: क्या शहीद पत्रकार उमेश राजपूत को कभी न्याय मिल पाएगा..?? आखिर क्यों अनसुलझा है आज तक मामला..??क्या कभी मिल पाएगा न्याय..??
Admin
Thu, Oct 26, 2023
नितिन सिन्हा
रायपुर/ गरियाबंद.. पुलिस जब बदले की भावना से काम करती है.तो उसका चरित्र किसी खून चूसने वाले राक्षस से कम नही होता है.खाखी के भेष में कुछ लोग दया,मानवता,जिम्मेदारी और सेवा भावना का पहले अपने थाने में ही सामूहिक बलात्कार करते है।। फिर अपने निजी हित और अहम की पूर्ति के लिए संविधान से मिली शक्ति का ऐसा दुरुपयोग करते हैं कि,जिसे देख सुनकर कर किसी की भी रूह कांप उठती है।। *हालाकि छ ग पुलिस के प्रसंग में स्व. मीना खलखो,स्व. मड़कम हिड़मे,स्व.पंकज बेक जैसे कई मामलों के बीच पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड इस बात का जीवंत प्रमाण है।। जिसकी जांच रिपोर्ट सालों बाद भी सामने नहीं आई,या आई भी तो लिपा पोती कर तब आई जब तक मामले में संलिप्त आधे से ज्यादा खाखी वाले आरोपी या तो मर चुके थे या उम्र दराज हो गए थे। साथी पत्रकार उमेश मामले में जिसने जांच की वो अधिकारी आज भी कानून की नजर में फरार है। ये अलग बात है कि उसे कथित तौर पर एक नही कई बार उसके निज निवास में देखा गया था।। वहीं आज सालों बाद तक तत्कालीन थाना प्रभारी सी.एल.ऊइके की गिरफ्तारी क्यों नही गई.??..पीड़ित परिजन अभी भी सरकार से ये सवाल पूछते हैं। हालाकि हमारे राज्य में ऐसी सैकड़ो घटनाएं घटी है,,,पर आज बात हम पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड की करते हैं. आपको बता दें कि छुरा नगर के रहने वाले नई दुनिया समाचार पत्र के पत्रकार उमेश राजपूत को 23 जनवरी 2011के दिन उनके ही घर में घुस कर कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मार दी थी। जिसके बाद पत्रकार उमेश की मौत हो गई थी। घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन के द्वारा जांच शुरू की गई थी जो लगभग चार वर्षों तक चलती रही। परंतु आरोपी पकड़े नहीं गए।मृतक के परिजनों ने इस उम्मीद से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सी बी आई जांच की मांग की थी,शायद पुलिस से बेहतर और जल्दी उन्हे न्याय मिल पाएगा। हालाकि परिजनों के आवेदन पर माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच हेतु आदेश जारी किया था। सीबीआई ने छह साल बाद दो आरोपियों को जिनमे एक पत्रकार शामिलथा उसे बेटे सहित गिरफ्तार किया। सीबीआई के द्वारा पत्रकार शिव वैष्णव और उसके बेटे विकास वैष्णव को हिरासत में लिया गया था। वही हिरासत में ही शिव वैष्णव ने संदिग्ध रूप से फांसी लगा ली थी। सीबीआई की थ्योरी के उलट उमेश के परिजन स्व.शिव को इसलिए आरोपी नही मानते है,क्योंकि वो खुद घटना के वक्त शहीद साथी उमेश के साथ निहत्थे मौजूद थे। ऊपर से सीबीआई की हिरासत में शिव की मौत के सालों बाद भी उसके परिजनों को आज तक पोस्ट मार्टम रिपोर्ट नही दी गई। इधर घटना को घटित हुए लगभग नौ से दस साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। इसके बाद परिजनों ने उच्च न्यायालय से जांच रिपोर्ट हेतु न्यायालय में पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट की मांग की। परिजनों की मानें तो जांच में कुछ प्रभाव शील लोगों के साथ स्थानीय नेताओं के नाम सामने आने वाई थे। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस थाने से उमेश राजपूत हत्याकांड से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज व सामान गायब भी किए गए थे। इस वजह से घटना का खुलासा नहीं हो पाया। सालों तक जांच के बाद आने वाली रिपोर्ट की प्रतिक्षा करने के बाद रिर्पोट की सत्यापित छायाप्रति प्राप्त करने हेतु परिजनों ने पुनः माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट की मांग की। जिस पर उच्च न्यायालय ने जांच आदेश में पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड में सी बी आई को जल्द जांच खत्म कर उसकी सील बंद रिपोर्ट लिफाफे में रखकर रिपोर्ट को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पेश करने जा आदेश दिया था। लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नही की गई। इधर अक्टूबर 2023 को उनके ही भाई को उनके निवास पर किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा उमेश राजपूत के जैसे उन्हे भी गोली मारकर हत्या कर देने की धमकी भरा पर्चा डाला गया था। जिसकी पृथक रूप से जांच छुरा पुलिस ने शुरू की थी। भाई की माने तो पत्र को लेकर राइटिंग एक्सपर्ट ने उन्हें यह बताया था कि पत्र की राइटिंग किसी पुलिस अफसर की है। सीबीआई की प्राथमिक जांच में ही पुलिस के उस अफसर की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। परंतु सीबीआई ने उसे गिरफ्तार करने के बजाए फरार बताना ज्यादा मुनासिब समझा। अभी बीते साल पहले संबंधित घटना को लेकर राज्य की नई सरकार ने एस आई टी का गठन कर जांच की जिम्मेदारी sit को दी थी।परिजनों को उम्मीद थी कि शायद अब घटना का खुलासा हो सकता है। लेकिन आज साल भर बित जाने को है एस आई टी और परिजन दोनो के हाथ खाली है।वैसे छ.ग. राज्य में एक दर्जन से अधिक बड़े और स्वयंभू पत्रकार संगठन भी कार्यरत है जिनके सदस्यों की संख्या सैकड़ों या हजारों में हैं।लेकिन किसी संगठन ने स्व.पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मुखर आवाज नही उठाई।संभवत: आज भी शहीद साथी उमेश राजपूत की आत्मा को न्याय पाने का इंतजार है।
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