ब्रेकिंग

भास्करपारा कोल खदान में भारी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के घरों में आई दरारें, दहशत का माहौल

अनियंत्रित होकर पलटा ट्रैक्टर, चालक की दर्दनाक मौत!

बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

मुआवजा राशि और मामूली विवाद बना हत्या का कारण, आरोपी पुत्र गिरफ्तार

कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने नवपदस्थ कलेक्टर रेना जमील का किया आत्मीय स्वागत

सूचना

: शीत ऋतु मे कैसे रखे अपना ख्याल...क्या-क्या सावधानी बरते...

Admin

Sun, Dec 22, 2019

शीत ऋतु मे कैसे रखे अपना ख्याल.....
1 मुख्य रुप से तीन ऋतुए होती है-शीत ऋतु,ग्रीष्म ऋतु,वर्षा ऋतु साथ ही अगर आयुर्वेद के अनुसार 6 ऋतुए माने गये है बसंत,ग्रीष्म,वर्षा,शरद,हेमन्त और शिशिर ऋतु। पुरे साल की बात करे वर्ष के दो भाग होते है जिसमे पहले भाग आदान काल मे सुर्य उत्तर की ओर से गति करता है तथा दुसरे भाग विसर्ग काल मे सूर्य दक्षिण की ओर गति करता है। आदान काल मे शिशिर काल मे वर्षा,शरद एंव हेमन्त ऋतुए होती है। आदान के समय सूर्य बलवान और चंद्र क्षीण बल रहता है।
शिशिर ऋतु उत्तम बलवाली,बसंत मध्यम बलवाली और ग्रीष्म दौर्बल्य वाली होती है।विसर्ग काल मे चंद्र बलवान और सूर्य क्षीणबल रहता है चंद्र पोषण करने वाला रहता है। वर्षा ऋतु दौर्बल्य,शरद ऋतु मध्यम बाल के साथ हेमन्त ऋतु उत्तम बलवाली होती है।
2 हेमन्त और शिशिर ऋतू में दिनचर्या- शीतकाल अदानकाल और विसर्गकाल दोनों संधिकाल होने से गुणो का लाभ लिया जा सकता है क्योकि विर्सगकाल की पोषक शक्ति हेमेन्त ऋतु मे बल प्रदान करती है। सूर्य की हल्की और प्रारंभिक किरणे सुहावनी लगती है। शीत काल मे मनुष्य को प्राकृतिक रुप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है मनुष्य की जठराग्नि ठंड के कारण शरीर के छिद्रो के संकुचित हो जाने से जठर मे सुरक्षित रहती है और इस कारण अधिक प्रबल हो जाती है अत शीत ऋतु मे शरीर को बलवाल बनाने के लिये पौष्टिक शक्तिवर्धक और गुणकारी व्यजनो का सेवन करना चाहिए।


3 आहार-यदि इस ऋतु मे जठराग्नि के अनुसार आहार न लिया जाये तो वायु के प्रकोपजन्य रोगो के होने के संभावना रहती है इस ऋतु मे काले देशी चने,केले,आवले का मुरब्बा,तिल,गुड, लहसुन,नारियल,खजुर,मुंगफली,गेंहु,धी, तेल, अदरक, सोंठ आदि का सेवन अत्याधिक करना चाहियें। इस ऋतु मधुर तिक्त एंव अम्ल रस युक्त स्निग्ध भोजन विशेषकर करना चाहिये। साथ ही मकई, गन्ने के रस से बने पदार्थ,शहद एंव जौ का भी सेवन करना चाहिए। जिन्हे कब्ज की तकलीफ हो उन्हे सुबह खाली पेट हरड, गुड अथवा मुलेठी एंव त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यदि अम्ल पित्त (Hyperacidity) हो ता मिश्री के साथ अमलतास मुन्नका एंव कुटकी का चुर्ण सेवन करे।

4 विहार-आहार के साथ विहार एंव रहन सहन मे भी सावधानी रखना आवश्यक है इस ऋतु मे तेल की मालिस करनी चाहिए। चने के आटे,केसर, आवले,कुमकुम,अगरु,लोध्र के उबटन का प्रयोग स्नान के पूर्व करना चाहिए। योगासन दण्ड बैठक,दौडना,प्राणायाम आदि का अभ्यास करना चाहिए। सूर्य नमस्कार एंव सूर्य स्नान इस ऋतु मे लाभदायक है सामान्य गर्म पानी से स्नान करे किन्तु सर पर गर्म पानी नही डाले।

5 अपथ्य-इस ऋतु मे अत्याधिक ठंड सहना,ठंडा पानी,ठंडी हवा,भुखा रहना,उपवास करना,रुक्ष कडवा, कसौला,ठंडा भोज्य पदार्थ, दिन मे सोना, क्रोध, ईष्या,द्वेश व्याकुल रहना हानिकारक है।

6 बचाव एंव सावधानी-आमवात (Rhumatoid arthritis) संधिवात (Osteoartritis) वातरक्त (Goyut)पक्षाघात(Paralysis)के रोगियो को ठंडा एंव खटटे भोज्य पदार्थो से परहेज करना चाहिये। उच्च रक्तचाप (Hypertension) हदय रोगी(Heart Patients) को विशेष रुप से अपना बचाव करना चाहिए| बच्चो एंव वृद्धजनो को गर्म पोषाक पहनकर, विशेषत सिर का ठंड का बचाव करना चाहिए।

डा0 संध्या पाण्डेय
बी0ए0एम0एस0एम0डी0
विशेषज्ञ चिकित्सक पंचकर्म एंव आयुर्वेद
मो0 8223047823


विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें