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भीषण गर्मी में बूंद बूंद पानी की तड़प : 'राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों' पर भारी विभागीय लापरवाही, महीने भर से बूंद-बूंद को तरस रहे पन्डो परिवार

Pappu Jayswal

Fri, May 8, 2026

सूरजपुर। सूरजपुर जिले में एक ओर जहां सरकार हर घर तक स्वच्छ जल पहुँचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के दूरस्थ चांदनी बिहारपुर क्षेत्र से विकास के दावों की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। ग्राम पंचायत कोल्हुआ के वार्ड क्रमांक 2 (पुराना स्कूल पारा) में लगा एकमात्र सोलर ड्यूल पंप पिछले एक महीने से बंद पड़ा है, जिससे यहाँ रहने वाले पन्डो जनजाति के करीब 50 परिवारों के सामने जीवन-मरण का संकट खड़ा हो गया है।

​नदी-नालों का दूषित पानी बना एकमात्र सहारा

​क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान ने पेयजल संकट को विकराल बना दिया है। पंप खराब होने के कारण ग्रामीण अब प्यास बुझाने के लिए असुरक्षित नदी-नालों के जल स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मी के कारण ये प्राकृतिक स्रोत भी सूखने की कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गंदा और दूषित पानी पीने के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

​"सुबह से शाम तक महिलाएं और बच्चे सिर्फ पानी की तलाश में मीलों भटक रहे हैं। नदी का पानी साफ नहीं है, लेकिन जीवित रहने के लिए हमारे पास और कोई विकल्प नहीं बचा है।"— स्थानीय ग्रामीण

​ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या की सूचना कई बार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) और क्रेडा (CREDA) विभाग के अधिकारियों को दी गई, किंतु एक माह बीत जाने के बाद भी कोई सुध लेने नहीं पहुँचा। शासन द्वारा लाखों की लागत से लगाए गए ये सोलर पंप अब रखरखाव के अभाव में 'शो-पीस' बनकर रह गए हैं। विभाग की इस कथित संवेदनहीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने सूरजपुर कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

बहरहाल इस भीषण गर्मी में पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए आदिवासियों का संघर्ष जिला प्रशासन की सतर्कता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद क्या इन परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो पाता है या उन्हें इसी तरह दूषित पानी के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।

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