धान के खेल में जिले में भारी गडगडी….फसल की पैदावार नही, बिक गया धान और हो गया भुगतान….गोलमाल पर गिरी गाज, तो वही गडबड करने वाले पर नही हुई कार्यवाही….

राजेश सोनी
सूरजपुर. जिले में धान खरीदी तो पूर्ण हो गई, परिवहन और कस्टम मिलिंग अभी भी जारी है धान खरीदी में जिले में भारी गडबडी के बाद कई प्रबंधक, खरीदी प्रभारी, कर्मचारियों पर गाज गिर गई है पर अभी भी बडी गडबडी करने वाले प्रबंधक व धान खरीदी प्रभारी किसकी शह पर अभी भी बचे हुये है. कस्टम मिलिंग नही करने वाले राईस मिलरो पर पूर्व कलेक्टर की जमीन नापने की कार्यवाही के साथ तोडफोड भी प्रदेश में चर्चित रही. उल्लेखनीय है कि जिले में कुल धान की खरीदी दो लाख दस हजार नौ सौ दस टन हुई थी जिसमें से समितियों से दो लाख पांच हजार टन का उठाव हो चुका है समितियों में अभी भी लगभग 6 हजार टन धान पडा हुआ है. कस्टम मिलिंग के लिये राईस मिलरों को एक लाख 23 हजार पांच सौ टन धान दिया गया है जिसमें से 67 हजार टन मिलिंग उपरांत चावल जमा हुआ है.
खुले में पडा भीग रहा है धान
प्रशासनिक सुत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 6 हजार टन धान अभी भी समितियों में पडा हुआ है जो खुले रुप से बारिश मंे भीग रहा है प्रशासन को उठाव के लिये चाहिये था कि जिन समितियों में धान रखने के लिये शेड था वहा के धान बाद में उठाये जाते और खुुले में पडे धान को बारिश से पूर्व उठाव करा लेना था. पर जिन समितियों में ज्यादा गडबडी थी वहा का धान पहले उठाकर वहा जीरो शार्टेज कर दिया गया. जीरो शार्टेज होने के उपरांत प्रबंधक व खरीदी प्रभारी शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भी हकदार हो जाते है. पहले भारी गडबडी करो और उसके बाद सरकार से ईनाम पाओ.
डीएमओ सहित प्रबंधक कर्मचारियों के विरुद्व हुई कार्यवाही
धान के खेल में भारी गोलमाल के बाद जिला प्रशासन ने जिला विपणन अधिकारी व उनके कार्यालय के 8 कर्मचारियों सहित जयनगर व शिवप्रसादनगर धान खरीदी प्रभारी एंव इस कार्य संलग्न अन्य कर्मचारियों सहित 9 लोगो को जिला प्रशासन द्वारा नोटिस जारी कर कार्यवाही की गई है.
लाखो का धान फर्जीरुप से बेचने वाले प्रबंधक के विरुद्व आज तक नही हुई कार्यवाही
धान के खेल में अजब गजब के कारनामें है इन समितियोें में जिस किसान ने कभी फसल ही नही पैदा की उसके नाम से भी लाखो का धान बेच दिया गया. बैक से पैसा भी आहरण हो गये. ऐसे कई किसान है जिन्होने ना तो पंजीयन कराया ना ही फसल की पैदावार की और इसका भरपुर लाभ धान खरीदी प्रभारी ने उठाया. आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सूरजपुर के प्रभारी प्रबंधक का कारनामा उजागर हुआ था जिसमंें उनके द्वारा कई किसानो का धान स्वंम समिति में बेच दिया और उनके नाम पैसे भी आहरण कर लिये. जिस मामले में काफी हो हल्ला मचने के बाद भी कोई कार्यवाही ना होने पर उच्चाधिकारियों की मिली भगत से इंकार नही किया जा सकता है सही मायने में धान खरीदी का पुरा लाभ किसानो को मिला है या नही इसकी जांच करा दे तो जिले के कई धान खरीदी के प्रभारियों की करतुत सामने आ जायेगी. यह बताना लाजिमी होगा कि प्रत्येक धान खरीदी केन्द्र के प्रभारियों को किसान उसका रकबा और उसकी वास्तविक पैदावार की जानकारी होती है और इसी का लाभ उठाकर वे किसानो के नाम से स्वंय धान बेचते है.
धन धान के खेल में बैक शामिल
धान के खेल मे जिला सहकारी बैक भी बराबर का भागीदार है धान खरीदी प्रभारी के द्वारा फर्जी किसानो के नाम से लाखो रुपये का धान बेचने के उपरांत उक्त रकम उनके जिला सहकारी बैक के खाते में आ जाती है और बडी रकम एक ही दिन में बगैर खातेदार किसान के भुगतान बैक प्रबंधन व खरीदी प्रभारी के आपस की साठगाठ से कर दिया जाता है जबकि वास्तविक किसान जिसने अपना धान अपने खाते में बेचा है वो रकम के लिये कई बार बैक के चक्कर पर चक्कर लगाने के बाद भी पुरा भुगतान नही मिल पाता है.
बगैर संचालक मण्डल के हुई धान की खरीदी
जिले की अधिकाश सहकारी समितियों में शासन के द्वारा पुर्नगठन योजना के तहत संचालक मंडल को भंग कर प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई थी जिसके वजह से धान खरीदी प्रभारियों पर किसी का अंकुश नही था वे अपने मनमर्जी से धान खरीदी बगैर किसी दबाव से मनमानी करते हुये बडी मात्रा में गडबडी की है.
खुले में नही है धान
जिला खाद्य अधिकारी विजय किरण ने बताया कि जिले में कही भी खुले में धान नही है उन्हे कैप कवर से ढक दिया गया है शेष बचे धान के उठाव के लिए डीओ कट रहा है. सूरजपुर समिति में क्या गड़बड़ी हुई है यह मेरे जानकारी में नही है जांच करा लेता हूं शिकायत सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी- विजय किरण, जिला खाद्य अधिकारी