टावर लगने के 6 माह बाद भी किसानों को नहीं मिला मुआवजा…क्षेत्र के 1हजार से भी अधिक किसान और जनप्रतिनिधि हुए लामबंद..मुआवजा नहीं मिलने पर रोक देंगे टावर का काम..

सूरजपुर-बिश्रामपुर से कौशलपुर तक 132 केवीए विद्युत पावर लाइन बिछाने डेडरी, सलका, पौड़ी, केतका, कोट, आमगांव, जोबगा, चंद्रपुर समेत दो दर्जन से भी अधिक ग्रामों की जमीन का उपयोग तो टावर कंपनी के द्वारा कर लिया गया लेकिन प्रभावित किसानों को मुआवजा के लिए तहसील कार्यालय का चक्कर लगवाया जा रहा है। प्रभावित किसान इस बात से रुष्ट होकर लामबंद हो गए हैं, और डेडरी ग्राम में चल रहे केबल बिछाने के काम को रोक दिया है। कहते हैं कि जब तक मुआवजा का हिसाब नहीं होगा, तब तक आगे का काम नहीं करने दिया जाएगा।गौरतलब है कि 132 के व्हीए विद्युत पारेषण लाइन बिछाने के लिए शासन स्तर पर बिश्रामपुर सतपता से कौशलपुर तक लगभग दो दर्जन ग्रामों के 1 हजार से भी अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। इन किसानों को टावर लगाने से पहले ही मुआवजा देने का वादा प्रशासनिक स्तर पर किया गया था। कागजो में तो इनका मुआवजा बना देने की भी जानकारी दी गई लेकिन अभी तक इन्हे मुआवजा नहीं मिल पाया है। प्रभावित किसानों के द्वारा विगत छह-सात महीने से तहसील कार्यालय का चक्कर लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुआवजा निर्धारण में भी अधिकारियों द्वारा दोहरा मापदंड अपनाया गया है।


*टावर की भूमि के मुआवजा निर्धारण में है गड़बड़ी*

जिस भूमि पर टावर लगाया गया है उक्त भूमि के मुआवजा निर्धारण में दोहरा मापदंड अपनाया गया है। टावर के लिए उपयोग की गई 85% भूमि का किसी किसान को 14 हज़ार रुपए से भी अधिक राशि निर्धारित किया गया तो किसी किसान की भूमि का मुआवजा महज 1649 रूपए निर्धारित कर किसान को सीधे तौर पर क्षति पहुंचाई गई है। प्रभावी और भोले भाले किसानों में मतभेद उत्पन्न किए जाने से जनप्रतिनिधिगण नाराज हैं और लामबंद होकर डेडरी ग्राम में टावर का काम रोक दिए हैं।


*मुआवजा वितरण के बाद ही होगा बचा हुआ काम*

प्रभावित किसान मुआवजा न मिलने से लामबंद है, मुआवजा के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट काट कर परेशान किसान अब गांव के जनप्रतिनिधियों के साथ टावर लगाने वाली एजेंसी का खुलकर विरोध करने के लिए एकजुट हो गए हैं। बुधवार को किसानों एवं जनप्रतिनिधियों का दल सूरजपुर तहसील कार्यालय में एकजुट हुआ जिसमें डेडरी के कामता प्रसाद, राधेश्याम दुबे, केतका के बाबूलाल सिंह, तिलक सिंह महादेव प्रसाद, मुखदेव, देवनारायण, देवी प्रसाद, जितेंद्र के अलावा सलका के कलसाय, सुकुल राम, प्रेमसाय, शंकर और कैलाश वगैरह शामिल हैं, जो कहते हैं कि जब तक एक एक किसान को मुआवजा नहीं मिल जाएगा तब तक टावर के आगे का काम नहीं करने देंगे।