जांजगीर में अनिश्चितकालीन आंदोलन में गरजे पत्रकार..अब आर-पार की लड़ाई के मूड में पत्रकार..विधानसभा अध्यक्ष और जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ की जमकर नारेबाजी..

राजकुमार साहू

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर में बीते आठ दिनों से पत्रकारों का आंदोलन जारी है। शासन-प्रशासन के अडि़यल रवैये से नाराज पत्रकार अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। इसी कड़ी में पत्रकारों ने 12 फरवरी से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। जांजगीर के कचहरी चौक के पास पत्रकारों ने आज धरना प्रदर्शन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत और जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।आपकों बता दें कि जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत के चेंबर से शुरू हुई लड़ाई अब सड़क तक पहुंच गई है। जिपं सीईओ और पत्रकारों के इस विवाद में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने आग में घी डालने का काम किया है। यही वजह है कि पत्रकार जिपं सीईओ और विस अध्यक्ष के खिलाफ गुस्से की आग में उबल रहे हैं। पत्रकारों ने इसके पहले एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन कर अपनी मंशा जाहिर की थी, लेकिन इसे शासन-प्रशासन ने हल्के में लिया। मसलन, पत्रकारों का आंदोलन तेज हो गया। सोमवार को पत्रकारों ने जांजगीर में बाइक रैली निकाली। इसके बाद आज से शहर के कचहरी चौक के पास उन्होंने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। पहले दिन जिले भर के पत्रकार बड़ी संख्या में आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे थे। धरना को संबोधित करते हुए सभी पत्रकारों ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे सम्मानित पद पर आसीन होते हुए डॉ. महंत को इस तरह पत्रकारों का अपमान नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब भी डॉ. महंत अपनी भूल स्वीकार करते हुए खेद प्रकट करते हैं और भविष्य में इस तरह की गलती की पुनरावृत्ति न करने का भरोसा दिलाते हैं तो पत्रकार भी शांत हो जाएंगे। पत्रकारों ने कहा है कि इसी तरह पत्रकारों का आंदोलन आठ दिनों से चल रहा है। इसके बावजूद जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। पत्रकारों ने जिपं सीईओ पर कई तरह का आरोप लगाते हुए कहा कि जिपं सीईओ अब भी यदि अपनी गलती स्वीकार करते हुए पत्रकारों से माफी मांगते हैं तो पत्रकारों का बड़ा दिल है, वो उन्हें माफ कर देंगे। धरना प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने विधानसभा अध्यक्ष और जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पत्रकारों ने आगे भी धरने के साथ चरणबद्ध आंदोलन की बात कही है|

आरक्षक ने छीना पत्रकार का कैमरा…

छत्तीसगढ़ की सत्ता में आने से पहले कांग्रेस पत्रकारों के काफी हितैषी थी। कांग्रेस पत्रकार सुरक्षा कानून की बात कहती थी। लेकिन इसे इत्तेफाक कहिए या फिर इसे असली चेहरा। कांग्रेस यहां सत्ता में आते ही पत्रकारों के खिलाफ लगातार मामले सामने आ रहे हैं। रायपुर के बाद जांजगीर और अब हसौद में पत्रकारों से बदसलूकी का मामला सामने आया है। जिले के हसौद थाने में पदस्थ आरक्षक शशिकांत कश्यप पर पत्रकार का मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट करने का आरोप लगा है। मामले में जैजैपुर क्षेत्र के पत्रकारों ने विरोध जताया है और कार्रवाई की मांग को लेकर पत्रकारों ने एसपी को ज्ञापन सौंपा है। पत्रकारों ने आरक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर 18 फरवरी को हसौद थाना के सामने धरना देने की चेतावनी दी है। पत्रकारों ने बताया कि हसौद के चिस्दा गांव की सरपंच का अविश्वास प्रस्ताव को कवरेज करने पत्रकार गए थे। यहां पत्रकार पंचायत के बाहर वीडियो बना रहे थे। इस दौरान आरक्षक पहुंचा और पत्रकार से मोबाइल छीन लिया। इतना ही नहीं, मोबाइल के वीडियो को भी आरक्षक ने डिलीट कर दिया। मामला बढ़ते देख आरक्षक ने मोबाइल लौटा दिया। आपकों बता दें कि ये वो मामले है जो प्रकाश में आए है, जबकि पत्रकारों के खिलाफ कई मामले ऐसे हैं जो पर्दे के पीछे है।