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बेकरी वाली दीदी : इन्होंने बेकरी व्यवसाय संभाला और बनीं अपने परिवार का सहारा...

Pappu Jayswal

Sat, Dec 13, 2025

सुमित्रा राजवाड़े का परिवार कई परेशानियों से जूझ रहा था। 2014 गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम की गतिविधियों की जानकारी मिली,जिसमे स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद आत्मनिर्भर बनने के तरीके बताई जा रही थी।

सरगुजा. नारी शक्ति जब कुछ कर दिखाने की ठान ले तो उसे कोई रोक नहीं सकता है। ऐसा ही कुछ लखनपुर ब्लाक के पुहपुटरा गांव की समूह की महिलाओं ने कर दिखाया है। महिलाओं ने अपनी आय बढ़ाने के लिए बेकरी का संचालन शुरू किया। जरूरत पड़ने पर पैकेजिंग का काम भी सीखा। आज गांव की महिलाएं कई काम कर खुद की आय का स्त्रोत बढ़ा रही है। गांव में बेकरी दीदी की नाम से जानी जाने वाली सुमित्रा राजवाड़े बताती है 2012 में वे शादी होकर पुहपुटरा गांव में आई,शिक्षा 12 वीं गणित से हुई है उन्हें पहले से आजीविका मिशन की गतिविधियों की जानकारी थी कि स्वम समूह बनाकर महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है। पति खेती किसानी करते थे, लाभ होता था लेकिन आज के दौर में पर्याप्त लाभ नही है यह फिक्र चिंता सता रही थी। 2014 में गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की होने वाली बैठक में जाने लगी। जिसमे स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद आत्मनिर्भर बनने के तरीके बताया गया।वह भी 10 महिलाओं को लेकर जया स्वम सहायता का गठन किया और महिलाओं ने अपने पास रखे सुरक्षित पैसे जोड़े और 15 हजार का लोन लेकर गतिविधियां शुरू की। आजीविका मिशन के अधिकारियों से मदद मिला। ब्रेड फैक्ट्री के लिए 3 लाख रुपये मिले साथ ही फैक्ट्री की मशीन व अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई और सभी महिलाओं को फैक्ट्री में ही प्रशिक्षण मिला। जिससे वे ब्रेड बनाने लगी। आप पास के लोग खुद उनकी ब्रेड फैक्ट्री में पहुचकर ब्रेड लेने आने लगे। जया फैक्ट्री की ब्रेड को आसपास के लोग काफी पसंद करने लगे और मांग बढ़ने लगी आज छोटी सी रकम से यह व्यवसाय पटरी पर दौड़ पड़ा। आज गांव के कई लोगो के परिवार बेकरी से कमा रहे हैं।

सुमित्रा राजवाड़े बनीं बेकरी वाली दीदी

लखनपुर ब्लाक के पुहपुटरा गांव की समूह विकसित होने पर सुमित्रा राजवाड़े की पहचान बेकरी वाली दीदी के नाम हो रही है। सुमित्रा खुद का व्यवसाय चलाने के साथ दूसरी महिलाओं को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करती हैं, जिस भी महिला को कभी कोई जानकारी की जरूरत होती है तो वह बिना हिचक के वहां जाती भी हैं। नया काम शुरू करने के लिए इधर-उधर से पैसों की भी व्यवस्था करवा देती हैं। सुमित्रा राजवाड़े बेकरी से प्रति माह औसत 30 से 40 हजार रुपये कमा रही हैं। फैक्ट्री के कई अन्य कर्मचारियों को सात से आठ हजार रुपये प्रतिमाह मिल जाते हैं साथ ही गांव गांव बेचने वाले अच्छा खासा आय अर्जित करते है जिनका जीवन का स्तर सुधर गया है। बेकरी दीदी सुमित्रा अभी फिलहाल ब्रेड,मीठा,क्रीम बंद बनाती है आने वाले दिनों में वे केक,कुकीस,क्रिमरोल,दिलखुश बनाने की तैयारियां में जुटी हुई है। उनके इस काम मे उनके पति श्याम राम का भरपूर सहयोग मिल रहा है। 2 लड़के है 10 और 12 साल के उनको उचित शिक्षा दे रही है।

लखनपुर ब्लाक के पुहपुटरा गांव की जया स्वम समूह की बेकरी का अच्छी क्वालिटी का उत्पाद तैयार कर रहीं हैं। उनकी मेहनत से उनका परिवार समृद्ध हुआ है। ब्रेड फैक्ट्री से जुड़कर गांव के कई ग्रामीण अच्छी खासी आय कर रही हैं।

मनोज किस्फोटा-बीपीएम लखनपुर

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