जंगल में झोपड़ी बनाकर रहने वाले आदिवासी परिवारों की झोपड़ी में वन अमले ने लगा दी आग. पेड़ के नीचे रहने को मजबूर हैं आदिवासी परिवार जंगली जानवर से जान माल का है खतरा

सचिन तायल
प्रतापपुर सूरजपुर विगत 20- 25 वर्षों से जंगलों के बीच झोपड़ी बनाकर रह रहे दो आदिवासी परिवारों की झोपड़ी में वन विभाग के कर्मचारियों ने आग लगा दी और इन आदिवासी परिवारों को बेदखल कर दिया इन हालातों में दोनों आदिवासी परिवार खतरों के बीच पेड़ों के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने वन विभाग की इस अमानविय कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया है गौरतलब है कि सूरजपुर जिले के वन परिक्षेत्र बिहार पुर अंतर्गत ग्राम करोंटी निवासी ललन सिंह गौड़ आत्मज शिव मंगल गोंड उम्र लगभग 50 वर्ष का परिवार विगत 15 वर्षों से जंगल में झोपड़ीनुमा मकान बनाकर मवेशी पालन और वनोपज संग्रहण से अपना जीवन यापन करता था । इसी बीच 24 फरवरी को वन विभाग के कर्मचारियों ने ललन सिंह गौर व उसके परिवार को बेदखल करते हुए उसकी झोपड़ी में आग लगा दी जिससे उसका रहने, खाने और सोने का सारा सामान जलकर नष्ट हो इसी प्रकार वन परिक्षेत्र बिहार पुर में ही ग्राम पाटन में ग्रामीण लक्ष्मण सिंह गौड़ आत्मज नानू गॉड भी तंगहाली में जंगल के अंदर झोपड़ी बनाकर लंबे समय से निवास कर रहा था वन विभाग के कर्मचारियों के द्वारा इसके साथ भी ऐसा ही शुरू किया गया इस की झोपड़ी में आग लगा दी और पूरा सामान झोपड़ी के साथ ही जलकर राख हो गया बेदखली के लिए वन विभाग द्वारा अपनाई गई ऐसी अमानवीय प्रक्रिया का गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के द्वारा पुरजोर विरोध शुरू कर दिया गया है।

पेड़ों के नीचे रहने के लिए मजबूर है आदिवासी परिवार को जान माल का खतरा है जंगली जानवर से
खतरा झोपड़ी नुमा मकानों में आग लगा देने के बाद बेदखली की मार झेल रहे दो आदिवासी परिवारों की कहानी भी असहनीय है। दोनों परिवार आर्थिक रूप से कमजोर थे और तंगहाली में पक्के मकान बनाना इनके बस की बात नहीं थी। इन्होंने अपनी आजीविका और जीवन यापन के लिए जंगल में झोपड़ी बना ली थी लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों ने इन्हें बेदखल करने के लिए जो रास्ता अपनाया वह किसी दुश्मन के साथ भी नहीं अपनाया जाता है। उन्होंने झोपडीनुमा मकानों में आग लगा दी और बेदखल कर दिया। अब स्थिति यह है कि ललनसिंह और लक्ष्मण सिंह का परिवार इस असहनीय ठंड और जंगली जानवरों के खतरों के बीच पेड़ों के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं। दोनों आदिवासी परिवारों के मध्य आवासीय संकट उत्पन्न हो गया है। ललन सिंह और उसका परिवार आम पेड़ के नीचे तथा लक्ष्मण सिंह गौड़ का परिवार जंगल के बीच में महुआ पेड़ के नीचे रहने को मजबूर है। खुले में जंगल मे पेड़ के नीचे रहने से जिससे कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है लोगो से मिली जानकारी के अनुसार लगातार जंगली जानवर के विचरण से इनकी जान को भी खतरा है