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राख के नीचे सुलगता आक्रोश, पुलिस की धरपकड़ शुरू, निर्दोष फंसे तो थाने के घेराव का अल्टीमेटम

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महिला की मौत के बाद क्रेशर फूंका, बंधक बने SDOP, TI और तहसीलदार की कथित पिटाई; कानून-व्यवस्था हुई ध्वस्त

बस्ती में दौड़ते भारी वाहन, उजड़ते परिवार, एक महिला की मौत ने खोली व्यवस्था की पोल, गुस्से में सड़क पर उतरा गांव

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बिहारपुर हिंसा : राख के नीचे सुलगता आक्रोश, पुलिस की धरपकड़ शुरू, निर्दोष फंसे तो थाने के घेराव का अल्टीमेटम

Subhas Gupta

Sun, Oct 18, 2026

सूरजपुर। महिला की कुचलकर हुई मौत के बाद रणक्षेत्र बने बिहारपुर में खाकी की भारी तैनाती ने उपद्रव की आग तो बुझा दी है, लेकिन इलाके में तनाव और अविश्वास का धुआं अब भी गहरा है। रविवार को मृतका चंद्रावती जायसवाल की चिता शांत होने के साथ ही पुलिस ने आगजनी, तोड़फोड़ और अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कुबेरपुर क्षेत्र से कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने के बाद ग्रामीणों ने दो-टूक कहा कि उपद्रवियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोषों पर डंडा चला तो थाने का घेराव कर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

​ट्रैक्टर बदलने की 'साजिश' ने भड़काई थी चिंगारी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आबादी के क्षेत्र में चल रहे स्टोन क्रेशर और बेलगाम दौड़ते ओवरलोड वाहनों को लेकर ग्रामीण महीनों से बारूद के ढेर पर बैठे थे। शनिवार को गिट्टी लदे ट्रैक्टर ने चंद्रावती को कुचला तो सब्र का बांध टूट गया। आग में घी का काम किया उस कथित लीपापोती ने, जिसमें आरोप है कि असल दुर्घटनाकारी ट्रैक्टर को छिपाकर दूसरे वाहन को खड़ा करने की कोशिश की गई। इस 'सांठगांठ' की भनक लगते ही भीड़ का गुस्सा बेकाबू हो गया और सड़क मार्ग जाम कर उसने क्रेशर में आगजनी कर मौके पर पहुंचे पुलिस अमले को घेर लिया।

​कानूनी शिकंजा कसा, पर आधिकारिक चुप्पी बरकरार

स्थिति पर काबू पाने के बाद पुलिस अब वीडियो फुटेज और इनपुट के आधार पर उपद्रवियों की शिनाख्त में जुटी है। कुबेरपुर में दी गई दबिश के बाद हिरासत में लिए गए ग्रामीणों से पूछताछ जारी है। हालांकि, पुलिस किन संगीन धाराओं में कितनों पर एफआईआर दर्ज कर रही है, इस पर अफसरों ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं।

​दहशत और सन्नाटे के बीच आर-पार के संकेत

फिलहाल बिहारपुर में भारी पुलिस बल गश्त कर रहा है, लेकिन सन्नाटे के पीछे भारी बेचैनी है। ग्रामीणों का रुख सख्त है उपद्रवियों पर कानूनी कार्रवाई से उन्हें गुरेज नहीं, पर पुलिसिया जांच की आड़ में आम ग्रामीणों के उत्पीड़न की कोई भी कोशिश नए सिरे से बड़े जनाक्रोश को जन्म दे सकती है।

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