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बिना गांव वालों के ही पास हो गई 'ग्राम सभा'! प्रकाश इंडस्ट्रीज के प्रोजेक्ट पर सवाल उठाने वाले हिरासत में!

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भास्करपारा कोल माइंस के कथित फर्जी खेल पर प्रदर्शन : बिना गांव वालों के ही पास हो गई 'ग्राम सभा'! प्रकाश इंडस्ट्रीज के प्रोजेक्ट पर सवाल उठाने वाले हिरासत में!

Rajesh Soni

Thu, Oct 29, 2026

फाइलों में ‘सहमति’ और जमीन पर पुलिस की ‘गाड़ियां’: भास्करपारा कोल माइंस के कथित फर्जी खेल पर विरोध प्रदर्शन

सूरजपुर। लोकतंत्र में जनता की हैसियत कितनी है? भैयाथान विकासखंड के भास्करपारा में आइए, यहाँ आपको इस सवाल का बिल्कुल ताजा और 'प्रशासनिक' जवाब मिल जाएगा। भास्करपारा स्थित प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कोल माइंस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर एक ऐसी ‘जादुई’ ग्राम सभा हुई, जिसमें प्रस्ताव तो पास हो गया, लेकिन उसमें खुद गाँव वालों की ही रजामंदी गायब थी!

​यानी, ग्रामीणों को बिना बताए, बिना जताए, कागजों पर ऐसा विकास का खाका खींचा गया कि ग्रामीणों के होश ही उड़ गए। अब जब ग्रामीणों को पता चला कि उनकी जमीन और हकों की ‘डील’ बंद कमरों में हो चुकी है, तो उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की। लेकिन, व्यवस्था को जनता का यह लोकतांत्रिक सुर जरा भी रास नहीं आया।

​कागजी फर्जीवाड़े पर सवाल उठाओगे, तो पुलिस चौकी जाओगे!

ग्रामीणों का सीधा और कड़ा आरोप है कि कोल माइंस परियोजना के लिए उनकी जानकारी के बिना ही ग्राम सभा का एक नंबर का फर्जी प्रस्ताव तैयार कर लिया गया। जब इस कथित जालसाजी के खिलाफ गाँव वाले लामबंद होकर अपना हक मांगने और जांच की मांग करने सड़क पर उतरे, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया।

​अब होना तो यह चाहिए था कि अधिकारी आते, कागज खंगालते और फर्जीवाड़ा करने वालों पर नकेल कसते। लेकिन साहब, यहाँ तो उल्टी गंगा बह गई! स्थिति को 'नियंत्रित' करने के नाम पर एसडीएम और तहसीलदार दल-बल के साथ ऐसे पहुंचे, जैसे ग्रामीणों ने नहीं, बल्कि ग्रामीणों पर किसी ने कोई अपराध कर दिया हो। फर्जी प्रस्ताव की जांच तो दूर, विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को ही तितर-बितर कर पुलिस ने हिरासत में लिया और चेन्द्रा पुलिस चौकी का 'फ्री सफर' करवा दिया।

​साहब! जब सब कुछ कागजों पर ही करना है, तो ग्राम सभा का नाटक क्यों?

सवाल तो लाजिमी है—अगर कोल माइंस के पक्ष में सारे प्रस्ताव और औपचारिकताएं अफसरों और रसूखदारों को बंद कमरों में ही तय करनी हैं, तो बेचारी जनता को 'ग्राम सभा' और 'सहमति' के लोकतांत्रिक ड्रामे में घसीटने की जरूरत ही क्या है? एक तरफ ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का सीधा-सीधा हनन है, तो दूसरी तरफ पुलिस का पहरा है।

​फिलहाल, ग्रामीणों ने भी दो-टूक चेतावनी दे दी है। भले ही पुलिस ने कइयों को हिरासत में ले लिया हो, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला पस्त नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस कथित फर्जी खेल की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच नहीं होती और फर्जी प्रस्ताव को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक भास्करपारा की जमीन पर विरोध की यह चिंगारी सुलगती रहेगी—चाहे प्रशासन कितनी भी गाड़ियां क्यों न भेज ले!

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