जिले वासियों को राहत मिलेगी टोल टेक्स से

प्रवेश गोयल

सूरजपुर- सूरजपुर-बिश्रामपुर मुख्य मार्ग स्थित रेणनदी पर नया पुल बन जाने से 65 वर्ष से अधिक बूढ़े और जर्जर पुल से लोगां को मुक्ति तो मिल गई, लेकिन इस नये पुल पर शासन द्वारा पथकर का प्रावधान कर दिये जाने से इस मार्ग से आवागमन करने वाले लोगों की जेब पर इसका असर पड़ेगा।
गौरतलब है कि एनएच 43 राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत जीवनदायिनी कही जाने वाली रेणुका नदी पर 8 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण किया गया है। जिसका लोकार्पण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के द्वारा गत 20 मई को ग्राम उंचडीह में विकास यात्रा के दौरान किया गया। आजादी से पूर्व सन् 1933 में ब्रिटिश शासन द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित रेणनदी पर एकांकी पुल का निर्माण कराया गया था। 85 वर्ष की निर्बाध्य सेवा देने के बाद जर्जर हो चुके इस पूल में आए दिन दुर्घटनाओं व पूल के धराशायी होने की आशंका बनी रहती थी और लम्बे समय से नये पुल निर्माण की मांग की जा रही थी।

सड़क निर्माण का कार्य पूरा होते ही शुरू हो जायेगा टोल-गेट
राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों के अनुसार जून माह में एनएच 43 के तहत पार्वतीपुर से कमलपुर तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा और कार्य पूर्ण होते ही टोल-गेट चालू कर दिया जाएगा। टोल गेट पर 6 लाईन हांगी जिनमें से दो लाईन व्हीआईपी एवं ओव्हरलोड वाहनों के आवागमन के लिए होगी। वहीं चार लाईनों से पथकर जमा करने के उपरांत ही वाहनों का आवागमन होगा।

 

10 किमी दायरे को करमुक्त रखने की मांग
इस नए पूल पर शासन द्वारा टोल टैक्स का प्रावधान किये जाने के निर्णय से सूरजपुर व बिश्रामपुर वासियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नवनिर्मित पूल पर पथकर आरोपित करना ठीक है लेकिन इस पथकर से सूरजपुर व बिश्रामपुर समेत 10 किमी के दायरे में आले वाले ग्रामों को मुक्त रखा जाना चाहिए। सूरजपुर और बिश्रामपुर का विभिन्न क्षेत्रों में अटूट संबंध है, षिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, व्यवसाय और कालरी व रेल्वे के कर्मचारियों के साथ- साथ जिला प्रषासन के अधिकारियों व कर्मचारियों का आवागमन प्रतिदिन समय असमय होता रहता है। ऐसे में उन्हें पथकर के दायरे में लाना केवल नुकसान दायक ही नहीं अपितु उनके लिए परेषानी का भी कारण साबित होगा।

पूराने पुल को धरोहर के रूप में संजोने की मांग
आजादी से पूर्व सन् 1933 में ब्रिटिष शासनकाल में बने रेणनदी के पुराने पुल को धरोहर के रूप में संजोकर रखने की मांग स्थानीय जनप्रतिनिधियों व क्षेत्रवासियों के द्वारा की जा रही है। कालातित होने के बावजूद 85 वर्षों तक राष्ट्रीय राजमार्ग में व्यस्ततम आवागमन के दबाव के मध्य कायम रहने वाले बूढ़े व पुराने पुल का जीर्णोद्धार कर उसे धरोहर बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए रखने की आवष्यकता है।

टोल गेट शुरू होने की प्रक्रिया विभागीय दाव पेंच होने के कारण अभी और समय लग सकता है, टोल गेट में वसूली कर्ता एजेंसी व पथकर की दर का निर्धारण नहीं हो पाया है, मंत्रालय स्तर पर निर्धारण किया जायेगा। पथकर की वसूली में छूट के प्रावधानों का मापदण्ड अभी तय नहीं हुआ है।
व्हीके पटोरिया, कार्यपालन अभियंता एनएच