सरकारी योजना की आधी रकम रिश्वत में देनी पड़ रही है…. सचिव पर पूर्व में भी राशि गबन का है आरोप……

सूरजपुर-जिले में तमाम कानूनों और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के सरकारी दावों के बावजूद रिश्वतखोरी एक सामाजिक रिवाज बन चुकी है.कई ग्राम पंचायतों में खुले आम रिश्वत का लेन-देन अब एक अलिखित परंपरा बन गया है.जिले के ओड़गी ब्लॉक में सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगो को मिले न मिले पर योजनाओं को अमलीजामा पहनाने वाले कर्मचारियों को इसका लाभ जरूर मिल रहा है। ग्राम कोल्हुआ के ग्रामीणों ने आज कलेक्टर को एक दिए लिखित शिकायत में जो आरोप लगाया गया है उसको अगर सही माने तो सरकारी योजना की करीब आधी रकम रिश्वत में देनी पड़ रही है और आधे रकम में गुणवत्ता के साथ कार्य करने का दबाव है।ग्राम कोल्हुआ के बासपति सिंह,अशोक केवट व छोटन सिंह ने सोमवार को कलेक्टर को दिए एक लिखित शिकायत में कहा है कि मनरेगा के तहत उनके लिए कूप निर्माण को मंजूरी मिली थी।जिसकी खुदाई व बंधाई का कार्य हितग्राही ने स्वंय के खर्चे से कर लिया और जब राशि देने की बारी आई तो उसे 1लाख 52 हजार की जगह केवल 83 हजार 7 सौ रुपए दिया गया जबकि शेष 68 हजार का लिस्ट पकड़ा दिया गया जिसमें रिश्वत में खर्च होने की जानकारी दी गई है। ग्रामीणों के अनुसार 9 हजार उपयंत्री,6 हजार एसडीओ,सीईओ 4 हजार,पीओ व कार्यक्रम अधिकारी 2500 ..2500 सौ, बाबू ,आपरेटर 2 ..2 हजार, सरपंच सचिव 10, 10 हजार और चाय पानी का खर्चा 4 हजार की जानकारी दी गई।इसी तरह छोटन के मंजूर 1लाख 72 हजार में से 94 हजार 500 रुपए दिया गया। शेष का इसे भी उसी क्रम में खर्च का हिसाब पकड़ा दिया गया। उधर अशोक केवट को मात्र 40 हजार दिया गया है ।जबकि 4लाख 50 हजार की मंजूरी की जानकारी मिली है। ग्रामीणों ने पूछा है कि क्या यह सही है कि इतनी राशि बतौर रिश्वत लगती है और अगर सही है तो हितग्राही कैसे अपना काम वह भी गुणवत्ता के साथ करे..? ग्रामीणों का आरोप है कि जिस पंचायत सचिव ने यह काम कराया है उक्त पंचायत सचिव पर पूर्व में भी राशि गबन का आरोप है और सरपंच हवालात जा चुकी है। ग्रामीणों ने कहा है कि ऐसे में कैसे उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिल पायेगा। ग्रामीणों ने इसकी जांच करा कर सम्पूर्ण राशि दिलाने व कार्रवाई की मांग की है।