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: जमीन विवाद को लेकर हत्या करने वाले हत्यारे दो भाई एवं एक पुत्र को आजीवन कारावास की सजा........

Admin

Sun, Aug 29, 2021

बैजनाथ केशरी

(रामानुजगंज बलरामपुर)

रामानुजगंज-------------- जमीन विवाद को लेकर एक युवक को टांगी एवं फावड़ा से हत्या करने वाले  हत्यारे को पस्ता थाना अंतर्गत ग्राम जिगड़ी के रहने वाला दो भाई 48 वर्षीय बीरबल उराव पिता रूंगटू, 45 वर्षीय जानकी उरांव पिता रूंगटू एवं पुत्र 27 वर्षीय बृजदेव पिता बीरबल उराव को द्वितीय अपर सेशन के विद्वान न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने धारा 302 / 34 के तहत आजीवन कारावास एवं 500 रुपए से अर्थदंड से दंडित किया है अर्थदंड अदा न किए जाने पर 1 वर्ष के अलग से सश्रम कारावास की सजा की प्रावधान है। राज्य द्वारा लोक अभियोजक विपिन बिहारी सिंह थे । इस संबंध में बताया गया कि घटना दिनांक 1 जुलाई 2018 को जब प्रार्थी धनेश्वर नायक ग्राम जिगड़ी में उसके घर पर था तब उसे उसके चचेरे भाई विफन राम ने बताया कि प्रार्थी के पिता लोमारू राम की लूना गाड़ी ग्राम जिगड़ी जुडैल झरिया खेत के पास खड़ी है और वह दिखाई नहीं दे रहा है। प्रार्थी जब मौके पर गया तो मृतक लोमारू राम खेत में बेहोशी की हालत में सोया हुआ था और उसके सिर पर धारदार हथियार से वार करने का निशान भी था। उसको चोट लगने से जमीन पर काफी रक्त भी थी जिस जमीन पर मृतक था उसी जमीन का विवाद उक्त अभियुक्तगण से दो-तीन वर्षों से चला आ रहा था ।इसी बात को लेकर उक्त अभियुक्तगणों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। 30 जून 2018 को विवादित भूमि पर मृतक के द्वारा धान की बुनाई की गई थी इस बात पर बदले की भावना से उक्त अभियुक्तगणों ने उसी जमीन पर पुनः बुनाई कर रहे थे। जब मृतक के द्वारा मना किया गया तो उन लोगों के द्वारा धारदार हथियार से मारकर हत्या कर दिया गया। इस घटना को लेकर पस्ता थाना ने धारा 302 /34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। अपने आदेश में न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने लिखा है कि यह अवधारित किया जाना उचित होगा कि न्यायालय को ना केवल अपराध की प्रकृति उसके लिए विहित दंड समाज की आवश्यकताओं एवं आयुक्त के प्रति उपशमनकारी एवं गुरुतरकारी परिस्थितियों के प्रति ही ध्यान नहीं देना है बल्कि अपराध के पीड़ित एवं उसके आश्रितों को न्याय प्रदान करने की आवश्यकता को भी विचार में रखना होगा। बिधाई परिवर्तनों एवं शीर्ष न्यायालय के विनिस्चयो के बावजूद यह पहलू ध्यान देने से बच जाता है एवं उसकी आश्रितों की दुर्दशा कि यहां तक की जब भी उपेक्षा की जा सकती है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अपराध अदण्डित ही रह जाता है। पीड़ित अथवा आश्रितों को न्याय संगत मुआवजे का निर्धारण चिकित्सा एवं अन्य ब्ययो पीड़ा एवं कष्ट उपार्जन की हानी और अन्य सुसंगत कारको का ध्यान में रखकर किया जाना है।

मृतक के पत्नी को क्षतिपूर्ति राशि देने की अनुशंसा-----------  द्वितीय अपर सेशन न्यायाधीश मधुसूदन चंद्राकर ने दिए गए आदेश में लिखा है कि मृतक के परिजनों को मुआवजे का भुगतान राज्य द्वारा किए जाने के संबंध में विस्तार में प्रतिपादित मार्गदर्शक सिद्धांत के आलोक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलरामपुर , जिला बलरामपुर - रामानुजगंज, छत्तीसगढ़ समुचित जांच उपरांत निर्णय प्राप्ति दिनांक से 3 माह की अवधि के भीतर क्षतिपूर्ति योजना 2011 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति निधि से मृतक लोमारू राम की पत्नी को मृतक की मृत्यु के संबंध में पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की गई है।।

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