प्रेमनगर नगर पंचायत का चुनाव….मतदाताओ के ख़ामोशी के बीच फिलहाल कछुआ की गति में चल रहा प्रत्याशियों का सम्पर्क अभियान….

राजेश सोनी
सूरजपुर. कडकड़ाती ठण्ड के बावजुद जिले के नगर पंचायत प्रेमनगर मे होने वाले मतदान के लिए प्रमुख दल भाजपा व काग्रेस को पसीना बहाना पड़ेगा. 20 दिसंबर को होने वाले मतदान के लिए मतदाताओं की खामोशी यह बताने के लिए काफी है कि इस बार इस बार भी चुनौतियाँ कम नहीं है फिलहाल यहां की चुनावी फिजा में अभी कोई गर्माहट दिखाई नही पड़ रही है मगर जैसे जैसे मतदान के तारीख पास आते जाएगी वैसे वैसे कडाके की ठंड में चुनावी गर्मी का एहसास होगा. नगर पंचायत चुनाव मे भाजपा काग्रेस के बागी प्रत्याशियों ने दोनो की चिंता बढा दी है. नामांकन वापसी के बाद 15 वार्डो के लिये 39 प्रत्याशी मैदान में है. 20 दिसंबर को होने वाले मतदान मे स्थानीय मुददा जमकर हावी होगा. हालाकि वर्ष 2015 के चुनाव में प्रेमनगर ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाये जाने का मुददा था और स्थानीय स्तर पर धरना प्रदर्शन आंदोलन कर ग्रामीणों ने विरोध किया था. दोनो दलो के लिये मुसीबत बने बागियो ने भाजपा काग्रेस का समीकरण बिगाडने मे लगे हुये है. 2015 के चुनाव में कांग्रेस, भाजपा को तीसरे मोर्चा ने कडी टक्कर दी थी. इस बार तीसरा मोर्चा का काग्रेस में विलय होने से काग्रेस फायदे का अनुमान लगा रही है तो वही भाजपा फिर यहा पर पुरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में रहेगी.

गाडी में शराब 2015 की

आर्दश आचार संहिता और शराब का सहारा
वर्ष 2015 के चुनाव में जमकर आर्दश आचार सहिता की धज्जीया उडाई गई थी, स्थानिय महिलाओ ने भाजपा नेत्री को शराब बाटते हुये पकडकर तबीयत से धुनाई कर घर मे बंद कर गणमान्य जनो को सूचना देकर पुलिस को सौपा गया था. आज तक महिला नेता की स्कार्पियों पे्रमनगर थाने की शोभा बढा रही है. तो वही कुछ दिनों पूर्व सूरजपुर में आयोजित महिला कार्यसमिति बैठक में प्रदेश में शराब बंदी करने का प्रस्ताव पारित कर बड़े शान से शराब की बुराइयां बताये गए, लेकिन पिछले प्रेमनगर चुनाव में वे किस तरह गाडी में शराब भर कर बांट रही यह सभी ज्ञात है हालांकि पिछले चुनाव में शराब बाटने पर पार्टी ने उन्हें उपकृत कर सांसद की पद पर नवाजते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तक बना दिया.