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: इकलौते नगर निगम के लोग भय व दहशत के साय मे जीनें को मजबूर

Admin

Sat, Jul 28, 2018
शमरोज खान कोरिया/बैकुण्ठपुर. जिले के चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले लोग भय और दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। यहां भूमिगत खदानों से निकलने वाली जहरीली गैस लोगों को कई प्रकार की बीमारियां दे रही हैं तो वहीं कई स्थानों पर कोयले की सीम में लगी आग से लोग दहशत में हैं कि कब पूरी चिरमिरी मलबे के ढेर में तब्दील हो जायें। एसईसीएल द्वारा संचालित खदानों में लगी आग को बुझाने के लिये कोई ठोस पहल नही की जा रही है। जिससे यहां के रहवासियों में काफी गुस्सा है। इन सबके अलावा यहां के लोगों को विस्थापन का भय भी हमेशा बना रहता है। नगर निगम चिरमिरी क्षेत्र में लगभग ७० हजार से अधिक की आबादी निवास करती है वहां बीते कई दशकों से कोयले का उत्खनन किया जा रहा है। जिन भूमिगत खदानों में कोयले का उत्खन्न कर लिया जाता है नियमानुसार उन खदानों में मिट्टी फिलिंग कर उसे बंद करने की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होती है। इस मामले में कागजी खानापूर्ति तो कर ली जाती है लेकिन खदानों को बंद करने का कोई ठोस उपाय नही किया जाता। जिसके चलते इन खदानों में पड़े कोयले में आग लगने से पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं कौन सी खदान कब बैठ जायें कुछ कहा नही जा सकता। इन बंद पड़ी खदानों से निकलने वाली जहरीली गैस से अब तक कई लोगों व मवेशियों की मौत हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद भी एसईसीएल प्रबंधन और जिले के आलाधिकारी मौन साधे हुये हैं जिससे हादसे की आशंका हमेशा बनी रहती है। इस बारे में चिरमिरी क्षेत्र के आरटीआई कार्यकर्त्ता राजकुमार मिश्रा ने सूचना के अधिकार के तहत् जानकारी निकालकर एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करा दी, लेकिन उसके बावजूद भी कोई ठोस कार्यवाही नही हुई। यहां के लोगों का कहना है कि एक ओर जहां इन खदानों में लगी आग को रोकने कोई ठोस उपाय नही किये जा रहे हैं वही खदानों में होने वाली ब्लॉस्टिंग से बड़ी बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। यहां के लोग हमेशा दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब कभी ये खदानें बैंठेंगी और बड़ा हादसा होगा तो उसकी जवाब देही आखिर किसकी होगी।