: देवलोक की वाणी….मेहनत करे हम और मलाई खाये भाजपाई…..
Thu, Jul 1, 2021
उपेन्द्र दुबे, वरिष्ठ पत्रकार
सूरजपुर. वाह साहब…. वाह…! जी तोड़ मेहनत कर कुर्सी में बैठाए हम और मलाई खाये भाजपाई,मेहनतकश कांग्रेस कार्यकर्ताओं को छांछ भी नसीब नही ………..! यह बात कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं के है जो अपने आला नेताओ से भारी खफा है. खफा होने की वजह खुद की उपेक्षा और किसी फोरम में कोई सुनवाई न होने को लेकर है. ऐसे खफा कार्यकर्ताओ का गुस्सा मंगलवार को उस समय फुट पड़ा जब मौका पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मोहन मरकाम के दो वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने पर नेताओ के सम्मान समारोह का था. बताया जाता है कि सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर कांग्रेस के एक पदाधिकारी समेत मौजूद कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के नेताओ को खूब खरी खोटी सुनाई. यूं तो कांग्रेस जबसे सरकार में है तभी से आपसी खींचतान जबरदस्त चल रही है. यहां तक कि जिले को नेतृत्व विहीन मान कर नाराजगी सामने आती रही है. कार्यकर्ताओं का मानना है कि कोई ऐसा नही है जिससे वे अपना दर्द साझा कर सके.अधिकारियों पर भी मनमानी का आरोप लगाते रहे है. इन सब के बीच मंगलवार का जो मामला सामने आया उसमे बताया जा रहा है कि राशन दुकान व रेडी टू इट का मामला प्रमुख था.कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप था कि कांग्रेस के कुछ जिम्मेदार लोग अपनो की उपेक्षा कर चरण चुंबन करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को रेडी टू इट व राशन दुकान का संचालन दिला कर उपकृत कर रहे है.जबकि वही भाजपाई रेडी टू इट वितरण में गड़बड़ी कर सरकार की छवि धूमिल कर रहे है.इसे लेकर कार्यकर्ता इतने नाराज थे कि जिम्मेदारों को जबाव देते नही बन रहा था.बात अम्बिकापुर के बड़े नेताओं तक भी पहुँची तो वे हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया और यह भरोसा भी दिया कि भाजपा कार्यकर्ताओं को उपकृत करने के मामले की जांच होगी ,यह बात भी सामने आई कि पिछले दिनों रामानुजनगर क्षेत्र से भी ऐसी शिकायतें स्वास्थ्य मंत्री से तक की गई थी। इस दौरान इससे जुड़े एक अधिकारी की भी फोन पर खिंचाई करते हुए उनकी शिकायत रायपुर तक की गई और कार्रवाई की मांग कर डाली।बात यही नही रुकी शहर अध्यक्ष तो कार्यकर्ताओं के पक्ष में खड़े होते हुए इस्तीफे की बात करने लगे। हालांकि जैसे तैसे मामला शांत कराया गया। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष भगवती राजवाडे, विधायक पारस नाथ राजवाडे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष नरेश राजवाडे सहित तमाम वरिष्ठजन मौजूद थे और वे इस कदर कार्यकर्ताओ को गुस्से में देख हक्का बक्का थे.
सब ठीक हो जाएगा
जिला कांग्रेस अध्यक्ष भगवती राजवाडे ने कहा कि रेडी टू इट का मामला सामने आया था जिसे लेकर कार्यकर्ताओ की कुछ नाराजगी थी,पर ऐसा कुछ नही हुआ जो बहुत गम्भीर मामला जैसा है। यह आपस का मामला है सब बैठ कर ठीक कर लेंगे।
: विशेष टिप्पणी...सन्दर्भ......आतंक का पर्याय बना युवक और पुलिस की भूमिका....
