: नये शराब दुकान खुलते ही ग्रामीणो ने किया विरोध.....
Sun, Feb 14, 2021
बिहारपुर- जिले के दुरस्थ अंचल बिहारपुर में अग्रेजी शराब दुकान खुलते ही स्थल को लेकर सरपंच सहित ग्रामीणो ने विरोध दर्ज कराते हुये स्थल परिवर्तन करने की मांग की है गौरतलब है कि अंग्रेजी शराब दुकान महुली मेन रोड पुरानाटोला चौक पर आबकारी विभाग द्वारा खोला गया है जिसे ग्रामीणों सहित ग्राम पंचायत सरपंच बाबूराम सूर्यवंशी ने आपत्ति जताई है.उन्होंने कहा यह स्थान रिहायशी क्षेत्र में आता है.उक्त स्थान पर मोहल्ले के लोगों का उठने बैठने का एक महत्वपूर्ण जगह है. जहां 24 घंटे ग्रामीणों का आना जाना लगा रहता है.उन्होने ने बताया कि जहां शराब दुकान, बार खाना, इत्यादि होते हैं वहां असामाजिक तत्वों का अड्डा रहता है. चौराहा होने के कारण छात्र-छात्राओं तथा जनसाधारण का आना-जाना भी उसी चैक से होता है. जिसका नकारात्मक प्रभाव सीधा उनके छात्र जीवन पर पड़ेगा क्योंकि यह ग्रामीण क्षेत्र है इस कारण से यहां इन बातों पर गौर करना आवश्यक है। शासन ने भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास तथा उत्थान हेतु प्रतिबद्ध है। इस दृष्टि से शराब दुकान रिहायती क्षेत्र में प्रतिबंधित करना आवश्यक है। यदि शासन के द्वारा सुनवाई नहीं की गई तो ग्रामवासीयों ने चेतावनी दी है कि आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
: PMGSY की सड़क की दुर्दशा......2 से 3 फीट तक के बने गड्ढे.....
Tue, Feb 9, 2021
बिहारपुर-बिहारपुर से महुली 15 किमी. सड़क की दयनीय स्थिति हो गई है। सड़क में दो से तीन फीट तक के बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिसमें चलना खतरनाक साबित हो रहा है। पीएमजीएसवाई के तहत बनी सड़क की खस्ता हालत से ग्रामीणों सहित छात्रों को काफी परेशानी हो रही है। चांदनी-बिहारपुर से महुली तक जाने के लिए यह ही एकमात्र सड़क है। माहभर पूर्व कलेक्टर एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंह देव व संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े सहित जिले के आला अधिकारी चांदनी बिहारपुर इलाके में बैजनपाठ के गांव छोड़े हुए ग्रामीणों मिलने आए जनप्रतिनिधियों के साथ ही कई अधिकारी इस मार्ग से यहां पहुंचे थे। इसके बाद भी अब तक सड़क की दुर्दशा को बदलने कोई पहल होती नजर नहीं आ रही है। ग्रामीण अब सड़क की दुर्दशा को लेकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सुधार काम शुरू नहीं होने पर प्रशासन को आंदोलन करने की चेतावनी दी है।खस्ताहाल हो चुकी इस सड़क से दर्जनों गांव के लोग जिला व ब्लाक मुख्यालय रोजाना आना-जाना करते हैं। अवंतिकापुर, कोल्हुआ, महुली, खोहिर, बैजनपाट, लूल, भुंडा, पारसा, पठारी, रसौकी, उमझर, रामगढ़, जुड़वानी, चोंगा, कछवारी, तेलाईपाठ सहित कोरिया जिले को जोड़ने वाली मात्र एक सड़क है जिससे लोग आना जाना करते है। बड़े-बड़े गड्ढे होने से ये लोग कई बार दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।2013 में बनी थी यह सड़कपीएमजीएसवाई के तहत बिहारपुर से महुली तक 15 किमी सड़क का निर्माण 2008 में शुरू हुआ था, जो 2013 में बन पाया था। सड़क निर्माण में पांच साल तो लग गए। आज स्थिति यह है कि 2 से 3 फीट तक के गड्ढों के बीच से लोगों को गुजरना पड़ता है। साथ ही अब इस मार्ग पर पड़ने वाले कई पुल-पुलिए भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके बाद भी जनप्रतिनिधि व अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वही बिहारपुर में उप तहसील समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाई स्कूल हाई सेकेंडरी कॉलेज बैंक सहित अन्य काम के लिए आए दिन आना जाना लगा रहता है।
: दिव्यांग महिला का नही बन पा रहा है जरुरी कागजात....आधार कार्ड के लिए हो रही है परेशान....
Thu, Feb 4, 2021
बिहारपुर- कुदरत की मार झेल रही बैजनपाठ की मनबसिया पंडो को इंसान होने के सबूत जुटाने के लिए भारी जदोजहद करनी पड़ रही है ताकि शासन की योजनाओं का लाभ मिल जाये तो फिर जिंदगी की गाड़ी पटरी पर दौड़ने लगे….? कुछ युवकों की मदद से प्रयास हुआ है, देखना यह है कि कितनी सफलता मिलती है।ओड़गी ब्लॉक के बेजनपाठ पर तमाम सुर्खियों के बाद इनदिनों प्रशासन की नजरें इनायत है।जिससे वहां केम्प लगाकर शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने पहल की जा रही है। लिहाजा शासन की योजना का लाभ लेने 30 वर्षीय मनबसिया पंडो पहुँची तो उसे बताया गया कि उसे अपना आधार कार्ड लाना होगा। दोनों पैरों से द्वियांग महिला जब आधार कार्ड के बिहारपुर के लोकसेवा केंद्र पहुँची तो उसे मतदाता परिचय पत्र लाने को कहा गया। दुर्भाग्य से उसके पास न तो मतदाता परिचय पत्र है और न ही आधार कार्ड..? आज तक गांव में इसकी जरूरत पड़ी नही तो उसने या उसके परिजनों ने बनवाया नही। सरपंच ने गांव की निवासी होने का प्रमाण पत्र दिया है।लोक सेवा केंद्र की इस बेरुखी पर बिहारपुर के कुछ नवजवानों ने जाकर बात की तो उसे सरपंच का पत्र लेकर आने को कहा गया है। देखना यह है कि क्या उसे सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए इंसान होने का सबूत मिल पाता है या नही…?उक्त महिला को बिहारपुर तक आने में कितनी जदोजहद करनी पड़ी यह या तो वही जानती है या फिर उसका पति जिसने कभी गोद मे तो कभी बाइक से लेकर जैसे तैसे पहाड़ से नीचे उतार कर जिंदगी को पटरी में लाने के लिए मशक्कत की है।