कई जगहो पर ताले तो वही रसोइयों के हवाले सरकारी स्कूल….सहायक शिक्षक हड़ताल पर…बदहाल व्यवस्थाये….

राजेश सोनी
सूरजपुर. वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर सहायक शिक्षक 11 दिसंबर से हडताल पर है जिसका असर जिले में देखने को मिला. अधिकांश प्राथमिक स्कुलो में ताले लटके रहे, शालाओं में पढ़ाई ठप पड़ गई है कुछ जगहो पर स्कूल का ताला खोलने बंद करने का काम मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले रसोइयों संभाले हुये है. स्कूल के स्टाफ कक्ष वीरान हैं विद्यार्थी आ रहे हैं लेकिन स्कूल पूरी तरह से रसोइयों के हवाले हो चुके हैं. अपुष्ट जानकारी के अनुसार जिले में 13 सौ अधिक प्राथमिक शाला में 4 हजार से ज्यादा सहायक शिक्षक पदस्थ है जिसमें से सहायक शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले अधिकांश शिक्षक हडताल पर राजधानी पहुचे हुये है तो वही कई शिक्षक उनके समर्थन में है तो वही शिक्षको का अन्य संगठन उनके साथ जा रहे है सहायक शिक्षकों का आंदोलन का प्रभावी असर सोमवार से दिखाई देने लगा है. जिले की प्राथमिक शालाओं में सहायक शिक्षक ही प्रभारी हेड मास्टर हैं ऐसी स्थिति में आंदोलन का व्यापक असर पड़ा है शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र की प्राथमिक शालाओं में सहायक शिक्षकों के आंदोलन से अध्यापन की व्यवस्था ठप पड़ चुकी है और विद्यार्थी स्कूल केवल मध्यान्ह भोजन के लिए आ रहे हैं. कई जगहो के स्कुलो में ताले लगे रहे. सहायक शिक्षक आंदोलन में शामिल होने के कारण स्कूल नहीं आ रहे हैं. ओडगी ब्लाक के 220 प्राथमिक शाला में 434 सहायक शिक्षक पदस्थ है. 83 माध्यमिक शाला में 146 शिक्षक है जबकि अधिकांश स्कुलो में सहायक शिक्षक (एलबी) ही कार्यरत है व शाला का प्रभार उन्ही शिक्षको के पास है जारी आंदोलन से ब्लाक कि शिक्षा व्यव्स्था ध्वस्त हो गई है स्वीपर व रसोइयों के भरोसे स्कुल है कई जगहो पर इनकी पदस्थापना तक नही है ऐसे में अधिकांश स्कुलो में ताले लगे रहे. शिक्षकों की हड़ताल से विद्यार्थियों के साथ पालक भी चिंतित हैं. खोहिर,रामगढ,सपहा,रसौकी,खैरा,कछिया,जुडवनिया और दूरदराज के ग्रामीण स्कूलों में हालात बेहद खराब हैं अब ग्रामीण भी हालात को लेकर आक्रोशित नजर आने लगे हैं.
वेतन विसंगति को लेकर कोई सुनवाई नहीं
सहायक शिक्षकों का कहना है कि वे लोग वेतन विसंगति का शिकार हैं व्याख्याता और शिक्षक के वेतन में समानुपातिक अंतर है लेकिन सहायक शिक्षक और शिक्षक के वेतन के साथ ऐसा नहीं है सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति सरकार मान रही है पर इसे दूर करने केवल वादे किए जा रहे हैं. शिक्षक पंचायत संवर्ग से शिक्षक एलबी संवर्ग शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद भी क्रमोन्नाति नहीं मिल रही है इससे वेतन विसंगति की समस्या दिनोंदिन गहरा रही है.
बदहाल शिक्षा व्यवस्थाये
जिले के बदहाल शिक्षा व्यव्स्था का आलम ऐसा है कि जिले के कलेक्टर डा0 गौरव कुमार सिह इन दिनो स्कुल कालेज में जाकर छात्र-छात्राओ को बेहतर अध्ययन करने सहित उन्हे प्रोत्साहित कर भविष्य निर्माण करने को लेकर को कैसे करना है एक मोटिवेशनल कार्यक्रम के रूप में की है. स्कुल में शिक्षको की कमिया की जानकारी भी ज्ञात है तो वही दुसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी को शिक्षको की हडताल आदोलन से किसी प्रकार का कुछ लेना देना नही है आंदोलन में चले जाने से कैसी व्यव्स्था बनी है इसका जरा भी परवाह नही हालाकि उनसे जिले के सहायक शिक्षको के आदोंलन में जाने को लेकर पड रहे प्रभाव को लेकर संपर्क करने की कोशिश किया गया पर उनसे कुछ भी जानकारी नही मिल सका है.