फर्जी नामों से बन रही शक्कर कारखाना में हाजिरी,मजदूरों के नाम पर सामने आया फर्जीवाड़ा

प्रतापपुर।जो काम करने नहीं आते वे लोग कारखाना के मजदूर हैं,इनके नाम से रोज हाजिरी बन रही है और इन्हें खुद का मजदूर होने का पता भी नहीं है।मजदूरों के नाम पर यह फर्जीवाड़ा सामने आया है माँ महामाया शक्कर कारखाना केरता में जहां रोज तीस से अधिक मजदूरों की फर्जी हाजिरी बन रही है,प्रबन्धन की सह पर एक कर्मचारी द्वारा किये जा रहे इस फर्जीवाड़े से कारखाना को लाखों का नुकसान हो रहा है और यह अभी से नहीं वरन पिछले कई वर्षों से हो रहा है।               

भ्रष्टाचार की खदान बन चुके माँ महामाया शक्कर कारखाना केरता में एक और मामला सामने आया है जिसमें ऐसे मजदूरों के नाम से हाजिरी बन रही है जिन्होंने कभी कारखाना का मुंह नहीं देखा है,इतना ही नहीं इस फर्जीवाड़े से कारखाना को हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शक्कर कारखाना में हर साल विभिन्न कार्यों के लिए पंजीकृत लेबर ठेकेदारों के माध्यम से मजदूर लगाए जाते हैं जिनकी संख्या सीजन में ज्यादा व बाकी समय कम होती है,सूत्रों के अनुसार प्रबन्धन की सह पर एक कर्मचारी द्वारा इन्हीं मजदूरों के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा किया  जा रहा है,प्रतिदिन करीब तीस ऐसे मजदूरों के नाम से हाजिरी भर पैसा आहरण किया जा रहा जिन्होंने कभी कारखाने का मुंह तक नहीं देखा है।सबसे बड़ी बात है कि इन फर्जी मजदूरों को यह पता भी नहीं है कि वे कारखाने के मजदूर हैं और उनके नाम से हाजिरी बन रही है मजदूरी भी निकल रही है।सूत्रों के अनुसार मजदूरों के नाम पर यह फर्जीवाड़ा प्रबन्धन की जानकारी में हो रहा है जिससे हर महीने कारखाना को लाखों का नुकसान हो रहा है क्योंकि कारखाना में मजदूरी दर प्रति मजदूर 333 रुपये है और तीस मजदूर के हिसाब से दस हजार रुपये करीब प्रतिदिन होता है।सूत्रों की मानें तो यह फर्जीवाड़ा केवल इसी साल नहीं वरन पिछले कई वर्षों से हो रहा है और जानकारी होने के बावजूद प्रबन्धन मामले में कुछ नहीं कर रहा क्योंकि उनकी भी इसमें मिलीभगत मानी जा रही है।जो फर्जी मजदूर उनके नहीं बैंक में खाते – मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़े के लिए पूरी प्लानिंग के साथ काम किया जा रहा है और जो फर्जी मजदूर हैं उनके नाम से बैंक में खाता न खोल उनके नाम से नगद भुगतान दिखाया जाता है जबकि बाकी मजदूरों का बैंक के माध्यम से भुगतान होता है।सूत्रों के अनुसार यदि किसी के लेबर ठेकेदार के नाम से तीस मजदूर हैं और उसमें पांच मजदूर फर्जी हैं तो प्रबन्धन पूरे तीस मजदूर के नाम से ठेकेदार को चेक देगा जिसके बाद ठेकेदार पच्चीस मजदूर का पैसा तो उनके खाते में डालेगा लेकिन बाकी का नगद भुगतान दिखा देता है।मंडल के खाते में ठेकेदार डालते हैं पैसा – सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा कारखाना में एक कर्मचारी रामप्रसाद मंडल के द्वारा कराया जाता है जिसका मूल पद तो शुगर हाउस क्लर्क का है लेकिन लेकिन प्रबन्धन ने सेटिंग के आधार पर लेबर सुपरवाइजर बना दिया है।ठेकेदारों के पास जो फर्जी मजदूरों का पैसा जाता है ठेकेदार वह पैसा मंडल को ही देते हैं और कमाल की बात है कि वह यह पैसा नगद न लेकर स्वयं या अपनी पत्नी के नाम के खाते में लेता है।प्रबन्धन की भूमिका संदिग्ध,उनकी जानकारी में हो रहा फर्जीवाड़ा – सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में प्रबन्धन की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा उनकी जानकारी में हो रहा है और सब कुछ जानते हुए भी शुगर हाउस क्लर्क को सुपरवाइजर बनाकर बैठा दिया गया है जो चार सालों से इस पद पर हैं।सूत्रों की मानें तो लेबर ठेकेदारों ने भी मौखिक रूप से प्रबन्धन को इस फर्जीवाड़े से अवगत कराया था लेकिन प्रबन्धन ने कभी इस पर कार्यवाही नहीं की।