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सूरजपुर के ‘स्नेह संबल’ ने बदली उपेक्षित बुजुर्गों की दुनिया, जिला प्रशासन ने नवाजा

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अपनों से छूटे हाथों को जब संवेदनाओं का सहारा मिला : सूरजपुर के ‘स्नेह संबल’ ने बदली उपेक्षित बुजुर्गों की दुनिया, जिला प्रशासन ने नवाजा

Rajesh Soni

Fri, Oct 16, 2026

सूरजपुर। ढलती उम्र में जब अपनों की बेरुखी और तन्हाई बुजुर्गों के जेहन में गहरे अवसाद की दीवारें खड़ी कर देती है, तब कोई एक हाथ अगर सिर पर ममता और अपनत्व की छांव बनकर टिक जाए, तो मुरझाई हुई जिंदगी दोबारा खिल उठती है; सूरजपुर का ‘स्नेह संबल वृद्धाश्रम’ आज इसी मानवीय संवेदना का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला चिकित्सालय में आयोजित ‘मन जागृति अभियान’ के गरिमामयी मंच पर जब समाज कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में शबरी सेवा संस्थान द्वारा संचालित इस आश्रम को जिला स्तरीय सम्मान से अलंकृत किया गया, तो दरअसल यह सम्मान सिर्फ एक संस्था का नहीं, बल्कि समाज के उस खोते हुए मूल्य का पुनर्जीवन था जो बुजुर्गों को बोझ नहीं, अपनी धरोहर मानता है। आश्रम की अधीक्षिका श्रीमती पायल गुप्ता जिन्होंने बेसहारा और मानसिक तनाव से जूझते वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को संवारने को ही अपनी साधना बना लिया है, ने जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला नोडल अधिकारी के हाथों प्रशस्ति-पत्र ग्रहण किया, तो पूरा सभागार इस निस्वार्थ सेवा के सम्मान में तालियों से गूंज उठा। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया कि आधुनिक दौर में मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल दवाओं से नहीं बल्कि आत्मीयता से संभव है, और श्रीमती गुप्ता की यह पहल पूरे समाज के अंतर्मन को झकझोरने वाली नजीर है। इस पर भावुक किंतु दृढ़ स्वर में पायल गुप्ता ने कहा कि जब तक समाज से मानसिक अवसाद की हिचक मिटाकर हर बेसहारा बुजुर्ग के चेहरे पर आत्मसम्मान की मुस्कान नहीं लौट आती, तब तक यह सफर अधूरा है—क्योंकि असली उपलब्धि प्रशस्ति-पत्र नहीं, उन कांपते हाथों की दुआएं हैं जो हर सुबह हमें जीने की नई वजह देती हैं।

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