीली दवाई तो पकड़ी लेकिन 20 घण्टे बाद भी कार्रवाई की सूचना सार्वजनिक न किये जाने से पुलिस पर मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं।
गौरतलब है कि सूरजपुर पुलिस की क्राईम ब्रांच टीम ने जिले के सरहदी ग्राम संजयनगर महावीरपुर में नशीली दवाओं का कारोबार संचालित होने की सूचना पर गेम पलान तैयार किया था। इस पलान के तहत पुलिस टीम ने मुखबीर को पहले नशे के कारोबारी राजेश समझदार और विक्की राव के घर भेजा और एक- एक सीसी नशीली दवाई खरीदवाई। फिर पुलिस ने उसी मुखबीर के माध्यम से एक पेटी नशीली दवा क्रय करवाई और फिर क्राईम ब्रांच टीम ने दल बल के साथ दोनों कारोबारी के घर दबिश दे दी। इस दबिश के दौरान दोनों कारोबारियों से बड़ी मात्रा में नषीली दवा बरामद तो की लेकिन इसकी जानकारी 20 घण्टे बाद भी सार्वजनिक नहीं कर पाये। सूत्रों की माने तो इन दोनों कारोबारियों से लगभग एक हजार सीसी नषीली दवा जप्त की है।
आखिर पुलिस क्यों सार्वजनिक नहीं कर रही जानकारी
देवलोक ने पुलिस की इस कार्रवाई के संबंध में सीएसपी डीके सिंह और क्राईम ब्रांच टीम के प्रभारी कपिलदेव पाण्डेय समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से सम्पर्क किया गया तो इन्होंने पहले तो फोने ही रिसिव नहीं किया और बाद में सीएसपी डीके सिंह से सम्पर्क होने पर उन्हांने इस कार्रवाई के संबंध में अनभिज्ञता जाहिर की। यहां यह बताना आवश्यक है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा जिले के पुलिस संबंधी अपराधों एवं कार्रवाईयों की जानकारी मीडिया को उपलब्ध कराने हेतु जिले के सीएसपी डीके सिंह को अधिकृत किया है, लेकिन जब अधिकृत अधिकारी ही पुलिस की कार्रवाई के प्रति 20 घण्टे बाद भी अनभिज्ञता जाहिर करें तो पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना लाजमी है। यहां सवाल यह भी उठ रहा है कि रात साढ़े 12 बजे की गई छापामार कार्रवाई को सर्वाजनिक करने में पुलिस आखित क्यों कतराई रही है। कही कोई लिपा पोती या लेन- देन का चक्कर तो नहीं।