श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह में जमकर नाचे श्रद्धालु,धूमधाम से हुआ श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह

सचिन तायल

प्रतापपुर।सरहरी समिति में चल रही श्रीमद्गभावत कथा में सातवें दिन श्री कृष्ण और रुक्मणि का विवाह बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। विवाह उत्सव के दौरान प्रस्तुत किए गए भजनों के दौरान श्रद्धालु अपने आप को रोक नहीं पाए और जमकर नाचे।कथा का समापन बुधवार को यज्ञ हवन पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।कथा श्रवण में पहुंचे जिला मंत्री प्रतिनिधि कुमार देव सिंह ने सेड निर्माण के लिए 5 लाख रुपये देने की घोषणा की।
कथा व्यास जयप्रकाश द्विवेदी जी ने श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कथा व्यास जयप्रकाश द्विवेदी जी ने कहा कि रुकमणि साक्षात लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार है। श्रीकृष्ण भरी राजसभा के बीच से रुकमणि को हरण करके द्वारिका ले गए थे । रुकमणि हरण लीला के जरिए श्रीकृष्ण ने मानव को संदेश दिया है कि लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। कर्म से भाग्य बनता है और पुरुषार्थ क से ही मनुष्य को धनलक्ष्मी, सुख, संपदा मिलती है। मनुष्य को निष्काम भाव से अपने कर्तव्य निभाने चाहिए। ईश्वर कर्म का फल अवश्य देता है। श्रीकृष्ण -सुदामा प्रसंग का वर्णन करते हुए श्री द्विवेदी जी ने आपसी प्रेम और भक्ति भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग, यज्ञ, तप, अनुष्ठान आदि का लक्ष्य यही होता है कि हमारी भक्ति भगवान में लगी रहे। संसार के प्रत्येक कण में हमें मात्र अपने प्रभु का ही दर्शन हो। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण मात्र से भक्त के हृदय में ऐसी भावना समाहित हो जाति है और वह मन,वाणी और कर्म से प्रभु में लीन हो जाती है।
भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला में कोई न कोई रहस्य छिपा है। श्रीकृष्ण ने बचपन से ही अद्भुत लीलाएं करके दिखा दिया था कि वे साधारण मनुष्य नही है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण प्यार के भूखे है। सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण को याद करने से भगवान किसी न किसी रूप में चले आते है। कथा के बीच में श्रीकृष्ण व रूकमणी विवाह का आयोजन किया गया था। भगवान श्रीकृष्ण की भव्य बारात निकाली गई जिसमें श्रद्धालुओं ने मधुर भजनों पर जमकर नृत्य किया। श्रीकृष्ण व रूकमणी के फेरों के अवसर पर श्रद्धालुओं ने जमकर दान-दक्षिणा देकर रूकमणी को विदा किया। आयोजन समिति की और से इस मौके पर मिठाई का भी प्रबंध किया गया था। श्री जय प्रकाश द्विवेदी जी महाराज व उनके सहयोगी पण्डित अविषेक द्विवेदी के साथ आए संगीतकार पप्पू तुर्कर,तबला वादक नरेन्द्र प्रताप सिंह,अंकित व बैंजो मास्टर नीलेश के साथ मधुर भजन आज मेरे श्याम की शादी है गाया तो पंडाल में बैठे श्रद्धालु मस्ती में खो गए और सभी ने जमकर ठुमके लगाए। इस दौरान पूरा पंडाल श्री कृष्ण रुक्मणी की जय घोष से गुजायमान हो गया।
श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ स्थल पर प्रतिदिन प्रसाद व महाप्रसाद का आयोजन किया जाता है जिसमें सोमवार को मीडिया प्रभारी चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा, अजीत कुमार गुप्ता व सतीश कुमार गुप्ता के द्वारा किया गया था। कथा का समापन कल बुधवार को यज्ञ हवन पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा