रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार का गढ बना सूरजपुर….लोग हो रहे है परेशान….महिनो चक्कर लगवाते अधिकारी….

सुभाष गुप्ता
सूरजपुर. जिले में रिश्वत खोरी चरम पर है जिसको जिले के ही उच्चाधिकारी खुद बढावा दे रहे है जिससे रिश्वतखोरो की पुरी जमात जिले की नींव को खोखला करने में लगे है तो वही आम जनता का खुन निचोडने में लगे है. बिना पैसे दिये क्या मजाल की काम हो जाये अगर नही दिये तो कई महिनो तक चक्कर पर चक्कर लगवाते रहते है. जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण जिला मुख्यालय का एसडीएम कार्यालय है जहा पर जमीन का डायवर्सन कराने के एवज में रिश्वत मांगते लिपिक को एसीबी की टीम ने रंगे हाथ पकडा. नया जिला बनने के बाद यह जिला रिश्वतखोरी भ्रष्ट्राचार की भेट चढ गया है. कार्यालयो में बिना दिये कुछ काम नही होते. ना तो किसी काम का समय सीमा है और ना ही समय सीमा पर कार्य होते है निरंकुश प्रशासन चेहरा चमकाने में लगे रहते है तो वही नेता मंत्री धुतराष्ट्र की तरह है. कुल मिलाकर भ्रष्टाचार एक लाईलाज बीमारी हो गया है इसकी जड़े तेजी से फैलते हुये सवैधानिक संस्थाओ की जडो को खोखला कर रही है. जीवन का कोई भी क्षेत्र इसके प्रभाव से मुक्त नहीं है. ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जो कि भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं. आज हर तबका इस बीमारी से ग्रस्त है.
भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी की शिकायत
ऐसा नही है भ्रष्टाचार रिश्वतखारी गबन की शिकायत नही होती लेकिन शिकायत के बावजुद अधिकारी खुद इस बिमारी के दलदल में डुबे हुये है. गुण्डो की तरह की तरह पिडितो से वर्ताव करते है. बीते दिनो एक महिने तक तहसील का चक्कर लगा रहे पुलिस का जवान आखिरकार परेशान होकर आयोग के अध्यक्ष से शिकायत करता है कि किस तरह तहसील कार्यालय में किये जा रहे कार्य को अंजाम दिया जा रहा है कैसे किस तरह उसे तहसील के बाबु व अधिकारी घुमाते रहे. उसमें पुरे मामले की शिकायत करते हुये दोषी अधिकारी पर कार्यवाही करने की मांग की है

देवलोक की वाणी
एक पुलिस के जवान को चमकाना अधिकारी को भारी पड गया. जवान ने पसीने निकाल दिए…

बस ईमान बदल गया…
कोई अमीर हो गया उसके आने से..
कोई ग़रीब हो गया उसके जानें से…?