जिओ का नेटवर्क हुआ बेहद कमजोर, नेटवर्क ढूंढते हुए दिख रहे जिओ उपभोक्ता

सूरजपुर (रक्षेन्द्र प्रताप सिंह) – प्रदेश सरकार भले ही संचार क्रांति के तहत मोबाइल वितरित कर छत्तीसगढ़ के डिजिटल होने के दावे करती हो. लेकिन धरातल पर स्थिति बिलकुल उलट है. स्काई योजना के तहत मोबाइल बांटने के बाद से जिओ का नेटवर्क खोजना पड़ रहा है. वहीं घटिया नेटवर्क ने जिओ उपभोक्ताओं को परेशान कर दिया है.
आज के दैनिक जीवन में नेटवर्क अहम हिस्सा बन चुका है. लगभग हर घर में एक या उससे अधिक मोबाइल है. नेटवर्क के बड़े व्यापार को देखते हुए कई बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं. इसके बावजूद सूरजपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी ऐसे कई गाँव ऐसे हैं जो नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं. वहीं बी एस एन एल ने तो दशक पूर्व ही टावर लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. लेकिन इन टावर में बीटीएस लगाना भूल गई. नतीजा सरकार टावर के लिए अधिग्रहीत भूमि के एवज में किराया तो दे रही है परंतु लोगों को नेटवर्क नहीं मिल सका. जबकि निजी कंपनियों जैसे आइडिया, एयरटेल, जिओ ने 4 जी स्पीड लॉंच कर अपने सिम कार्ड की टावर की क्षमता से कहीं ज्यादा जमकर बिक्री भी की. नतीजा उपभोक्ताओं को सेवा में कमी मिल रही है.