: मध्य प्रदेश की कैबिनेट बैठक पर टिकी है छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियो की नज़र
Mon, May 28, 2018
पप्पू जायसवालकल का दिन शिक्षाकर्मियों के लिए ऐतिहासिक होगा, बेशक किस्मत मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मियों की तय की जायेगी, लेकिन हकीकत में खुशियो के साझेदार छत्तीसगढ़ के 1.80 लाख शिक्षाकर्मी भी बनेंगे। क्योंकि छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों को बखूबी इस बात का अहसास है कि अगर मध्यप्रदेश में संविलियन का रास्ता खुला, तो छत्तीसगढ़ में भी मंजिल मिलते देर नहीं लगेगी। लिहाजा मध्यप्रदेश में 29 मई को होने वाली कैबिनेट बैठक पर छत्तीसगढ़ के भी शिक्षाकर्मियों की निगाहें लगी हुई है। माना जा रहा है कि कल होने वाली कैबिनेट बैठक में शिक्षाकर्मियों के 22 वर्ष का इंतजार खत्म हो सकता है और कैबिनेट शिक्षाकर्मियों की बहुप्रतीक्षित मांग मूल शिक्षा विभाग में संविलियन के प्रस्ताव को कल होने वाली बैठक में हरी झंडी दिखा सकती है , अगर ऐसा होता है तो छत्तीसगढ़ में भी सरकार पर शिक्षाकर्मियों के संविलियन का दबाव स्वमेव काफी बढ़ जाएगा क्योंकि अब तक सरकार संवैधानिक दिक्कतों का हवाला देकर संविलियन के मुद्दे को टालते रही है, इधर प्रदेश के शिक्षाकर्मी भी मध्य प्रदेश के संविलियन के निर्णय का स्वागत करने के लिए तैयार बैठे हैं । सरगुजा संभाग के शिक्षाकर्मी मोर्चा के प्रदेश सह संचालक हरेन्द्र सिंह , रंजय सिंह , एल.डी.बंजारा , रविन्द्र नाथ तिवारी , प्रह्लाद सिंह , विवेक दुबे एवं हृषिकेश उपाध्याय ने कहा है कि यदि कल होने वाली कैबिनेट की बैठक में मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मियों के संविलियन के प्रस्ताव को बिना किसी दोष के पारित किया जाता है तो यहां के शिक्षाकर्मी भी इस पहल का स्वागत करेंगे और पटाखे फोड़ कर और मिठाई बांटकर इसकी खुशियां मनाएंगे आखिरकार शिक्षाकर्मी का जन्म अविभाजित मप्र में ही हुआ था , साथ ही मध्य प्रदेश से सीख लेते हुए यहां भी सरकार को जल्द से जल्द शिक्षाकर्मियों का संविलियन करना चाहिए ।
बिदित हो कि शिक्षक पंचायत जो पूर्व में शिक्षा कर्मी के रूप में नियुक्त हुए है लम्बे समय से शिक्षा विभाग में संबिलियन की मांग को लेकर लम्बे लम्बे आंदोलन किये है एवं वर्तमान में भी तरह तरह के कार्यक्रम करके अपनी आवाज बुलंद कर रहे है ।
: एक होमवर्क ऐसा भी
Mon, May 28, 2018
D.shyam kumarचेन्नई के एक स्कूल ने अपने बच्चों को छुट्टियों का जो एसाइनमेंट दिया वो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है. वजह बस इतनी कि उसे बेहद सोच समझकर बनाया गया है. इसे पढ़कर अहसास होता है कि हम वास्तव में कहां आ पहुंचे हैं और अपने बच्चों को क्या दे रहे हैं. अन्नाई वायलेट मैट्रीकुलेशन एंड हायर सेकेंडरी स्कूल ने बच्चों के लिए नहीं बल्कि पेरेंट्स के लिए होमवर्क दिया है, जिसे हर एक पेरेंट को पढ़ना चाहिए.क्या है होमवर्क -
पिछले 10 महीने आपके बच्चों की देखभाल करने में हमें अच्छा लगा.आपने गौर किया होगा कि उन्हें स्कूल आना बहुत अच्छा लगता है. अगले दो महीने उनके प्राकृतिक संरक्षक यानी आप उनके साथ छुट्टियां बिताएंगे. हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिससे ये समय उनके लिए उपयोगी और खुशनुमा साबित हो.- अपने बच्चों के साथ कम से कम दो बार खाना जरूर खाएं. उन्हें किसानों के महत्व और उनके कठिन परिश्रम के बारे में बताएं. और उन्हें बताएं कि उपना खाना बेकार न करें.- खाने के बाद उन्हें अपनी प्लेटें खुद धोने दें. इस तरह के कामों से बच्चे मेहनत की कीमत समझेंगे.- उन्हें अपने साथ खाना बनाने में मदद करने दें. उन्हें उनके लिए सब्जी या फिर सलाद बनाने दें.- तीन पड़ोसियों के घर जाएं. उनके बारे में और जानें और घनिष्ठता बढ़ाएं.