इश्क़ का ख़ौफ़नाक इंतिक़ाम : मोहब्बत में मिली नाकामी तो झोंका तेज़ाब, 3 महीने की साज़िश, 'कथित' आशिक़ और उसका साज़िंदार दोस्त दोनों सलाख़ों के पीछे
Subhas Gupta
Tue, Oct 6, 2026
“मोहब्बत का नाम लेकर जो ज़ुल्म की इन्तिहा करते हैं,
वो आशिक़ नहीं, ख़ौफ़नाक साज़िशों का सौदा करते हैं।”
बालोद। मोहब्बत जब जुनून और अना (अहंकार) का रूप अख़्तियार कर ले, तो उसका अंजाम कितना ख़ूनी और वहशियाना हो सकता है, इसकी तल्ख़ मिसाल बालोद की सरज़मीन पर देखने को मिली। शहर की सिंचाई कॉलोनी में कॉलेज छात्रा पर दिनदहाड़े हुए दिल दहला देने वाले तेज़ाब हमले (एसिड अटैक) की गुत्थी को पुलिस महकमे ने महज आठ घंटे के रिकॉर्ड वक़्त में सुलझाते हुए साज़िश का मुकम्मल पर्दाफ़ाश कर दिया है।
तफ़्तीश में यह सनसनीख़ेज़ हक़ीक़त बेनक़ाब हुई कि मासूम चेहरे पर ज़हर घोलने वाला कोई अजनबी नहीं, बल्कि ख़ुद को उसका आशिक़ बताने वाला यश कुमार सोनकर था। उसने अपने साथी करण कुंजाम के हाथों इस बुज़दिली को अंजाम दिलवाया। पुलिस ने दोनों गुनहगारों को दबोचकर सलाख़ों के पीछे धकेल दिया है।
तीन महीने से सुलग रही थी इंतिक़ाम की आग
“जो बात दिल की थी, वो नफ़रत का सैलाब बन गई,
इन्कार जो मिला, तो रूह तक तेज़ाब बन गई।”
पुलिस के मुताबिक यश सोनकर छात्रा से एकतरफ़ा या कथित ताल्लुक़ात के बाद उसके इनकार और दूसरी जगह शादी की रज़ामंदी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। इसी चोट ने उसके ज़ेहन में इंतिक़ाम का ज़हर भर दिया। करीब तीन महीने पहले उसने अपने स्कूल के पुराने दोस्त करण कुंजाम (निवासी भैरमगढ़, बीजापुर) को इस साज़िश का हिस्सा बनाया।
26 सितंबर को उसने करण को भैरमगढ़ से बालोद बुलवाया। बाज़ार से तेज़ाब का इंतज़ाम किया गया और मंसूबा यह था कि गणेश विसर्जन की भीड़-भाड़ में वारदात को अंजाम दिया जाए, लेकिन पुलिस के चाक-चौबंद पहरे की वजह से खौफ़ज़दा मुल्जिमों ने उस वक़्त कदम पीछे खींच लिए।
लाईब्रेरी की दहलीज से निकलते ही बरपा किया क़हर
5 अक्टूबर, दोपहर क़रीब 12:30 बजे—जब छात्रा इल्म के मंदिर (लाइब्रेरी) से घर की तरफ़ लौट रही थी, तभी सिंचाई कॉलोनी की सुनसान सड़क पर यश के इशारे पर घात लगाए बैठे करण कुंजाम ने उस पर तेज़ाब उड़ेल दिया। छात्रा की चीख़ों से पूरी फिज़ा दहल उठी। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत ज़िला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर नाज़ुक हालत को देखते हुए उसे रायपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
तांदुला डैम से कोंडागांव तक फ़रार... मगर क़ानून के हाथ रहे दराज़
“गुनाह की राहों पे चलकर कोई बच नहीं सकता,
क़ानून के शिकंजे से मुजरिम निकल नहीं सकता।”
वारदात को अंजाम देकर करण तांदुला डैम के रास्ते लिफ़्ट लेते हुए चारामा और कोंडागांव की तरफ़ भागा। वहीं पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण के निर्देशन, एएसपी चंद्रकांत गवर्ना के मार्गदर्शन और एसडीओपी विनय साहू की क़यादत में मुस्तैद पुलिस टीम ने जाल बिछा दिया।
सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल और तकनीकी साक्ष्यों (साइबर सेल) ने साज़िश के तार यश सोनकर से जोड़ दिए। सख्ती से की गई पूछताछ में यश के झूठ की दीवारें ढह गईं और उसने अपना जुर्म क़बूल कर लिया। यश की निशानदेही पर पुलिस ने फ़रार करण कुंजाम को कोंडागांव से धर दबोचा।
जुर्म कबूल, तेज़ाब और लिबास ज़ब्त
गिरफ़्तार मुल्ज़िमों में—
यश कुमार सोनकर (उम्र 20 वर्ष), निवासी ग्राम नेवारीकला, बालोद
करण कुंजाम (उम्र 20 वर्ष), निवासी भैरमगढ़, ज़िला बीजापुर
दोनों ने अपने मेमोरेंडम बयान में गुनाह क़बूल कर लिया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए तेज़ाब के अवशेष और आरोपियों के खून-आलूदा/वारदात के वक़्त पहने कपड़े ज़ब्त कर लिए हैं।
इस सनसनीख़ेज़ मामले के फ़ौरी खुलासे में थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, थाना प्रभारी गुरुर निरीक्षक मुकेश सिंह, साइबर प्रभारी धरम भुआर्य, आरक्षक संजय सोनी समेत कोतवाली और साइबर सेल की टीम ने मुस्तैदी का बेमिसाल मुज़ाहिरा किया। पुलिस ने साफ़ कर दिया है कि रूह कंपा देने वाले इस संगीन जुर्म के गुनहगारों को अदालत में सख्त से सख्त सज़ा दिलाई जाएगी।
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