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पर्यावरण : बिहारपुर वन परिक्षेत्र में ईंट भट्ठों की आड़ में जंगलों का सफाया, वन विभाग की 'चुप्पी' पर उठे सवाल।

Rajesh Soni

Sun, May 3, 2026

सूरजपुर। जिले के वन परिक्षेत्र बिहारपुर में इन दिनों वन संपदा की धड़ल्ले से लूट मची है। खैरा,महुली, पेंडारी, थाड़पाथर और बेगारिदाढ़ जैसे गांवों में संचालित दर्जनों अवैध ईंट भट्ठे न केवल राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी काल बन रहे हैं। ​इन अवैध ईंट भट्ठों में ईंटों को पकाने के लिए कोयले या निर्धारित ईंधन के बजाय जंगलों से काटकर लाए गए हरे-भरे पेड़ों का उपयोग किया जा रहा है। सैकड़ों की संख्या में बेशकीमती वृक्षों को काटकर जलाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है। स्थानीय पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि यह अंधाधुंध कटाई नहीं रुकी, तो बिहारपुर का वन क्षेत्र पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और वन्यजीवों का पलायन व अंत निश्चित है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे एक स्थानीय पंचायत सचिव की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि सचिव के रसूख और दबदबे के कारण ग्रामीण खुलकर विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। दिन-दहाड़े ट्रैक्टरों के माध्यम से जंगलों से लकड़ियां ढोई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर सत्ता और प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करती हैं। बिहारपुर वन परिक्षेत्र पहले से ही अवैध लकड़ी परिवहन और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने जैसे मामलों को लेकर विवादों में रहा है। ताजा मामले ने विभाग की कार्यक्षमता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी 'कुंभकर्णी नींद' में सो रहे हैं या जानबूझकर जमीनी हकीकत से आंखें मूंद रखी हैं? फील्ड स्टाफ की संदिग्ध भूमिका भी जांच का विषय है। बहरहाल क्षेत्र में चर्चा है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर वनों की कटाई संभव नहीं है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर कागजी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर वन माफियाओं को अभयदान मिलता रहेगा।

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