शिक्षा मंत्री के गृह जिले के छात्र-छात्राओ को नही मालुम प्रदेश के मुखिया का नाम…जिले कलेक्टर, न ही शिक्षा मंत्री का नाम…कई स्कुल 15 अगस्त,26 जनवरी को खुलते है झंडा फहराने…रहता है कलेक्टर का दौरा..

राजेश सोनी/पप्पू जायसवाल
सूरजपुर. बच्चों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में लगे हुए है. वहीं जिले के मुखिया डॉ गौरव कुमार सिह भी छात्र-छात्राओ के बीच पहुचकर छात्रो को अपने लक्ष्य की प्राप्ति कैसे करनी है, अपने भविष्य को कैसे संवारना है इस बात की जानकारी एक मोटिवेशनल कार्यक्रम भव्य दृष्टि युवा सृष्टि के माध्यम से चला रहे है. जिसकी शुरुआत उन्होंने 6 दिसंबर को नगर के महाविद्यालय से प्रारंभ किया है और छात्रों के बीच पहुंच सरल और सौम्य तरीके से संवाद कर जीवन मे सफलता के लिए उनका ज्ञानवर्धन कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे है. शिक्षा विभाग भी जिले में गुणवत्ता युक्त शिक्षा बच्चो को मिल रही है कहते हुए अपनी पीठ थपथपाते नहीं थकता है मगर जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था कुछ और ही बयां कर रही है. शिक्षा की स्थिति जिले में कैसी है इसका अंदाजा दुरस्थ क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को देखकर लगाया जा सकता है जो शिक्षा की गुणवत्ता को शर्मसार कर रही है. शिक्षा का यह कैसा स्तर है कि हाई स्कूल, हायर सेकण्डरी के छात्रों तक को प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व कलेक्टर तक का नाम नहीं मालूम यह स्थिति है 12 के छात्र-छात्राओ की. गुरुवार को सुबह कोल्हुआ के पास छात्र-छात्राओ को ठुसकर आटो आ रही थी, रुकवाने पर कई छात्राए रामगढ के थे उन्होने बताया कि गांव व आसपास में 11-12वीं की स्कुल नही है जिससे वे 20-25 किलोमीटर का बडे बडे गढडो से भरे सडक का सफर आटो कर स्कुल पहुचते है और शाम 6-7 बजे घर वापसी होता है. फुलकुवंर, रीना सहित कई छात्राओ से जिले के कलेक्टर का नाम पुछा तो नही बता पाये जबकि महिने में दो चार बार बिहारपुर क्षेत्र में काफिला के साथ दौरा करते है. प्रदेश के मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री सहित प्रधानमंत्री के बारे पुछा गया तो वह भी सही नही बता सके. अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह की शिक्षा व्यव्स्था का आलम है इस क्षेत्र में अगर बात करे पहाड पर बसे गांव की तो लुल्ह भुण्डा तेलाईपाठ में स्कुल भवन तक नही है कागजो में प्राथमिक शाला माध्यमिक शाला संचालित है जो सिर्फ 15 अगस्त, 26 जनवरी में सिर्फ झण्डा फहराने के लिये स्कुल खुलता है.
छात्राओ का हास्टल तक नही…होती है बहुत परेशानी…
बेटी पढाओ बेटी बचाओ सहित महिला सशक्तिकरण,हिम्मत और अनेक कार्यक्रम विभाग संचालित कर खुद की पीठ थपथा रही है लेकिन दुरस्थ क्षेत्र में छात्राओ की सुरक्षा को लेकर एक हास्टल तक नही उपलब्ध करा पा रही है जिससे वे अपना भविष्य गढ सके. दो बार स्वास्थ मंत्री टीएस सिहदेव भी आकर चले गये लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. कक्षा 11-12 वी के लिये छात्राये 25-30 किलोमीटर की सफर कर बिहारपुर हायर सेण्डरी स्कुल पहुचती है सडके इतने खतरनाक की सायकल चलाना तो दुर पैदल चलना मुश्किल होता है.ऐसे में कुछ छात्रायें बिहारपुर के पास किराये का मकान लेकर पढाई कर रहे तो वही गरीब लाचार अभिभावक के बच्चो को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पडता है. महुली के समाजिक कार्यकर्ता पप्पु जायसवाल ने बताया कि 17 सितबंर 2020 को पूर्व कलेक्टर को इस बावत अवगत कराया गया था तो उन्होने आश्वासन भी दिया था. उन्होने बताया कि दो दर्जन से अधिक गांव में विद्युत नही है सडके जर्जर होकर खतरनाक हो गया है ऐसे में छात्र छात्राये लालटेन की रौशनी में पढने को मजबुर है अगर उन्हे हास्टल की सुविधा मिल जाती तो यह बहुत अच्छा रहता है.

यही है स्कुल


जिले के कलेक्टर इन दिनों भव्य दृष्टि युवा सृष्टि का कार्यक्रम चलाकर छात्र-छात्राओ को तरह तरह के अनेकानेक ज्ञान देकर खुब वाहवाही बटोर सुर्खियों में छाये हुये है तो वही दुसरी ओर कई ऐसे गांव है जहा पर स्कुल भवन नही है कागजो में स्कुल संचालित होती है. छात्र-छात्राओं कई किलोमीटर जर्जर सडक का सफर कर पढने जाते है, लालटेन की रौशनी में पढ रहे है. छात्राओ के लिये बिहारपुर चांदनी क्षेत्र में एक अदद हास्टल तक की व्यव्स्था नही है. बहरहाल बिहारपुर चांदनी क्षेत्र के छात्र-छात्राओ के उपर प्रशासन की भव्य दृष्टि पडेगी की नही, युवा सृष्टि का ज्ञान मिलेगा या नही. फिलहाल क्षेत्र के ग्रामीण नेता, मंत्री, अधिकारियांे की कार्यशैली पर बेहद नाराजगी जाहिर की है.

माध्यमिक शाला