सत्ता बदल गया…सरकार बदल गई…पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही नहीं बदली… सूरजपुर के दुरस्थ्य क्षेत्र बिहारपुर चादनी में स्वास्थ्य बेहाल… प्रसूता व जुड़वा बच्चों की हुई मौत… महतारी एक्सप्रेस की निकली हवा… सीएचसी स्वास्थ्य केन्द्र में एक भी MBBS डाक्टर नहीं है पदस्थ…

राजेश सोनी 

सूरजपुर-सूरजपुर के दुरस्थ्य क्षेत्र बिहारपुर चादनी में एक गर्भवती महिला की समुचित इलाज समय पर नहीं मिलने से दो नवजात सहित प्रसूता की मौत हो गई। महिला जिस गांव में रहती है वहां से दो किलोमीटर की दूरी पर उप स्वास्थ्य केन्द्र है लेकिन वह भी बंद पड़ा है। 

चांदनी बिहारपुर से 13 किलोमीटर दूर कोल्हुआ गांव निवासी सुनीता पाल 16 वर्ष को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने महतारी एक्सप्रेस के लिए देर रात फोन किया तो कुछ देर में एंबुलेंस पहुंचने की बात कही गई। परिजन एंबुलेंस का आधा घंटे तक इंतजार कर थक चुके थे तब जवाब मिला कि एंबुलेंस के दो चक्के पंचर हैं, एंबुलेंस नहीं आ सकती। इसके बाद महिला रातभर दर्द से कराहती रही। सुबह ऑटो से उसे 13 किमी दूर सीएचसी स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया। महिला ने वहां एक मृत बच्चे को जन्म दिया। हालत गंभीर होने पर सीएचसी स्वास्थ्य केन्द्र उसे रेफर किया गया, परिजनों ने निजी वाहन कर मध्यप्रदेश के बैढ़न ले जाया गया। जहाँ महिला ने एक और मृत बच्ची को जन्म दिया इसके उपरांत प्रसूता महिला की भी मौत हो गई। परिजन के अनुसार लापरवाही की हद ये है कि दो किमी दूर उप स्वास्थ्य केंद्र में भी कोई स्वास्थ्य कर्मचारी ना ही डॉक्टर मिले ।जिसके कारण उन्हें सुबह तक इंतजार करना पड़ा और प्रसूता व जुड़वा बच्चाें की मौत हो गई। 

तबीयत बिगड़ी तो  किया रेफर

महिला के परिजन सुबह ऑटो से सीएचसी बिहारपुर लेकर पहुंचे। यहां महिला ने एक मृत बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसकी हालत और खराब होने लगी तो स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे रेफर कर दिया। इस पर वे मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के बैढ़न स्थित सरकारी अस्पताल निजी वाहन से पहुंचे। यहां महिला ने एक मृत बच्ची काे जन्म दिया और कुछ देर में ही महिला की मौत हो गई। 

गांव से दो किमी दूर उप स्वास्थ्य केंद्र में लटका रहता है ताला

सीएमएचओ सूरजपुर डाॅ. आर एस सिंह ने बताया कि महुली स्वास्थ्य केन्द्र में दो कर्मचारी रहते हैं। एंबुलेंस नहीं मिलने पर अगर मरीज निजी वाहन से अस्पताल आते हैं तो उन्हें जीवनदीप से भुगतान कर दिया जाता है। अब सीएचसी से रिफर करने के दौरान वाहन की सुविधा उपलब्ध क्यों नहीं करवाई गई, इस संबंध में वहां के प्रभारी से जवाब मांगा जाएगा। 

चिकित्सा विभाग के एंबुलेंस वाहन हो गए हैं कंडम

संभाग के संजीवनी एंबुलेंस और महतारी एक्सप्रेस के अधिकतर वाहन कंडम हो चुके हैं। कई जगह एंबुलेंसों को धक्का देना पड़ रहा है। ऐसी ही स्थिति बिहारपुर के एंबुलेंस की भी थी। इसके कारण एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पा रहीं हैं और पीड़ितों की जान तक चली गई।

 

चांदनी बिहारपुर इलाके में दर्जनभर से अधिक ऐसे गांव हैं जहां पहुंचविहीन के कारण स्वास्थ सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। जिस नाबालिग मां की प्रसव पीड़ा से मौत हो गई उस गांव में दो साल पूर्व मलरिया का प्रकोप मिलने पर तीन माह तक जिले का स्वास्थ्य विभाग की शिविर लगी थी|बरहाल अब वहा की हालत सुधरने के बजाय और खराब होने को है। नाबालिग गर्भवती का पंजीयन कर टीका लगाकर स्वास्थ कार्यकर्ता, मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपना काम पूरा कर दिया,जबकि प्रसूता को संस्थागत प्रसव करना था| किसकी लापरवाही ने एक खुशहाल परिवार को दुःख आसुओ में भीगा |


नाबालिग उम्र में हो गया था सुनीता का विवाह 

प्रसव पीड़ा से जिस सुनीता पाल की माैत हुई है, उसकी शादी महज 14 साल की उम्र में हो गई थी। वह बलंगी की रहने वाली थी। बता दें कि इस क्षेत्र में जागरूकता के अभाव में हर साल कई बच्चों की शादी कम उम्र में करा दी जाती है।
सूरजपुर के दुरस्थ्य क्षेत्र बिहारपुर चादनी में दस दिनों में हो चुकी है 7 मौतें

ओड़गी विकासखंड में दुरस्थ्य क्षेत्र बिहारपुर चादनी में दस दिनों में सरस्वती साहू 45 वर्ष,राजलाल साहू 60 वर्ष,सूरदास पंडो 18 वर्ष,कमलावती 58 वर्ष सहित सुनीता के साथ दो जन्मजातो की हो चुकी है|

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की निकली हवा…..
लाखो करोडो रुपये विज्ञापन प्रचार प्रसार खर्च करने वाली सरकार की सूरजपुर जिले के दुरस्थ्य क्षेत्रो में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान सिर्फ कागजो मे ही संचालित है जबकियह की जमीनी हकीकत का नजारा और है बात करे मध्यप्रदेश की सीमा से लगे गांव की ना तो ग्रामीणो को समुचित स्वास्थ लाभ मिल पा रहा है ना ही गर्भवती माताओं बच्चों को पौष्टिक आहार|मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से किसी प्रकार का लाभ इस क्षेत्र में नहीं देखने को मिल रहा| गर्भवती माताओं बच्चों को पौष्टिक आहार तो दुर की बात है ज्यादातर बिहारपुर चादनी क्षेत्र मे एनीमिया, किशोरी बच्चों में खून की कमी,कुपोषण देखे जा रहे है।