कैसे बचे मोटापा के दुष्प्रभाव से… जाने बचाव के उपाय…

डाॅ संध्या पाण्डेय बी.ए.एम.एस, एम.डी. पंचकर्म एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ

मोटापा व्यक्तिगत ही नही वरन् चिकित्सा जगत एवं सभ्य समाज के लिए एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है यह आजकल युवा पीढ़ी के साथ-साथ बच्चों में भी अपना प्रभाव दिखाने लगा है। मोटापा वह स्थिति है, जब अत्यधिक शारीरिक वसा शरीर पर इस सीमा तक एकत्रित हो जाती है। कि वो स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने लगती है। यह आयु संभावना को भी घटा सकता है। बी.एम.आई. (बाॅडीमाॅस इन्डैक्स) मानव शरीर का कुल भार ाह में एवं लंबाई में का अनुपात होता है। जब यदि से कम हो तो , यदि 18.5 एवं के मध्य हो तो सामान्य, ऋण एवं हो तो मोटापा के पूर्व की स्थिति एवं सेे ज्यादा अति स्थौल्य या मोटापा कहलाता है।

लक्षण:- खान पान मे असंयम एवं अनियमितता के कारण शरीर मे जब अनावश्यक रुप से अत्यधिक मात्रा में वसा जमा हो जाती है तब व्यक्ति मोटा हो जाता है वस्तुतः मोटापाा की शुरुआत पेट से होती है, उसके पश्चात कूल्हे, गर्दन, कपोल, बाॅहे, गर्दन, जघंा आदि में वसा की मोटी परत जमा हो जाती है तो मनुष्य को स्थुल एवं बेडाल बना देती है।
अंत प्रत्यंगो में वसा संचय के कारण उनकी वृद्धि समुचित रुप से नही होती है तथ कार्यक्षमता में कमी आ जाती है शरीर स्थूल एवं थुलथुल हो जाने सेे व्यक्ति आत्महीनता का शिकार बन जाते है उनके रक्त में या अच्छे कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम एवं या खराब कोलेस्ट्रोल की मात्रा बडी हुई होती है। यह बढ़ी हुई की मात्रा हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अठैक एवं बेन स्ट्रोक आदि का कारण बनती है। इसके अतिरिक्त इंसुलिन का स्त्राव कम होने से डायबीटीज का खतरा भी बना रहता है। प्रायः कब्ज की शिकायत गैस, पीठ का दर्द, खर्राटे, छोटी सांस का आना, श्वास, प्रस्वांस में रुकावट, लिवर एवं किड्नी रोगो की संभावना रहती है। जोड़ो का दर्द सायटिका, पक्षाघात, हार्निया, वेरीकोस वेन्स, पथरी, रक्त वाहिनीयों में रक्त संचरण में बाध, कैंसर, निद्रा रोग, डिप्रेशन, हार्मोनजन्य व्याधियां एवं विशेषकर स्त्रियों में गर्भाशय जन्य अनेक व्याधियों की संभावना बढ़ती जाती है।

