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सूरजपुर में मरे हुए किसान को दिया 1.29 लाख का लोन, अब बेटे से मांगा जा रहा 'मुर्दे का ब्याज'

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कफ़न से भी कर्ज़ वसूलने का 'सिस्टम' : सूरजपुर में मरे हुए किसान को दिया 1.29 लाख का लोन, अब बेटे से मांगा जा रहा 'मुर्दे का ब्याज'

Rajesh Soni

Fri, Oct 16, 2026

सूरजपुर। सरकारी फाइलों में मुंशी प्रेमचंद का 'होरी' आज भी जिंदा है—फर्क बस इतना है कि अब वह मरने के बाद भी चैन से नहीं सो सकता, क्योंकि सहकारी तंत्र के सफेदपोश गिद्ध उसकी कब्र पर भी अंगूठा लगवाकर लाखों डकारने का हुनर सीख चुके हैं।

​आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सोनपुर (पंजीयन क्र. 580) ने 'डिजिटल और पारदर्शी' भारत में एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है जिसे विज्ञान भी नकार दे। यहाँ एक किसान की रूह श्मशान से लौटकर बैंक में खड़ी हुई, बाकायदा अर्जी लगाई और 1 लाख 29 हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन लेकर फिर परलोक सिधार गई। अब उसी अलौकिक कर्ज के एवज में उसके बेबस बेटे को 64 हजार रुपये की वसूली का फरमान थमा दिया गया है।

​मौत मई में, दस्तखत जून में: जब स्वर्ग तक पहुँच गई 'लोन की फाइल'

​ग्राम खड़गवां के किसान हरिप्रसाद ने 10 मई 2021 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। सरकारी मुहर के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हुआ। मगर समिति के कर्मचारी जिवतेश श्रीवास्तव के पास शायद 'यमलोक' से भी दस्तखत कराने की विशेष शक्ति थी।

​पिता के देहांत के ठीक 20 दिन बाद—1 जून 2021 को कागजों में हरिप्रसाद जी को जीवित किया गया, उनके नाम पर केसीसी लोन मंजूर हुआ और उसी दिन ₹75,000 निकाल लिए गए। भूख यहीं शांत नहीं हुई, तो 11 जून को फिर ₹54,000 की निकासी कर ली गई। यानी कुल ₹1.29 लाख का वारा-न्यारा उस व्यक्ति के नाम पर हुआ, जिसकी चिता की राख भी तब तक ठंडी हो चुकी थी।

​'सेटिंग' का खेल और वसूली का नया पैंतरा

​फर्जीवाड़े की बू जब 2024 में बैंक स्टेटमेंट से बाहर आई, तो पीड़ित पुत्र देवी प्रसाद ने कलेक्टर जनदर्शन की चौखट खटखटाई। पकड़े जाने के डर से संबंधित कर्मचारी ने आनन-फानन में खुद ही बैंक शाखा भैयाथान में ₹1.29 लाख जमा कर दिए और 'सब कुछ निपट गया' का झांसा देकर शिकायत वापस करा ली।

​लेकिन भ्रष्टाचार की यह दुकान इतनी आसानी से बंद कहाँ होती! 7 अक्टूबर 2026 को समिति ने फिर एक तुगलकी फरमान जारी कर दिया। स्वर्गीय हरिप्रसाद के नाम फिर डिमांड नोटिस चिपका दिया गया—मूलधन ₹50,829 और ब्याज ₹13,683, यानी कुल ₹64,512 की वसूली का नया अल्टीमेटम।

​जीते जी तो किसान खाद-बीज के लिए कतारों में जूते घिसता है, पर मरने के बाद बिना मांगे ही उस पर लाखों का कर्ज बरस जाता है।

​सवाल तंत्र से: क्या मुर्दे जेल जाएंगे या लुटेरे?

​पीड़ित बेटे ने 14 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर सूरजपुर के सामने पेश होकर न केवल न्याय की गुहार लगाई है, बल्कि फर्जी दस्तावेज जब्त कर कर्मचारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने और उसे पद से बर्खास्त करने की मांग की है। शिकायत की प्रतियां सहकारिता सचिव से लेकर संभागीय अधिकारियों तक भेजी गई हैं।

​अब सवाल यह उठता है कि क्या कलेक्टर की कलम इस संगठित डकैती पर एफआईआर दर्ज कराने की हिम्मत दिखाएगी, या फिर यह फाइल भी किसी दराज में दफन होकर उस दिन का इंतजार करेगी जब मृतक किसान के पोते के नाम एक और नोटिस जारी हो सके

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