नक्सलियों से मुक्त करने बने इस जिले के अंदरूनी इलाके में सरकार की नही है पहुच..? आश्रम को हाँ सरकार को ना क्यो..?

राजेश सोनी

छत्तीसगढ का जिला नारायणपुर जहा के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओ से वंचित है. ग्रामीण दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे है. युनिसेफ के तत्वाधान में एमसीसीआर के 5 सदस्यी टीम का अध्ययन दौरा हुआ जिसमें सरगुजा और नारायणपुर की आर्थिक, भौतिक भौगोलिक स्थिति में काफी अंतर दिखा. यहा सुरक्षित होकर जीना बहुत मुश्किल है.

 एक ओर नक्सलवाद तो दुसरी ओर पुलिस… 

 11 मई 2007 को जिले के रुप में नारायणपुर अस्तितव में आया, जिस उददेश्य से जिला बनाया गया है वह धरातल में नही दिख रहा. जिले के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की कोई पहुच नही, ये कहा जाये शिक्षा स्वास्थ बिजली पेयजल सडक जैसी आवश्यक सुविधाओ से ग्रामीण कोसो दुर है. यहा के ग्रामीणों को भिन्न भिन्न चुनौतियों का सामना करना होता है एक ओर नक्सलवादी है तो दुसरी ओर पुलिस. ऐसे में कब किसके शिकार हो जाये कुछ भी निश्चित नही. अंदर और बाहर के लोगो में इंसानियत नही है एक दुसरे का मुखबीर बता कर मौत की नीद देने में लगे है.

 मुख्यधारा से दुर.. 

नारायणपुर के विपरित सूरजपुर जिले की स्थापना जनवरी 2012 को हुई थी यहा ओडगी ब्लाक के बिहारपुर क्षेत्र के आधा दर्जन गांव पहुच विहिन है सरकार के विकास यहा तक पहुच नही सकी वजह जंगल पहाड दुगर्म स्थल है. नारायणपुर की बात करे तो यह जिला सूरजपुर से कई साल पहले बना है यहा के अधिकांश क्षेत्र में खुद सरकार पहुच नही पाई वजह नक्सलवाद है विकास के लिये सबसे बडी बाधक बने नक्सलियों को सरकार पर विश्वास भरोसा नही है. ऐसा नही की जिला प्रशासन इसके लिये प्रयास नही किया. यहा पर के अंदरुनी इलाको के ग्रामीण शिक्षा स्वास्थ सहित आवश्यक मुलभूत सुविधाओ से महरुम है.

 सरकार को ना आश्रम को हा… 

अंदरुनी क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणो तक सरकार नही पहुच सकी है सरकार का कोई तंत्र नही पहुचा ऐसे में रामकृष्ण मिशन 35-40 सालो से हजारों बच्चों को शिक्षा स्वास्थ देकर भविष्य सवार रहा है. अबुझमाड का क्षेत्र आज भी सरकार के अबुझ ही रह गया. इस क्षेत्र में आश्रम ने अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुये इस क्षेत्र के ग्रामीणों का शिक्षा स्वास्थ सेवा उचित मुल्य की दुकान का संचालित कर लोगो को प्रदान कर रही. गर्भवती महिला समुचित उपचार सहित टीकाकरण जैसे अन्य पुनित कार्य कर मावन सेवा में लगी हुई है.

एमसीसीआर की टीम ने प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र छोटे डोंगर और वहा की लाइफ लाईन कहे जाने वाली हाट बाजार का भ्रमण कर ग्रामीणों से बात कर कुशलक्षेम जानी. तो वही अतिसंवेदन क्षेत्र आकाबेटी हेल्थ एंव वेलनेस सेंटर की व्यस्था का हाल जाना यहा पर आश्रम में पहुचकर शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओ से बात की और स्थिति को समझने की कोशिश की. सरकार को ना और ट्रष्ट को हा की नीति से और भी सामाजिक संस्थाओ को सामने आ कर ग्रामीणों की मुलभुत आवश्यक पहुचाने की प्रयत्न होनी चाहिए जिससे ग्रामीण जनों को कुछ राहत मिला सके फ़िलहाल विषम परिस्थितियों के शिक्षा की ज्योति फ़ैलाने की कोशिशे बरकरार है. सरकार की नीति और नक्सलवाद की विचारधारा के बीच ग्रामीण कब तक निशाना बनते रहेगे..?