छत्तीसगढ़,उम्मीदें और चुनौतियां..

लेख
राजकुमार साहू ( लेखक पत्रकार )

छग, उम्मीदें और चुनौतियां 
             छत्तीसगढ़ ने 18 बरसों में विकास की दिशा में कदम बढ़ाया है, लेकिन छग के विकास में अभी कई ऐसी बड़ी समस्याएं हैं, जो प्रदेश के विकास में रोड़े बनी हुई हैं। छग में गरीबी, बेरोजगारी, पलायन, कुपोषण और माओवाद ऐसी बड़ी समस्या है, जिसे दूर किए बिना छग विकास पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता। छग में अकूत खनिज संपदा है, जिससे विकास में छग उन राज्यों से तेजी के साथ आगे बढ़ा है, जो छग के साथ अस्तित्व में आए थे। कहा जाता है कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और छग ने भी 18 बरसों में काफी प्रगति की है। पीछे मुड़कर देखने से छग, दूसरे राज्यों से आगे दिखता है, लेकिन छग में जितना खनिज संपदा है, उसके हिसाब से भी छग का विकास इन 18 बरसों में उतना नहीं हो सका है। छग के विकास को लेकर उम्मीदें भी बहुत है और उतनी चुनौतियां भी दिखाई देती हैं।            

मध्यप्रदेश से अलग होकर छग राज्य 1 नवंबर 2000 में बना। पहले छग की खनिज संपदा और संसाधन का उपयोग मप्र के बड़े शहरों के विकास में होता था, उससे इस क्षेत्र का विकास प्रभावित होता था। छग नया राज्य बना तो विकास की उम्मीदें भी जगी और छग में विकास भी पहले के अनुपात में अधिक हुआ, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बरकरार हैं, जो उम्मीदों पर भारी पड़ जाती हैं। इस तरह चुनौतियों से बाहर निकलकर, विकास में आगे छग का निर्माण करने के लिए बेहतर नीति बनाने की जरूरत है। छग के विकास के लिए कई नारे भी दिए जा चुके हैं, लेकिन विकास के मामले में यह नारे, नारे तक ही सीमित रहे। छग में अभी जो चुनौतियां हैं, उसमें कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनकी बातें बरसों से होती आ रही हैं, लेकिन नतीजे वैसे नहीं आ सके हैं, जिसकी उम्मीदें छग की अवाम को थी। उम्मीदें बनी हुई हैं और चुनौती भी बरकरार है।            

छग के विकास में कई पहलू है, जो रोड़े बने हुए हैं। इसमें गरीबी भी है। छग में गरीबी की मार एक बड़ी आबादी बरसों से सहती आ रही है। गरीबी के लिए सरकार की नीति के साथ ही कई और दूसरी बातें भी जिम्मेदार है। रोजगार नहीं मिलने से समस्या अधिक विकराल है। पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार के लिए बरसों चक्कर लगानी पड़ती है, तब भी रोजगार नहीं मिलता। छग में शिक्षा के हालात को भी बेहतर करने की जरूरत है। स्कूल शिक्षा की पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और उसका लाभ उच्च शिक्षा में मिलेगा। पढ़ाई बेहतर नहीं होने से आगे रोजगार में भी दिक्कतें होती है। कौशल विकास के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वह भी नाकाफी है। रोजगार के क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास का बड़ा योगदान रहता है, लेकिन सही संतुलन के अभाव में युवाओं को इसका सीधा नुकसान होता है। इस तरह रोजगार नहीं मिलने से आर्थिक हालत में सुधार नहीं होता और फिर उसके बाद पलायन की नौबत आ जाती है। गरीबी के कारण कुपोषण की समस्या विकट है। एक बड़ा तबका गरीबी के जाल में जकड़ा है और शिक्षा, रोजगार से लेकर तमाम अड़चनों से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में जब आर्थिक हालत बिगड़ती है तो उसका सीधा असर खानपान ओर स्वास्थ्य पर पड़ता है। इस तरह कह सकते हैं कि गरीबी के कारण कुपोषण की मार भी झेलनी पड़ती है।              

रोजगार की कमी के कारण छग के लोगों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है। यह भी एक बड़ी समस्या है। पलायन के कारण बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है। इस तरह पलायन भी नई पीढ़ी के लिए घातक साबित होता है। रोजगार के अभाव में युवाओं में जो भटकाव की स्थिति बनती है। उससे युवा पीढ़ी ऐसे रास्ते पर चल पड़ती हैं, जहां नकारात्मक बातें युवा पीढ़ी को जकड़ लेती हैं। छग में रोजगार का सही संतुलन नहीं होने से लोगों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है और वहां भी छग के लोगों को कई तरह की पीड़ा झेलने पड़ते हैं।          

शिक्षा, रोजगार पर बेहतर काम होगा तो गरीबी भी मिटेगी और लोगों के आर्थिक हालत में सुधार होने से कुपोषण की खराब स्थिति में भी बदलाव होगा। छग में शिक्षा के क्षेत्र में अभी और बेहतर काम होने बाकी है। रोजगार की दिशा में तो और भी अधिक बेहतर नीति बनाकर जोर देने की जरूरत है, क्योंकि युवाओं को रोजगार मिलने से, उनकी ऊर्जा छग के विकास के लिए लगेंगी। छग की खनिज संपदा से सूबे का विकास, और तेजी से किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सकारात्मक सोच के साथ अवाम की जिंदगी बदलने वाली नीति बनाने की जरूरत है। छग की अवाम के मन में सूबे के विकास को लेकर बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन जो चुनौती बरसों से छग के समक्ष बनी हुई है, उन समस्याओं गरीबी, बेरोजगारी, पलायन, कुपोषण और माओवाद के लिए कड़े और बड़े कदम उठाने की जरूरत है। अभी माओवाद से छग को जूझना पड़ रहा है। यह और भी बड़ी समस्या है, जहां धन के साथ लगातार जन की हानि हो रही है। माओवाद ने छग के विकास की तस्वीर भी बिगाड़ी है। माओवाद से निपटने के लिए सरकार ऐसी कारगर नीति बनाए, जो स्थायी और कारगर हो। छग का बड़ा आर्थिक बजट, माओवाद से निपटने में खर्च हो रहा है। माओवाद पर लगाम लगने के बाद जब यही बजट, आम लोगों के विकास में खर्च होंगे तो निश्चित ही विकास के मामले में छग की तस्वीर बदलेगी। इस तरह सभी क्षेत्रों में दूरगामी सोच के साथ जनहित की नीति को आगे बढ़ाने से छग की जनता का भला होगा और जब सूबे की जनता विकास करेगी तो फिर छग, विकास के पथ पर देश के अन्य राज्यों से भी आगे निकल जाएगा।