बच्चो का कब्रगाह बना रुनियाडीह गांव………..सिलेवार पांच बच्चो की मौत पर ग्रामीण सकते में.

राजेश सोनी
सूरजपुर-जिला मुख्यालय के समीप रुनियाडीह में फिर से एक नवजात की रहस्यमयी मौत के बाद पूरा गांव सहम गया है लगातार बच्चो की मौत को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है साथ ही इस बात की चर्चा है कि जो टीकाकरण किया जा रहा है कुछ तो कमिया है जो जानलेवा साबित हो रहा है। गौरतलब है कि रुनियाडीह गांव में अब तक 5 बच्चो की मौते हो चुकी जिसको लेकर ग्रामीण हैरान परेशान तो है तो वही टीकाकरण अभियान की गुणवत्ता पर ग्रामीण संदेह जता रहे है। बीते दिनों टेकराम का 2 माह के पुत्र की मौत के बाद स्वास्थ विभाग के साथ जिला प्रशासन की टीम पहुचकर जांच पडताल किया गया और फिर से वही पुराना कारण बताया गया कि बच्चे की मौत श्वास नली में दुध चले जाने से हुई है। अब तक हुये पांच बच्चो की मौत होने से पुरे गांव में दहशत का माहौल है साथ ही ग्रामीण आरोप लगा रहे है तो वही स्वास्थ विभाग अपनी सफाई देने में लगा है। तो वही दुसरी ओर बच्चो की मौत की सुचना पूर्व जिला पंचायत सदस्य व सभापति पंकज तिवारी ने ग्रामीण जनों से मुलाकात कर परिजनों को सांत्वना दिया.. श्री तिवारी ने मृतक बच्चे के घर पहुंचे और प्रशासनिक अमले को भी इस दिशा में गम्भीरता से विचार किये जाने को कहा और अब तक जिले भर में जितने टीकाकरण किये गए है उन बच्चो और माँ को विशेष निगरानी में रखे जाने की भी बात कही है और कहा कि यदि इस तरीके की शिकायत आती है तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनके साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य पप्पू जायसवाल, जनपद सदस्य बाबूलाल राजवाड़े,सरपंच श्रवण कुमार,युवा नेता दीपक कर ,रिंकू सिंह राजपूत मौजूद थे।
स्वास्थ विभाग की सफाई…….
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ आरएस सिंह ने बताया हैं सभी बच्चो की मौत टीकाकरण के कुछ दिनो बाद हुआ है और अलग अलग कारण बताया गया है। लेकिन हकीकत यह है रुनियाडीह गांव में 5 बच्चो की मौत का कब्रगाह बना…कारण कई हो सकते है पर बच्चो की मौत रोकने पहल नही किया गया ना ही समय रहते किसी तरह की निगरानी टीकाकरण के बाद स्वास्थ विभाग ने की। बच्चो की मौत पर पालक क्यो और किस लिये झुठ बोलेगे…? क्या बच्चो की परवरिश करने में पालको ने चुक की है….? या फिर बच्चो को सभालने में किसी तरह की लापरवाही की है….? क्या बेटे की मौत पर दुःख नहीं…..? बहरहाल प्रभावित पालको अपने ननिहालो को बचाने के लिये कोई कमी ना करते हुये अपने बच्चो का बिलासपुर में उपचार करा रहे है।

टीकाकरण……
शिशुओ को जीवित रहने के लिये टीकाकरण जरुरी माना गया है और टीकाकरण नही होने से नवजात के जीवन पर कई जानलेवा प्रभाव पडता है साथ ही जीवन और भविष्य को सुरक्षित करने के लिये यह अहम माना जाता है…लेकिन इसके बेहतर परिणाम पाने के लिये सही आकलन,संसाधनो, कोल्ड चेन प्रबंधन जिसके कारण टीको का नष्ट होने का संभावना होता है उसमे सुधार करके बच्चो का जीवन बचाने की प्रत्येक की सहभागिता बेहद जरुरी है।