चिकित्सक के अभाव में पेट में दर्द से पीड़ित मरीज ने तोड़ा दम

प्रवेश गोयल

सूरजपुर- जिले के ओड़गी विकासखण्ड मुख्यालय में 4 एमबीबीएस चिकित्सकों की पदस्थापना होने के बावजूद मुख्यालय में एक भी चिकित्सक नहीं रहते, दो आरएमए चिकित्सक के भरोसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को छोड़ दिया गया है, परिणाम स्वरूप सांवारावां से उपचार के लिए पहुंचे पेट दर्द से पीड़ित 60 वर्षीय ग्रामीण की उपचार के अभाव में मौत हो गई।
गौरतलब है कि ओड़गी विकासखण्ड मुख्यालय में चार एसबीबीएस चिकित्सक समेत आरएमए चिकित्सकों की भी नियुक्ति वहां की भौगोलिक विषमताओं और वनांचल क्षेत्रों को देखते हुए की गई, लेकिन मुख्यालय में निवास बनाकर न रहने से इतनी संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति का लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सोमवार को सांवारावां ग्राम निवासी मंगल साय आत्मज बुल्लूराम खैरवार 60 वर्ष अपने रिष्तेदार के यहां चपदा गया था, जहां उसके पेट में दर्द होने पर उसे ओड़गी चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया था, लेकिन यहां एक भी एमबीबीएस चिकित्सक नहीं मिले, आरएमए चिकित्सकों के द्वारा जब तक उपचार शुरू किया जाता तब तक मंगल साय की उपचार के अभाव में मौत हो गई।


खुद बीएमओ नहीं रहते मुख्यालय में
ओड़गी के जनपद सदस्य राजेष तिवारी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ बीएमओ डॉ प्रमोद राठौर एवं डॉ राकेष सिंह सूरजपुर जिला मुख्यालय में निवास बनाकर रहते है, जबकि डॉ मनीष मिश्रा लम्बे समय से अवकाष पर है और डॉ खान अपने गृहग्राम पटना से जाना आना करते है। इतने बड़े विकासखण्ड की जिम्मेदारी आरएमए चिकित्सक शांतनू कुषवाहा और मैरी ममता पर छोड़ दी गई है। गंभीर मरीजों के मामले में इनके द्वारा उपचार योग्य होने के बावजूद रेफर कर दिया जाता है।
मुख्यालय में रहना तय करे चिकित्सक
क्षेत्र के जनपद सदस्य राजेष तिवारी ने मंगल साय की उपचार के अभाव में मौत होने के बाद सीएमएचओ डॉ एसपी वैष्य से चर्चा की और वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए तहसील मुख्यालय में चिकित्सकों को आवास बनाकर रहना सुनिष्चित करने की मांग की है ताकि देर- सबेर कभी भी उपचार की आवष्यकता पड़ने पर चिकित्सक उपलब्ध रहें। उपचार के अभाव में और किसी मंगल साय की मौत न हो।