कैदी जेल में आबाद, खाकी जाम में बर्बाद : बस स्टैंड पर 'इंसास' लावारिस, सो गए दुर्ग के जांबाज!"
Subhas Gupta
Mon, Oct 19, 2026
“कैदी को ठिकाने लगाकर, खुद ठिकाना भूल गए,
जाम ऐसा छलका कि सरकारी पैमाना भूल गए!
हाथ में होनी थी 'इंसास', सड़क पे लावारिस छोड़ दी,
अंबिकापुर में खाकी वाले फर्ज निभाना भूल गए!”
अंबिकापुर। लीजिए हुजूर, अंबिकापुर के प्रतीक्षा बस स्टैंड से 'खाकी के सुरूर' का जो वीडियो वायरल हुआ था, उसकी पूरी पटकथा अब खुलकर सामने आ गई है! कहानी में ट्विस्ट ऐसा है कि कानून की किताब भी अपना सिर पीट ले। जो दो सूरमा सड़क किनारे 'योग-निद्रा' में लीन थे, वो कोई ऐरे-गैरे नहीं, बल्कि दुर्ग जिले से पधारे एक ASI (सहायक उप-निरीक्षक) साहब और उनके हमराह आरक्षक थे।
माजरा यह था कि ये दोनों दुर्ग से एक कैदी को सुरक्षित अंबिकापुर जेल दाखिल कराने आए थे। कैदी तो सलाखों के पीछे सुरक्षित पहुंच गया, लेकिन उसके बाद इन दोनों जांबाजों ने शायद सोचा—"फर्ज पूरा हुआ, अब थोड़ी मदिरा-सेवा हो जाए!" बस फिर क्या था, जाम छलके और होश ऐसे उड़े कि प्रतीक्षा बस स्टैंड ही इनका 'राजमहल' बन गया।
हद तो तब हो गई जब देश की हिफाजत करने वाली अत्याधुनिक INSAS (इंसास) राइफल सड़क पर यूं लावारिस पड़ी मिली, जैसे किसी की पुरानी छाता छूट गई हो! राइफल भी शायद मन ही मन गुनगुना रही होगी—"मुझको भी कोई संभालो, मैं लावारिस हो गई!"
गनीमत रही कि राहगीरों की नजर इस 'अनोखी सुरक्षा व्यवस्था' पर पड़ गई। लोगों ने तुरंत बस स्टैंड चौकी पुलिस को फोन घुमाया। स्थानीय पुलिस मौके पर दौड़ी-दौड़ी पहुंची और सबसे पहले उस अनाथ पड़ी सरकारी इंसास राइफल को अपने कब्जे में लिया, वरना कोई उचक्का ले उड़ता तो खाकी की बची-खुची साख भी धुआं हो जाती।
सवालों के कटघरे में 'दुर्ग के मतवाले':
कैदी तो जेल में बंद हो गया, लेकिन बाहर घूम रहे इन 'बेकाबू पहरेदारों' की जवाबदेही कौन लेगा?
घातक इंसास राइफल अगर किसी गलत हाथ में चली जाती, तो क्या महकमा सिर्फ 'जांच कमेटी' बनाकर पल्ला झाड़ लेता?
और सबसे बड़ा फलसफा—वर्दी का खौफ जनता के लिए है या फिर शराब की बोतल के आगे यह भी बेबस है?
फिलहाल, इस 'हाई-वोल्टेज ड्रामे' का संज्ञान आला अफसरों ने ले लिया है और विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जांच की फाइलें दौड़ेंगी, मुलाहिजा होगा और रिपोर्ट बनेगी। मगर तब तक चौक-चौराहों पर जनता बस यही चटखारे ले रही है—
“मुजरिम सलाखों में बंद होकर हंस रहा होगा,
कि अच्छा हुआ मैं अंदर हूं, बाहर तो पहरेदार ही बहक रहा होगा!”
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