Thu, Mar 4, 2021
पैसा खुदा तो नही पर ख़ुदा से कम भी नही यह है पुलिस का मूलमंत्र…तो कैसे रहे आम जनता सुरक्षित….? सत्ताधारी कांग्रेस पर भी सवाल और आक्रोश
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राजेश सोनी द्वारा प्रस्तुत आलेख
आतंक के पर्याय बने युवक को आखिरकार पुलिस ने बुधवार को देशी कट्टे के साथ पकड़ कर जेल भेज दिया है. बस स्टैंड का रहने वाला यह युवक शहर के लिए लगभग नासूर बन गया है लेकिन नासूर बनाने में समाज के साथ साथ वह पुलिस जिम्मेदार है जिसके कंधे पर सूरजपुर शहर में शांति व्यवस्था बहाल रखने की जवाबदारी है. लेकिन यह कहने में कोई गुरेज नही है कि आज जिले में जितनी खत्म ओर नकारा पुलिस है उससे खत्म और नकारा पुलिस कभी रही नही है. इसकी बानगी आप ऐसे समझ सकते है कि यह वही युवक है जिसने आज से करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उस टीआई को थाने में जो आज प्रतापपुर में मुस्तकबिल है घुस कर न केवल जुतियाया था बल्कि बुरी तरह वर्दी आदि भी फाड़ दी थी. हथियारों से लैस थाने पुलिस तब मूकदर्शक बनी हुई थी. किसी की हिम्मत न तो रोकने की हुई और न मुक्कमल कार्रवाई की हुई. तो जाहिर है हौसला बढ़ना ही है. कप्तान की देखिए कि इस शर्मशार घटना में कोई ठोस कार्रवाई करने की बजाए बेचारे पीटे गए टीआई को यहां से हटाकर अपनी इज्जत बचाई.शहर के लोग तो इस युवक और उसके परिवार की हद जानते है पर जहाँ तक सवाल पुलिस का है तो जब पुलिस का मूल मंत्र यह हो कि
पैसा खुदा तो नही पर खुदा से कम भी नही है
, की रिश्वतखोरी में कोई सीमा न रखे तो यह हश्र होना ही है. बताते है कि युवक के परिवार का कारोबार कुछ ऐसा है कि पुलिस का न केवल सरंक्षण जरूरी है बल्कि उसके एवज में पुलिस प्रतिमाह ओर गाहे बगाहे उसके सामने याचक की मुद्रा में खड़ी रहती है तो भला कैसे कार्यवाही करें…..? आतंक का आलम देखिये की टाकीज में घुस कर मारपीट,नवापारा में मारपीट, पत्रकारों के साथ एक नही दो दो बार सुपारी लेकर मारपीट.गोंडवाना के जिला सुप्रीमो से मारपीट और पुराने बस स्टैंड में तो आम आदमी का आना जाना मुश्किल है कब किस पर पिल पड़े और कब किसकी इज्जत उतार दे कोई भरोसा नही. कई बार ऐसे इज्जतदारो की इज्जत उतार चुका है जो अपनी इज्जत के खातिर खामोश रहने में ही भलाई समझ कर किनारा कर लिए है.बस स्टैंड थाने के चंद कदम दूरी पर है पर क्या मजाल है कि पुलिस का कोई खोफ हो..! अभी हाल में स्टेडियम में खेल के दौरान महगवां के खिलाड़ियों को चाकू से हमला कर आहत कर दिया था रिपोट हुई पुलिस मामूली धारा लगा कर उस कर्तव्य को पूरा की जिस टुकड़े पर याचक बनी रहती है इसी के परिणाम स्वरूप युवक दूसरे दिन उन युवको की तलाश में कट्टा लेकर घूमता रहा जिनसे उसका विवाद हुआ था.बुधवार को पुलिस की कुछ जमीर जगी है जब उसे आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है पर सवाल यह है कि क्या वह इतना भारी हो गया है कि पुलिस उस पर अपना दबाव नही बना पा रही है या उसमे पुलिस का खौफ पैदा हो …? अदालत से तत्काल छूट जाना भी कही न कही पुलिस की कमजोरी है कि वह केस को अदालत में इतना कमजोर करके ले जाती है कि वहाँ उसे राहत मिल जाती है. अगर यही हाल रहा पुलिस तमाम मामलों में अपनी जमीर बेचे कोई शिकायत नही है लेकिन ऐसे गुंडागर्दी के मामले में जमीर बेचती रही तो जब शहर के लोगो का गुस्सा फटेगा तो मुश्किल होगी. इस बात का ख्याल पुलिस के साथ साथ कांग्रेस के उन शरमाएदारो को भी रखना होगा जिनके हाथ मे शहर की बागडोर जनता ने सौपी है. जनता ने शहर की बागडोर केवल लकदक के लिए नही बल्कि मुक्कमल व्यवस्था के लिए सौपी है|
: खामोश रहिये ......क्योकि यह आपका मामला नही है.......!
