चुनावी चक्रम….प्रेमनगर में उठने लगी अनारक्षित सीट से अनारक्षित उम्मीदवार की मांग, कांग्रेस में विंकी बाबा तो भाजपा में कई अनारक्षित नेता हैं बेहतर विकल्प…. प्रवेश गोयल*

प्रवेश गोयल
सूरजपुर- लम्बे समय तक आरक्षित रही प्रेमनगर विधानसभा सीट पर प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा अनारक्षित मुक्त होने के बावजूद अजजा वर्ग के व्यक्तियों को उम्मीदवार बनाये जाने की रणनीति पर पुर्नविचार करते हुए अनारक्षित सीट पर अनारक्षित वर्ग के व्यक्ति को टिकिट देने की मांग जमीनी स्तर पर उठने लगी है और 2018 के विधानसभा चुनाव में देष की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से जनसमान्य को अपेक्षा है कि वे प्रेमनगर विधानसभा सीट से इस बार अनारक्षित वर्ग का उम्मीदवार उतार कर लम्बे समय से इंतजार कर हे अनारक्षित वर्ग के कार्यकर्ताओं व मतदाताओं की अपेक्षा पूर्ण करेंगे। 
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में प्रेमनगर और भटगांव विधानसभा सीट अजजा वर्ग के आरक्षण से मुक्त हुई, भटगांव में तो भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों ने सामान्य और पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार उतारे लेकिन प्रेमनगर में भाजपा ने दोनों चुनाव में अजजा तथा कांग्रेस ने दूसरे चुनाव में अजजा वर्ग का उम्मीदवार उतारा, यहां दोनों ही दलां में सामान्य यानि अनारक्षित वर्ग के कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है, इसके बावजूद दोनों राजनीतिक दलों ने आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को टिकिट दिया। इस परम्परा से अनारक्षित वर्ग के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाएं पूरी तरह से आहत है। 
*लम्बे समय से अनारक्षित वर्ग ही संभाल रहा पार्टी की बागडोर* 
भाजपा हो या कांग्रेस या फिर बसपा और जनता कांग्रेस सभी राजनीतिक दलों की बागडोर लम्बे समय से अनारक्षित वर्ग के व्यक्ति के हाथों में ही रही है, उसी की मेहनत और रणनीति के कारण ही पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशियों की हार जीत होती रही है। कार्यकर्ताओं की भावनाआें की अनदेखी के कारण ही पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार हुई थी, यदि पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के विपरीत लोकप्रिय प्रत्याशी उतारने की बजाये आरक्षित वर्ग का प्रत्याषी दिया तो चुनाव के परिणामों का प्रभावित होना पुनः एकबार तय दिख रहा है, जनता कांग्रेस जोगी, बसपा और आप पार्टी ने तो अनारक्षित उम्मीदवार तय करके अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। 
*उठने लगी अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवार की मांग* 
प्रेमनगर अनारक्षित सीट से अब तक जिनके द्वारा दावेदारी की जा रही है उनमें अधिकांश अनारक्षित वर्ग के है, भाजपा और कांग्रेस जैसी दोनों प्रमुख पार्टियों में अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की बड़ी फौज है, जनसामान्य भी इस बार सामान्य वर्ग का विधायक चाहता है, जिस तरह भटगांव में अब तक अनारक्षित सीट से अनारक्षित उम्मीदवार उतारा जाता रहा है, उसी तरह प्रेमनगर क्षेत्र में भी अनारक्षित वर्ग के व्यक्ति को विधायक बनाने अंदर ही अंदर मुहिम चल रही है। 
*भाजपा की तरकष में हैं कई प्रभावी तीर*
वर्तमान में कांग्रेस की ओर से विधायक खेलसाय सिंह का पार्टी के अंदर विरोध को देखते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष विन्ध्येश्वर शरण सिंहदेव अनारक्षित वर्ग से बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जबकि भाजपा में रेणुका सिंह की 18 हजार से भी अधिक मतांतर से हारने के बाद पार्टी के पास अनारक्षित वर्ग से कई प्रभावी विकल्प हैं, अनारक्षित वर्ग से पूरे क्षेत्र में दखल रखने वाले पूर्व पापुनि अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल, भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक बाबूलाल अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकृपाल साहू, नपाध्यक्ष थलेश्वर साहू और भाजयूमो जिलाध्यक्ष रितेश गुप्ता पर पार्टी आसानी से दांव लगा सकती है, ऐसे में कांग्रेस की ओर से कांग्रेस जिलाध्यक्ष विन्ध्येश्वर शरण सिंहदेव भी बेहतर उम्मीदवार साबित हो सकते है।