जिले में अवैध रेत का खेल बदस्तूर है जारी……कानून ताक में रखकर रेत का हो रहा है अवैध उत्खनन परिवहन…..

राजेश सोनी
सूरजपुर-जिले में अवैध रेत का परिवहन लगातार जारी होना अब आम बात हो चली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की जवाबदेही लिए खनिज विभाग पर लगातार सवाल उठते आ रहा है और इनकी जवाबदेही का ये आलम है कि जब विभाग को इस अवैध कारोबार की सूचना दी जाती है तो जिम्मेदार फोन उठाना भी लाजमी नही समझते। गौरतलब है कि लगातार जिला मुख्यालय से लगे क्षेत्र के श्मशान घाट, राजापुर ,कांतीपुर, सत्तीपारा, खडगवा कला, बंशीपुर, हर्राटिकरा, कदरंई, जयनगर, कसकेला, समौली, खोपा, रेवटी, नमनाकला, सलका,बकालो,कांतीपुर, सेमरा अन्य घाटो में रेत ठेकेदार के द्वारा नियमों को ताक में रखकर रेत का उत्खनन किया जा रहा है. सत्तीपारा में महान नदी में ठेकेदार ने बाकयदा नियम विरुद्ध 3 – 3 पोकलेन मशीन लगा रखा है जबकि खनिज विभाग के नियम अनुसार नदी में पोकलेन लगाना अवैध है ठेकेदारों की मनमानी यहीं नही रुकती नियम विरुद्ध रात भर रेत का अवैध परिवहन भी लगातार जारी है जबकि खनिज विभाग के गाईडलाइन के अनुसार रेत का परिवहन सुबह 6 से शाम 6 बजे तक ही निर्धारित है अब सवाल उठना लाजमी है कि नेशनल हाईवे से लगे इस रेत खदान और हाईवे के खनिज विभाग के नाके से शाम 6 बजे के बाद ये रेत से भरी गाड़ियां आखिर किसके शह पर पार हो रही सवाल ये भी उठता है कि आखिर खनिज विभाग इन पर कार्यवाही करने आखिर गुरेज क्यों खा रही है मिलीभगत है या नेताओं का खौफ पर हकीकत यही है कि इस अवैध कारोबार को रोकने खनिज विभाग के साथ साथ प्रशासन भी आजतक नाकामयाब ही साबित हो रहा है।
रेत खदानो की निविदा.
जिले मे 36 रेत खदानो की निविदा की गई है पर खनिज विभाग के द्वारा 9 रेत घाटो का पीट पास जारी किया है जबकि जिले के 36 घाटो से रेत का उत्खनन बदस्तूर जारी है प्रतापपुर ब्लाक के सेमरा,सत्तीपारा,बंशीपुर तो वही सूरजपुर ब्लाक के कोरेया,रुनियाडीह में पीट पास जारी किया गया है जबकि बाकी की रेत खदानों की पीट पास जारी नही किया गया जहा पर अवैध रुप से नदी से रेत का उत्खनन कर अवैध वसुली किया जा रहा है।
निर्वाचित जनप्रतिनिधि की संलिप्ता…
अवैध रेत के खेल में सत्ताधारी दल के नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक गंगा नहाने की तर्ज पर भिडे हुये है बताया जाता है कि जिले मेें सत्ताधारी दल के नेता जिसमें कुछ चुने हुये जनप्रतिनिधि भी है वे खुद सरकार को कंगाल कर पंद्रह साल के बनवास को दुर करने बहती गंगा में हाथ धो रहे है ऐसे में अधिकारी खुद को कार्यवाही के नाम पर असहाय महसूस करते है। एक नेता ने तो यह भी दावा था कि अधिकाारियो को पैसा देकर वे काम कर रहे है मै नही तो कोई ना कोई तो करता ही. ऐसे में जिले का भगवान ही मालिक है.बहरहाल रेत के खेल देखकर आम लोग हतप्रभ है।
तय मानक से ज्यादा का उत्खनन…..
नदी के घाटो से रेत निकालने के लिये एक निर्धारित रकबा तय की जाती है लेकिन रेत के ठेकेदारो के द्वारा तय मानक से ज्यादा रेत का उत्खनन किया जा रहा है तो वही बिना पीट पास के रेत से भरी वाहने दुसरे प्रदेश जा रहा है। संबंधित विभाग के अधिकारी आज तक रेत खदानो का मुह तक नही देखे ना ही इनको इतनी फ्रिक है नदी के रेत का किस प्रकार का दोहन किया जा रहा है।
क्या कहते है अधिकारी…..
जिले के खनिज अधिकारी संदीप नायक ने दबी जुबान से अवैध उत्खनन को स्वीकार तो किया पर उनका अपना तर्क यह था कि जिला भौगौलिक दृष्टृी से काफी फैला हुआ है और उनके पास स्टाफ तथा संसाधनो की कमी है बावजूद इसके वे इस पर नजर बनाये हुये है उनका दावा था कि जहा से अवैध उत्खनन की शिकायत मिल रही है वहा पर कार्यवाही की जा रही है।