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'सुशासन' के दावों : के बीच प्यासा किसान; नवगई और मोहरसोप केंद्रों में पेयजल का भारी संकट

Rajesh Soni

Wed, May 6, 2026

सूरजपुर । जिले में चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है, लेकिन इस तपती धूप में किसानों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हैं। क्षेत्र स्थित आ.जा. सेवा सहकारी समिति मर्यादित नवगई एवं मोहरसोप धान खरीदी केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था न होने से किसान बेहाल हैं।

​ प्यास बुझाने के लिए भटक रहे अन्नदाता

​हालांकि धान की सरकारी खरीदी का सीजन बीत चुका है, लेकिन इन सहकारी समितियों में प्रशासनिक और अन्य कार्यों के लिए रोजाना सैकड़ों किसानों का आवागमन लगा रहता है। भीषण गर्मी के इस दौर में घंटों इंतजार करने वाले किसानों के लिए केंद्रों में पानी की एक बूंद तक उपलब्ध नहीं है। किसानों को मजबूरन या तो अपने साथ पानी ढोना पड़ रहा है या फिर तपती धूप में आसपास के इलाकों में पानी की तलाश में भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल कष्टदायक है, बल्कि बुजुर्ग किसानों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

​प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल

​एक ओर राज्य सरकार प्रदेश में 'सुशासन त्योहार' मनाकर बेहतर व्यवस्थाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आती है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि प्रशासन को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

​क्या कहते हैं किसान? (ग्राउंड रिपोर्ट)

राजेश ने बताया कि "धान खरीदी के बाद भी हमें अन्य कार्यों के लिए रोज आना पड़ता है, लेकिन यहाँ पानी का इंतजाम शून्य है। राजकुमार ने कहा कि"ईतनी गर्मी में बिना पानी के रुकना असंभव है। समिति में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। रामचंद्र ने बताया कि "सरकार सुशासन की बात करती है, पर क्या प्यासे किसानों को पानी देना सुशासन का हिस्सा नहीं है?"

बहरहाल परेशान किसानों और ग्रामीणों ने सूरजपुर कलेक्टर और छत्तीसगढ़ शासन से गुहार लगाई है कि ​दोनों केंद्रों (नवगई और मोहरसोप) में तत्काल बोरिंग कराई जाए। ​स्थायी समाधान के लिए सोलर पंप स्थापित किए जाएं ताकि भीषण गर्मी में शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। यदि प्रशासन ने समय रहते इस संवेदनशील मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो क्षेत्र के किसानों में पनप रहा आक्रोश उग्र रूप ले सकता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाता है।

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