पुलिस पेट्रोलिंग का ‘धक्का-प्लान : खाकी की साख बीच सड़क हांफी, गश्त छोड़ जवानों ने लगाया ‘जोर लगा के हईशा!’
Subhas Gupta
Tue, Oct 20, 2026
सूरजपुर।अपराधियों की कमर तोड़ने का दम भरने वाली सूरजपुर कोतवाली पुलिस की आधी रात को उस वक्त खुद ‘कमर’ टूट गई, जब सरकारी वाहन ने बीच मंझधार में बेवफाई कर दी। अपराधियों में खौफ भरने के इरादे से सायरन बजाते निकली पेट्रोलिंग वाहन खुद इतनी सहम गई कि सन्नाटे के बीच सड़क पर उसने दम तोड़ दिया। फिर क्या था, कानून के लंबे हाथ अपराधियों के गिरेबान तक पहुंचने के बजाय अपनी ही गाड़ी को धक्का लगाने में जुट गए!
आधी रात, सन्नाटा और गाड़ी का ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’
वाकया बीती रात करीब एक बजे का है। भैयाथान रोड पर मुस्तैदी से गश्त जारी थी, जवान पैनी नजरों से असामाजिक तत्वों को तलाश रहे थे। तभी अचानक सरकारी वाहन को शायद ड्यूटी से ‘आजादी’ की सूझी। गाड़ी का क्लच प्लेट जवाब दे गया, गियर अड़ गए और पहिए वहीं थम गए। सायरन की गूंज शांत हो चुकी थी और बीच सड़क पर खाकी की बेबसी का तमाशा शुरू हो चुका था।
मैकेनिक ने खड़े किए हाथ, फिर शुरू हुआ ‘जन-सहयोग’ का दंगल
आधी रात को आनन-फानन में मैकेनिक को जगाकर मौके पर बुलाया गया। मैकेनिक ने गाड़ी की नब्ज टटोली, औजार खड़काए, लेकिन हालत देख उसने भी दोनों हाथ खड़े कर दिए। अब जवानों के सामने दो ही रास्ते थे—या तो वहीं खड़े रहकर गाड़ी का मातम मनाएं, या फिर खाकी का पसीना बहाएं।
आखिरकार ‘पुलिस-पब्लिक पार्टनरशिप’ का सबसे नायाब नमूना सड़क पर दिखा। ड्यूटी पर तैनात जवानों ने लाठी-पिस्तौल का रौब किनारे रखा और राहगीरों के साथ मिलकर ‘जोर लगा के हईशा’ की तर्ज पर गाड़ी को पीछे से धकेलना शुरू किया। पसीने से तर-बतर जवान आधी रात को अपराधियों को नहीं, बल्कि उस खटारा गाड़ी को धकेलते हुए बमुश्किल कोतवाली थाने तक ले जा सके।
सुबह की चाय पर चुस्की: ‘अपराधी डरेंगे या हंस-हंसकर लोटपोट होंगे?’
सूरजपुर की सुबह जब खुली, तो चाय की थड़ियों पर यह किस्सा गरमा-गरम जलेबी की तरह बिका। लोग चटखारे लेते हुए पूछ रहे हैं कि गनीमत रही रात में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई, वरना क्या पुलिस बदमाशों का पीछा करने के लिए उनसे ही गाड़ी को धक्का लगवाने की मदद मांगती?
हांफते वाहनों के दम पर स्मार्ट पुलिसिंग का ढिंढोरा पीटने वाले महकमे की हकीकत अब सड़क पर नंगी हो चुकी है। फिलहाल धक्के खाकर गाड़ी थाने में सुकून की नींद सो रही है, जवानों के बदन का दर्द बाम की मांग कर रहा है, और कोतवाली की डायरी में बड़े-बड़े अक्षरों में दर्ज है—‘शहर में अमन-चैन है, बाकी सब चंगा सी!’
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