ज्ञान के मंदिर बगल में 'सोमरस' का प्रसाद : छात्राओं ने विरोध किया तो मैडम तहसीलदार बोलीं— 'उठती हो कि थाने भिजवाऊं? 'वीडियो वायरल
Subhas Gupta
Thu, Oct 29, 2026
सूरजपुर। शिक्षा के स्तर को ‘ऊंचा’ उठाने के लिए सूरजपुर प्रशासन ने ओड़गी में एक अनोखा मॉडल पेश किया है। शासकीय नवीन महाविद्यालय और आईटीआई के होनहार विद्यार्थी किताबों के साथ-साथ अब आबकारी विभाग के 'राजस्व मॉडल' का भी प्रत्यक्ष अध्ययन कर सकें, इसलिए कॉलेज के पास ही एक चमचमाती अंग्रेजी शराब दुकान खोल दी गई है।
अब दिक्कत यह हो गई कि कॉलेज की छात्राओं को प्रशासन का यह 'विकास' रास नहीं आया। उन्हें लगा कि कॉलेज के रास्ते में शराबी नहीं, सुरक्षा होनी चाहिए। इसी 'गलतफहमी' में छात्राएं सड़क पर धरने पर बैठ गईं और शराब दुकान बंद करने की मांग करने लगी।
मैडम का प्रशासनिक प्रेम: 'उठती हो कि थाने भिजवाऊं?'
जब छात्राओं की आवाज थोड़ी तेज हुई, तो कानून-व्यवस्था का पाठ पढ़ाने मौके पर पुलिस बल के साथ खुद तहसीलदार मैडम तशरीफ लाईं। अब लोकतांत्रिक देश में जनता की बात सुनने का जो पुराना ढर्रा है, मैडम ने उसे दरकिनार करते हुए मॉडर्न प्रशासनिक तेवर दिखाए। वायरल वीडियो में मैडम धरने पर बैठी छात्राओं पर रौब झाड़ते हुए फरमा रही हैं— "उठ रही हो कि थाने भिजवाऊं?"
छात्राओं को लगा था कि अधिकारी उनकी सुरक्षा की चिंता करेंगी, लेकिन मैडम ने साफ समझा दिया कि पढ़ाई-लिखाई अपनी जगह है और शासन का 'टारगेट' अपनी जगह।

न मांग, न प्रस्ताव, फिर भी खुला 'अमृत रस' का केंद्र
मजेदार बात यह है कि इस शराब दुकान के लिए न तो किसी स्थानीय लोगों ने अर्जी दी थी, न किसी जनप्रतिनिधि ने चिट्ठी लिखी थी। लेकिन प्रशासन को शायद लगा कि गरीब और ग्रामीण तबके के मानसिक विकास के लिए डिग्री से ज्यादा जरूरी 'बोतल' है। अगर वाकई शराब की दुकानों से ही क्षेत्र का कायाकल्प होना तय है, तो सरकार को चाहिए कि इसे औपचारिक रूप से 'अमृत रस' घोषित कर डिग्री के साथ एक-एक बोतल मुफ्त बांटने का नियम बना दे।
फिलहाल छात्राओं ने साफ कर दिया है कि मैडम की धमकी से डरने वाली नहीं हैं। 24 घंटे का वक्त है—या तो यह 'संस्कार केंद्र' यहां से हटेगा, नहीं तो फिर थाने की गाड़ियां छोटी पड़ जाएंगी और आंदोलन बड़ा।
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