: कांवरियों की टोली रविवार शाम को शंकर घाट के लिए होगी रवाना मंगलवार तेरस को शिवपुर में करेगे जलाभिषेक
Fri, Jul 26, 2019
प्रतापपुर
कांवरियों का जत्था रविवार को शाम को रवाना होगा शंकर घाट प्रतापपुर खड़गवां धर्मपुर कल्याणपुर केरता जगरनाथपुर रघुनाथपुर खजरी अमनदोन खोरमा के कांवरियों की टोली शिवपुर प्रतापपुर में जल चढ़ाने के लिए रविवार को अम्बिकापुर शंकर घाट के लिए रवाना होगी कांवरियों की सुबह जल उठाकर दिन भर चलकर रात्रि विश्राम अग्रसेन भवन में कर मंगलवार तेरस को सुबह करेगे जलाभिषेक कांवरियों की जलपान एवम खाने की व्यवस्था हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर के प्रतिष्ठित व्यवसाई एवम
तायल ऑटो मोबाइल्स
के संचालक
श्री अजित बहादुर तायल
के द्वारा की गई है सावन पर्व को देखते हुए शिवपुर मंदिर को विशेष साज सज्जा से सजाया गया है हर वर्ष कांवरियों की सेवा में तत्पर रहने वाले श्री अजित बहादुर तायल ने बताया कि रात्रि में चलने वाले कांवरियों के लिए विशेष व्यवस्था पूरे रास्ते भर की गई है कावरिया संघ के लोगो ने अधिक से अधिक लोगो की जुटने की अपील की है शिवपुर में हर वर्ष सावन में हजारों की संख्या में कावरिया शंकर घाट साराशोर बिल द्वार से जल लेकर शिवपुर में जलाभिषेक करते है यहां पे बहोत ही प्राचीन मंदिर है
: धूमधाम से मनी हनुमान जयंती,निकाली गई शोभायात्रा
Fri, Apr 19, 2019
सचिन तायल
प्रतापपुर
में हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई गई,आकर्षक झांकी व जय श्री राम के नारे के साथ शोभायात्रा निकाली गई।हनुमान जयंती पर कार्यक्रम की शुरुआत प्राचीन हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना के साथ हुई,आरती और प्रसाद वितरण किया गया जिसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया राम लक्षण हनुमान की झांकी के साथ शोभायात्रा निकाली गई जो हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरी।शोभायात्रा के दौरान जलपान की व्यवस्था
तायल ऑटो मोबाइल्स के संचालक अजित बहादुर तायल
, एवम प्रेमपाल अग्रवाल,आकाश मित्तल, रवि वर्मा ने अपनी दुकानों के सामने की थी।आयोजन के दौरान मंदिर समिति अध्यक्ष सतीश चौबे,अक्षय तिवारी,नवीन जायसवाल, लाल संतोष सिंह,देवानंद पांडेय हिन्दू एकता मंच के, सचिन तायल ,आनंद शुक्ला, विक्रम नामदेव,संदीप रजक, संजय प्रधान अंकित जायसवाल,अनमोल शर्मा, सोनू सर्मा अंकित राहुल अमन संस्कार गर्ग,नवीन नाविक,अभिषेक यादव,राहुल तिवारी,अर्जुन जायसवाल,अंकुश गुप्ता मनोज,विजय,सतिश,बसंत,देवरुप, प्रेम, अर्जुन, पुरषोत्तम,सावन बादल नायकउपेन्द्र कुमार विवेक कुमार बसंत सूर्या अंकित कुमार दीपक नेताम संजय मनोज माया राम अभिषेक
प्रतीक सोन्हा केसव प्रधान राजेश संजित पिनटू किसना धनिलाल
मनोज,विजय,सतिश,बसंत,देवरुप, प्रेम, अर्जुन, पुरषोत्तम,सावन सुमित्रा शिवचरण नापित विक्की नापित प्रभात दसरत महादेव मुकेश व अन्य लोग उपस्थित थे
: सच्ची कहानी बाबाधाम कोसमनारा की
Thu, May 31, 2018
सच्ची कहानी बाबाधाम कोसमनारा की
राजेश सोनी
रायगढ़-हिन्दू शास्त्रों में ऋषि मुनियों की 15-20 साल जंगलो,पहाड़ों और कंदराओं में कठोर तपस्या का वर्णन मिलता है। साधारण तौर पर इसे लोग इसे काल्पनिक कथा कहानियां ही समझते है पर छतीसगढ़ के लोग नही। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय में 16 फरवरी 1998 से तपस्या में लीन बाबा सत्यनारायण को यह हठ योग करते 19 वर्ष बीत गए। रायगढ़ में गर्मी के मौषम में तापमान 49 डिग्री तक पहुँचता है। ऐसे गर्म मौषम सहित भीषण ठंड और भरी बरसात में बिना छत के हठ योग में विराजे बाबाजी का दर्शन कर लेना ही अपने आप मे सम्पूर्ण तीर्थ है। बाबा कब क्या खाते हैं कब समाधि से उठते हैं किसी को पता नहीं। भोजन करते किसी ने नहीं देखा। जीवन किसी काल्पनिक कथा सा लगता है। कोसमनारा से 19 किलोमीटर दूर देवरी, डूमरपाली में एक साधारण किसान दयानिधि साहू एवं हँसमती साहू के परिवार में 12 जुलाई 1984 को अवतरित हुए बाबाजी बचपन से ही आध्यात्मिक बालक थे। एक बार गांव के ही तालाब के बगल में स्थित शिव मंदिर में वो लगातार 7 दिनों तक तपस्या करते रहे। मॉ बाप और गांव वालों की समझाइश पर वो घर लौटे तो जरूर मगर एक तरह से स्वयम शिव उनके भीतर विराज चुके थे।
14 साल की उम्र में एक दिन वे स्कूल के लिए बस्ता ले कर निकले मगर स्कूल नही गए। बाबाजी सफेद शर्ट और खाकी हाफ पैंट के स्कूल ड्रेस में ही रायगढ़ की ओर रवाना हो गए। अपने गांव से 19 किलोमीटर दूर और रायगढ़ से सट कर स्थित कोसमनारा वो पैदल ही पहुचे। कोसमनारा गांव से कुछ दूर पर एक बंजर जमीन में उन्होंने कुछ पत्थरो को इकट्ठा कर शिवलिंग का रूप दिया और अपनी जीभ काट कर समर्पित कर दी। कुछ दिन तक तो किसी को पता नही चला मगर फिर जंगल मे आग की तरह खबर फैलती चली गई और लोगो का हुजूम वहां पहुचने लगा। कुछ लोगो ने बालक बाबा की निगरानी भी की मगर बाबा जी तपस्या में जो लीन हुए तो आज तक उसी जगह पर हठ योग में लीन है। मां बाप ने बचपन मे नाम दिया था हलधर... पिता प्यार से सत्यम कह कर बुलाते थे। उनके हठयोग को देख लोगो ने नाम दिया बाबा सत्य नारायण..।बाबा बात नही करते .. मगर जब ध्यान तोड़ते हैं तो भक्तों से इशारे में ही संवाद कर लेते है। रायगढ़ की धरा को तीर्थ स्थल बनाने वाले बाबा सत्यनारायण के दर्शन करने वाले भक्तों के लिए अब कोसमनारा में लगभग हर व्यवस्था है किंतु बाबा ने खुद के सर पर छांव करने से भी मना किया हुआ है। आज भी बाबा जी का कठोर तप जारी है!.