- दादा-दादी/ नाना-नानी के घर जाएं और उन्हें बच्चों के साथ घुलने मिलने दें. उनका प्यार और भावनात्मक सहारा आपके बच्चों के लिए बहुत जरूरी है. उनके साथ तस्वीरें लें.- उन्हें अपने काम करने की जगह पर लेकर जाएं जिससे वो समझ सकें कि आप परिवार के लिए कितनी मेहनत करते हैं.- किसी भी स्थानीय त्योहार या स्थानीय बाजार को मिस न करें.- अपने बच्चों को किचन गार्डन बनाने के लिए बीज बोने के लिए प्रेरित करें. पेड़ पौधों के बारे में जानकारी होना भी आपके बच्चे के विकास के लिए जरूरी है.- अपने बचपन और अपने परिवार के इतिहास के बारे में बच्चों को बताएं.- अपने बच्चों का बाहर जाकर खेलने दें, चोट लगने दें, गंदा होने दें. कभी कभार गिरना और दर्द सहना उनके लिए अच्छा है. सोफे के कुशन जैसी आराम की जिंदगी आपके बच्चों को आलसी बना देगी.- उन्हें कोई पालतू जावनर जैसे कुत्ता, बिल्ली, चिड़िया या मछली पालने दें.- उन्हें कुछ लोक गीत सुनाएं.- अपने बच्चों के लिए रंग बिरंगी तस्वीरों वाली कुछ कहानी की किताबें लेकर आएं.- अपने बच्चों को टीवी, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूर रखें. इन सबके लिए तो उनका पूरा जीवन पड़ा है.- उन्हें चॉकलेट्स, जैली, क्रीम केक, चिप्स, गैस वाले पेय पदार्थ और पफ्स जैसे बेकरी प्रोडक्ट्स और समोसे जैसे तले हुए खाद्य पदार्थ देने से बचें.- अपने बच्चों की आंखों में देखें और ईश्वर को धन्यवाद दें कि उन्होंने इतना अच्छा तोहफा आपको दिया. अब से आने वाले कुछ सालों में वो नई ऊंचाइयों पर होंगे.माता-पिता होने के नाते ये जरूरी है कि आप अपना समय बच्चों को दें.अगर आप माता-पिता हैं तो इसे पढ़कर आपकी आंखें नम जरूर हुई होंगी. और आखें अगर नम हैं तो वजह साफ है कि आपके बच्चे वास्तव में इन सब चीजों से दूर हैं. इस एसाइनमेंट में लिखा एक-एक शब्द ये बता रहा है कि जब हम छोटे थे तो ये सब बातें हमारी जीवनशैली का हिस्सा थीं, जिसके साथ हम बड़े हुए हैं, लेकिन आज हमारे ही बच्चे इन सब चीजों से दूर हैं, जिसकी वजह हम खुद हैं.
: जिला प्रशासन के पहल पर करोड़ो की लागत से तैयार हो रहा है मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट
Mon, May 28, 2018
सूरजपुर- सूरजपुर जिले मे जहां किसानो के लिए सुखे कि मार समेत कई समस्याओ का सामना करना पङता है, वही जिले के डिजीटल ग्राम सिलफिली में संभाग का एकमात्र मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को कृषि के साथ-साथ पशुपालन के लिए भी जागरुक किया जाएगा। कृषि बाहुल्य सूरजपुर जिले मे प्रशासन के द्वारा करोड़ो की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिसका काम भी शुरु हो गया है। मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट मे प्रतिदिन पांच हजार लीटर दूध की खरीदी की जाएगी, जिससे किसानों को जहां दूध के बिक्री के लिए दूसरे जिलो का सहारा लेना पङता था, वही अब किसान दूध को अच्छे दरों पर प्लांट मे ही बेच सकेंगे, साथ ही कृषि के साथ उनकी आजीविका मे भी बढोतरी होगी। किसानो के लिए जहां कृषि कार्य ही एकमात्र सहारा होता है, वही कभी मौसम की मार तो कभी सब्जियों के कम दाम से किसान हमेशा ही प्रभावित होते रहते हैं, ऐसे में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट से किसानों को एक बड़ी सौगात मिल सकेगी। जिले के कलेक्टर श्री के0सी0 देवसेनापति ने बताया कि इस प्लांट से पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा साथ ही स्थानीय बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सकेगा और कई किलोमीटर दूध बेचने के लिए परेशान होने वाले किसानों को भी राहत मिलेगा। उन्होंने बताया कि बहरहाल किसानों को दुध बेचने के लिए कम दामो पर दूसरे जिले मे जाना पड़ता था, ऐसे में सिलफिली गांव मे मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट किसानों के आमदनी के लिए अहम भुमिका निभाएगी।