ऑन द स्पॉट’ न्याय : 1000 रुपये के पंप पर कानून की फजीहत, आरोपियों को जूतों की माला पहनाकर निकाला जुलूस
Subhas Gupta
Fri, Oct 16, 2026
सूरजपुर। कानून की किताबें अलमारियों में धूल फांकती रहीं और सूरजपुर के एक गांव ने बिना वकील, बिना दलील अपना 'त्वरित फैसला' सुना डाला। ग्राम पंचायत आमगांव में एक पानी का पंप क्या चोरी हुआ, आक्रोशित ग्रामीणों ने सीधे खुद को अदालत और जल्लाद दोनों मान लिया। चोरी के शक में पकड़े गए दो युवकों को अर्ध नग्न कर गले में जूतों की माला डाली गई, मारपीट की गई और पूरे गांव में उनका बाकायदा 'अपमान जुलूस' निकाला गया।
घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तैर रहा है, जहां लोग इसे कानून-व्यवस्था के मुंह पर तमाचे की तरह देख रहे हैं।
एक हजार रुपये की चोरी पर 'आदम युग' की सजा
पूरा मामला ग्राम पंचायत आमगांव का है, जहां से एक सिंचाई पंप चोरी होने का आरोप लगा। आरोप यह भी मढ़ा गया कि ग्राम पंचायत कोट के रहने वाले दो युवकों ने इसे औने-पौने दाम, महज 1,000 रुपये में ठिकाने लगा दिया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी सभ्य समाज की तस्वीर तो कतई पेश नहीं करता। ग्रामीणों ने पुलिस के पास जाने की ज़हमत उठाने के बजाय कानून को अपनी लाठियों पर नचाना बेहतर समझा। दोनों संदिग्धों को पकड़ा गया, जूतों-चप्पलों की माला पहनाई गई, जमकर धुन दिया गया और सरेआम गांव भर में घुमाया गया।
भीड़ का न्याय या व्यवस्था की नाकामी?
इलाके में चोरी की बढ़ती घटनाओं से ग्रामीणों की हताशा समझी जा सकती है, लेकिन जब हताशा 'तालिबानी इंसाफ' में तब्दील हो जाए, तो सवाल खाकी और हुकूमत पर उठते हैं। क्या सिस्टम इतना सुस्त हो चुका है कि जनता को अपनी अदालतें लगानी पड़ रही हैं? या फिर लोगों में कानून का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि वे खुलेआम इंसानियत को जूतों के नीचे रौंदने से भी नहीं हिचकते?
पुलिस की जांच का रटा-रटाया इंतजार
हैरानी की बात यह भी है कि जिस चोरी और खरीद-फरोख्त को लेकर इतना बड़ा बवाल खड़ा कर दिया गया, उसकी कोई आधिकारिक पुष्टि तक नहीं हुई है। यानी अगर दोनों बेकसूर निकले, तो उनके छीने गए आत्मसम्मान का हिसाब कौन देगा? फिलहाल पुलिस से औपचारिक रुख और कानूनी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है—वही औपचारिकता, जिसकी अनदेखी कर भीड़ ने अपना काम तमाम कर दिया।
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