मुख्यतः मोटापा के तीन कारण है।
(1) सहज या आनुवांशिक कारण-यह वह कारण है जो व्यक्ति विशेष के अनुसार अथवा आनुवांशिक गुणें के आधार पर पीढ़ी दर पीढ़ी पाया जाता है।
(2) आहार विहार जन्य कारण -इसका प्रमुख कारण आधुनिक आराम जीवन शैली का खान-पान एवं रहन सहन है। अधिक मात्रा में मक्खनन, मलाई दुग्ध, घी, पनीर, मिठाई मद्यपान, मासाहार, कोल्डींगस, जंकफूड, फास्टफूड, आईस्क्रीम, काफी, सैनवीच, बेकरीफुड, चाकलेट, व्यायाम या परिश्रम नही करना दिन में भोजन के पश्चात सोना आदि है।
(3) हाॅर्मोन अंसतुलन – जैसे थाॅयराईड ग्रंथी पिट्यूटरी गं्रथी, एड्रिनल ग्रंथी आदि से स्त्रावित होने वाले हार्मोन्स रसायन की किसी भी कारण से विकृति होने पर स्थौल्यताया मोटापा को जन्म देती है। इसके अतिरिक्त मानसिक एवं भावनात्मक कारण से भी हाॅर्मोन्स एवं मेटाबोलिक एक्टिविटी, डिप्रेशन, इमोश्बल, डिस्टर्बेन्स, तनाव आदि भी द्वारा मोटापा बढ़ाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से अहम भूमिका बड़ाते है इसके अतिरिक्त (स्टेराॅइडस) औषधि का सेवन भी या मोटापे की वृद्धि करता है।
उपचार…..
यह उचित एवं संतुलित खानपान, रहन-सहन की आदतों और शारीरिक श्रम, व्यायाम आदि का दैनिक जीवन में समावेश कर लिया जाए तो मोटापे से आसानी से बचा जा सकता है।वरिष्ठ, मीठे, चिकनाई युक्त, तले, भुने मसालेदार, पदार्थो का सेवन,जकंफूड फास्टफूड, बेकरी फूड, दुग्ध उत्पाद, मिठाई आदि के सेवन से परहेज करें। आहार में अधिक से अधिक हरे सब्जी-फलों का विशेषकर मौसमी फलों का भरपूर सेवन करें।
व्यायाम केवल शारिरीक ही नही अपितु मन को भी स्वस्थ्य रखता है अतः डीपब्रीथिग एक्सरसाइज, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार एवं कुछ आयुर्वेद मे अंकित आसनों का प्रतिदिन प्रयोग करें।
दिन के दौरान नही सोए...
आयुर्वेद में एनिमा निधि द्वारा वसा को कम करने के लिए औषधियों का कषाय इस तरह दिया जाता है कि बिना किसी साइड इफेक्ट प्रभावी ढंग से मोटापा से मुक्ति मिल सकती है।
ड्राई मसाज एवं आयुर्वेद में किया जाने वाला उद्र्ववन वजन घटाने के साथ ही त्वचा की टोनिंग को भी बढ़ाता है। उद्वर्तन द्वारा जो कि शरीर के सेल्युलाइटस को घटाता है, एवं डिटाॅक्स करता है। व्यक्ति की प्राकृति एवं शारीरिक संरचना के आधार पर आयुर्वेद में मोटापा घटाने के विशेष रुप से विभिन्न प्रक्रियाए है जिनका की दैनिक जीवन में खान पान, व्यायाम, योगासन मुद्रा, कुछ विशेष औषधियों के कषाय एवं मंत्रोच्चारण से लेकर हवन तक की सामग्रियों का विशेषतया है।
विशेष:- मोटापा घटाने एवं वजन कम करने के लिए प्रायः डायटिंग या उपवास का सहारा लिया जाता है, महिलाओं में यह प्रचलन विशेषतः मिलता है परंतु इससे लाभ कम, हानि ज्यादा है लंबे समय तक डायटिंग करते रहने से आॅस्टियोपोरोसिस एवं आवश्यक पोषक तत्वों की कमी से कई व्याधियाॅ हो जाती है।
मोटापा दूर करने के लिए लाईपोसक्शन नामक उपचार प्रक्रिया की जाती है इस विधि में डायथर्मी प्रक्रिया द्वारा विशेष से पेट के नीचे जमा हुई वसा की मोटी परत को सक्शन द्वारा हटाया जाता है। इसके अलावा सेलोथर्म उपचार, डीपहीत उपचार या स्टीम बाथ द्वारा मोटापा कम किया जाता है परंतु इनके इिवाइड प्रभाव ज्यादा होते है एवं फिर से मोटापा जा जाता है।बेरियाट्रिक सर्जरी अथवा गैस्ट्रीक व्यायाम द्वारा भी आजकल वजन क्रम एवं मोटापा घटाने की प्रचलन अत्यंत प्रचलित है परंतु इसके भी रिबाईड प्रभाव ज्यादा देखने को मिलते है। इसके अतिरिक्त मार्केट में हर्बल औषधियों के नाम पर बहुत से उत्पाद मोटापा घटाने के लिए मिलते है परंतु बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के इनका सेवन करना सुरक्षित नही है।

डाॅ संध्या पाण्डेय बी.ए.एम.एस, एम.डी. पंचकर्म एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ
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