जांच के नाम से जलील करना है आम बात….क्योकि आला अफसर होते है खुश…जिले में आम आदमी का भगवान ही मालिक…..?

राजेश सोनी
सूरजपुर-गिड़गिड़ाता रहा स्वास्थ्य कर्मी लेकिन अफसरों का सरंक्षण या वर्दी की चर्बी के कारण कोई फर्क नही पड़ा,लिहाजा सड़क सुरक्षा के नाम पर जांच के दौरान एक स्वास्थ्य कर्मी से ऐसी बदतमीजी पर पुलिस उतारू रही कि जैसे कोई नामी गुण्डा आतंकवादी उनके हत्थे चढ़ गया हो। शनिवार को कोतवाली पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी, सुबह जांच के नाम पर खुली पुलिस की दुकानदारी में ऐसे लोग चपेट में आये जो दफ्तर आदि के लिए निकले थे। इस जांच में एक स्वास्थ्य कर्मी भी चपेट में आया जो अपनी बाइक से अस्पताल जा रहा था। यह सही है कि किसी स्वास्थ्य कर्मी या किसी और को यह छूट नही है कि वह बगैर हेलमेट या बिना दस्तावेज के सफर करे और उसकी जांच भी न हो लेकिन किसी कानून में पुलिस को यह भी हक नही है कि वह किसी आम इंसान को अमरत्व की दवा बनी हेलमेट के नाम पर जलील करती रहे। स्वास्थ्य कर्मी की माने तो उसके पास दस्तावेज नही थे हेलमेट भी नही लगाया था और पुलिस ने रोक लिया, उसने इमरजेंसी सेवा का हवाला देकर छोड़ने की गुजारिश की गलती के लिए माफी भी मांगी पर पुलिस उसे ऐसा जलील करती रही जैसे उसने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो,उसे 200 रुपए का फाइन भी काटा गया। फाइन को उसे कोई मलाल नही है पर पुलिस की हेकड़ी और जो जलालत झेलनी पड़ी इससे उसे बेहद पीड़ा हुई। इसकी लिखित शिकायत तो उसने नही की है पर अफसरों से इसकी मौखिक शिकायत कर अपनी पीड़ा और पुलिसकर्मी की हरकत से अवगत कराया है।स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि इस शिकायत के बाद उस जवान ने आज उससे खेद व्यक्त किया है। पर सवाल यह है कि इस तरह की घटना से आम आदमी रोज दो चार हो रहा है। पुलिस के अफसर रोज खबरों में सुर्खियां बनने के लिए बयान जारी करते है कि आम आदमी से शालीन व्यवहार करने की नसीहत देने की बात करते है पर पुलिस की वर्किंग में कोई सुधार होता नही है। शिकायत हो तो अफसर अपने मातहत के पक्ष में खड़े दिखाई पड़ते है। जिससे आम आदमी पुलिस को लेकर रोषित है।शनिवार को जांच के नाम पर जिस ढंग का पुलिस व्यवहार कर रही थी उससे आम लोगो मे खासा रोष है। पिडित ने पुलिस के नाम से इस कार्रवाई की जो विज्ञप्ति जारी की है उसमें ऐसा बताया गया है कि जांच के नाम पुलिस ने कल ऐसा कार्य किया है जो ऐतिहासिक है और इससे जिले अफसरों का नाम रोशन होने वाला है। नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि अफसरों के विश्वास हासिल करने के लिए पुलिस ऐसी जांच कर रही थी ,मतलब जिस जिले में आम लोगो को जलील करने से पुलिस के आला अफसर खुश होते है तो फिर उस जिले में आम आदमी का भगवान ही मालिक है।यहां पुलिस के भरोसे रहे तो फिर लटकले तो गइले बेटा…. जैसा होगा…?