Wed, Sep 9, 2020
सन्दर्भ….. हेमन्त साहू की मौत और इंसाफ का सँघर्ष
खामोश रहिये ......क्योकि यह आपका मामला नही है.......!
सन्दर्भ..... हेमन्त साहू की मौत और इंसाफ का सँघर्ष
राजेश सोनी
साहू गली के सब्जी विक्रेता रामबिलास साहू व छत्रमनी साहू को शायद अब इंसाफ मिल सके......?इंसाफ की यह उम्मीद मृतक हेमन्त साहू की माँ छत्रमनी के उस सँघर्ष के बाद जगी है जब चिलचिलाती धूप व बारिश के बीच बैठ कर कुंभकर्णी नींद में सो रहे पुलिस व प्रशासन को धरने में बैठ कर जगाने का काम किया । पुलिस जाग गई है तभी तो एसआईटी गठित कर नए सिरे से एक महीने से फाइलों में दफन उस कथित हत्या की जांच शुरू की गई है। 31 जुलाई को हेमन्त साहू का शव बिशुनपुर में मिला था। नपा कर्मचारी रहा हेमन्त अपने चार दोस्तो के साथ पार्टी मनाने गया था और वहां से उसकी लाश ही आई। जबकि दोस्त व पुलिस की थ्योरी में हेमन्त ने रेल से कट कर आत्महत्या कर ली ,तो बात क्या हुई कि उसने यह कदम उठाया ..? दोस्तो ने उसे ऐसा करने से रोका क्यो नही ...? जब सब साथ मे गए थे तो रात में उसे अकेले जाने क्यों दिया ...? कई सवाल है जो मामले को सन्देहास्पद बनाते है जो हत्या की ओर इशारा करते है। बात आज इसकी नही है इन सवालों का जबाव पुलिस ढूढेंगी....बात हम सूरजपुर के उस संवेदनहीन समाज की कर रहे है। जहाँ एक गरीब परिवार के नवयुवक की सन्देहास्पद मौत हो जाती है और परिवार हत्या की बात करते हुए न्याय की गुहार करता है पर कोई उसके साथ खड़े होना तो दूर उसकी दर्द भी नही सुनना चाहता । कहने को विपक्ष है जो 15 साल का सत्ता का सुख भोगने के बाद जैसे कोमा में है। उसने शहर की समस्या व सवालों से जैसे मुँह मोड़ लिया है। राजनीत तो फिर भी ठीक है उसे आज वोट की जरूरत नही है इसलिए आम जनता की समस्याओं से वह कोई मतलब नही रखना चाहती पर उस समाज का क्या कहे ....?जिस समाज से वह परिवार वास्ता रखता है उसने भी खामोशी की चादर ओढ़े रखी, क्या समाज के अगुवा केवल फतवा जारी करने तक मतलब रखते है । हर साल समाज मे नेता चुने जाते है जो केवल अपना ओहदा बताते फिरते है मगर ऐसे गरीब गुरबों की आवाज बनने में उन्हें हिचकिचाहट होती है। यही वजह है कि इस परिवार में बेटे के इंसाफ के लिए महिलाओं को मोर्चा सम्हालना पड़ा। ऐसे नेताओ को देखिए वे पहुचे पर गाल बघार कर निकल लिए फिर क्रेडिट लेने तब पहुँच गए जब उन्हें समझ आ गया कि अब नाखून कटा कर शहीद का दर्जा पाया जा सकता है। बात उनकी भी है जो वार्ड के जनप्रतिनिधी बने या बनाये गए थे वे भी वार्ड से मुँह मोड़ लिए और तो और नगरपालिका जहाँ वह काम करता था उसके संगी साथी भी साथ देने या सवेंदना प्रकट करने में गुरेज कर गए क्या केवल इसलिये कि वह गरीब था.....?
एसपी राजेश कुकरेजा पिडित परिजनों से बात उच्चस्तरीय जाँच का भरोसा देते हुए
अंधो के शहर में आईना बेचने से बेहतर है कि उम्मीद करनी चाहिए कि जिसका कोई नही उसका खुदा होता है.....और अब शायद इस परिवार को न्याय मिल जाये...?
परन्तु यह सोचना होगा कि शहर की यह खामोशी क्या शहर की सेहत के लिए ठीक है ,ठीक है तभी तो गाड़ी से कुचलने के मामला भी पुलिस दफन करने में सफल हो गई । इंतजार करिये और कई मामले ऐसे ही दफन होते रहेंगे..................?