अवैध स्टोन क्रशर मामले में एनजीटी सख्त : सीईसीबी सदस्य सचिव के नेतृत्व में संयुक्त जांच समिति गठित
Rajesh Soni
Mon, Mar 9, 2026
सूरजपुर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने सूरजपुर जिले में अवैध रूप से संचालित स्टोन क्रेशर के गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह न्यायिक सदस्य एवं सुधीर कुमार चतुर्वेदी विशेषज्ञ सदस्य की पीठ ने सुनवाई करते हुए इस प्रकरण में संयुक्त जांच समिति के गठन के आदेश दिए हैं, जिसका निरीक्षण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड (सीईसीबी) के सदस्य सचिव के नेतृत्व में किया जाएगा।।यह मामला कमल सिह एवं अन्य द्वारा दायर आवेदन से संबंधित है, जिसमें प्रतिवादी क्रमांक 10 के स्वामित्व वाली मेसर्स स्वाई स्टोन क्रेशर के अवैध अनधिकृत एवं पर्यावरण के लिए घातक संचालन का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया कि उक्त स्टोन क्रशर बिना पर्यावरणीय स्वीकृति, स्थापना अनुमति एवं संचालन अनुमति के चलाया जा रहा है तथा यह आवासीय बस्तियों के समीप और रेणुका नदी के किनारे स्थित है। रेणुका नदी आसपास के लगभग 18 गांवों के लिए पेयजल एवं सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।याचिका के अनुसार, अवैध स्टोन क्रशर के कारण गंभीर वायु एवं ध्वनि प्रदूषण, जल स्रोतों का दूषित होना, कृषि भूमि का क्षरण तथा ग्रामीणों विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों एवं पशुधन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।एनजीटी ने प्रथम दृष्टया माना कि यह मामला पर्यावरण कानूनों, एहतियाती सिद्धांत, "प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करे" सिद्धांत तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के मौलिक अधिकार के उल्लंघन से जुड़ा है। इसे एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा बताते हुए न्यायाधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधिकरण के आदेशानुसार गठित संयुक्त समिति में जिला कलेक्टर, सूरजपुर का एक प्रतिनिधि, तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के सदस्य सचिव का प्रतिनिधि शामिल होगा, और स्थल निरीक्षण एवं समन्वय की प्रमुख जिम्मेदारी सीईसीबी सदस्य सचिव के नेतृत्व में निभाई जाएगी। समिति को छः सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।
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