नही थम रहा है वन्य जीवों का शिकार……..तीर से लगे नील गाय घायल अवस्था में मिली…..बिहारपुर वन परिक्षेत्र का मामला…..

राजेश सोनी

सूरजपुर-जिले के चांदनीक्षेत्र के कोल्हुआ के आश्रित ग्राम बोकराटोला के खेत में आज दोपहर घायल अवस्था में नीलगाय मिलने से एक बार फिर इलाके में वन्यजीव तस्करों के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है। बताया गया है कि उक्त नीलगाय को दो तीर लगे हुये थे।नीलगाय वहां से रोहीना पहाड पर चली गई। ग्रामीणो ने इसकी सुचना वन विभाग के बीट गार्ड को देने का प्रयास किया। लेकिन संम्पर्क नही हो पाया। इसी तरह बीते साल अप्रैल मे बिहारपुर चांदनी के क्षेत्र उमझर रोड के जंगल पर नीलगाय की तीर से लगे घायल अवस्था मे रोड के किनारे मिली थी,जिसकी मौत हो गई थी। इस क्षेत्र अवैध रुप से वन्य जीव सहित वन संम्पदा का कारोबार करने का तस्करो का पसंदीदा क्षेत्र बना हुआ है। जहा अवैध कारोबार व्यापारियों का बड़ा जाल बिछा हुआ है इनमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं,इस पर रोक लगा पाना विभाग को मुश्किल हो रहा है। एक बड़ी चुनौती खुली सीमाओं का होना भी है क्योंकि अकसर ये तस्कर उस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ पर सुरक्षा नाममात्र की होती है।
वन्य जीव और वनस्पति के प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है
गुरुघासीदास राष्टृीय उद्यान की सीमा कोरिया के सोनहत से सूरजपुर जिले मे फैला हुआ है । वन्यजीव बाघ, तेंदुआ कीे दहाड अक्सर सुनाई देती है वन्य जीवो के जानकार पप्पु जायसवाल ने बताया कि गुरुघासीदास राष्टृीय उद्यान मे लगभग 15 हजार वन्यजीव है ,जिसमे बाघो की संख्या 6 है साथ ही हाथी मृग भालु नीलगाय सहित अन्य जीव मौजुद है जो उद्यान मे विचरण करते हुये वन विभाग की जंगल मे आते जाते रहते है। दुरस्थ अंचल होने का फायदा तस्कर उठाते हुये बाघ और तेंदुए की खाल, उनकी हड्डि और शरीर के अंग, गैंडे के सींग, हाथी दांत, सांप, नेवले के बाल, सांप की खाल, कस्तूरी मृग की कस्तूरी, भालू की अंगो की तस्करी कर बडे महानगर मे अधिक कीमत पर बेचने का अवैध कारोबार अच्छा खासा फल-फुल रहा है।

गुरुघासीदास राष्टृीय उद्यान का कार्यालय है बेहाल…
कहने को तो बिहारपुर क्षेत्र के मोहली मे गुरुघासीदास राष्टृीय उद्यान का परिक्षेत्र कार्यालय के साथ आवास है जहा पर रेंजर,डिप्टी रेंजर,बीटगार्ड,चैकीदार सहित गस्ती के कर्मचारी कागजो मे कार्यरत है। गौरतलब है 2008 मे इस कार्यालय से लगे वनविभाग के डिप्टी रेंजर के साथ मारपीट की घटना कर सडक मे लगे बेरीयर को जला देने के बाद गुरुघासीदास की परिक्षेत्र कार्यालय सहित वन विभाग कार्यालय का संचालन ठप्प ही हो गया। कार्यालय व आवास मे कर्मचारी नही रहने पर कार्यालय सहित आवास खण्डर मे तब्दील हो रहे है. तो वही इसी वजह से जंगल मे वन्यजीव सहित वन संम्पदा का तस्करो का गढ बन गया है. दिन हो या रात ये तस्कर वन्य जीव सहित बहुमुल्य लकडियो की तस्करी कर गुप्त मार्ग से मध्यप्रदेश ले जाते है जहा उन्हे बडी कीमत मिलती है गुरुघासीदास उद्यान की सीमा से लगे गांव खोहिर,कोल्हुआ,रामगढ,उमझर,जुडवनिया है तो वही उद्यान के अंदर बसे गांव बैजनपाठ रसौकी मोहरसोप,छतरंग अन्य गांव मे तस्कारो की गहरी पैठ है। जहा पर ग्रामीणो को अधिक पैसे की लालच देकर वन्य जीव का शिकार कर तस्करो को देते है।
लेंगे जानकारी
घायल अवस्था में तीर लगे नीलगाय के मामले में बिहारपुर वन परिक्षेत्राधिकारी शैलेन्द्र अम्बष्ट ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। आपके माध्यम से जानकारी मिली है, तत्काल मौके पर भेज कर वस्तु स्थिति की जानकारी लेता हूं।